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'हवाई यात्रा से स्वास्थ्य को गंभीर ख़तरा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में किए गए एक अध्ययन के अनुसार हवाई यात्रा करने वाले लोगों में आधे से ज़्यादा के विमान में ऑक्सीजन की कमी के कारण बीमार होने की आशंका रहती है. बेलफ़ास्ट में अनुसंधान में शामिल विमान यात्रियों में से 54 फ़ीसदी के ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा इतनी कम हो गई थी कि उन्हें अतिरिक्त ऑक्सीजन दिए जाने की ज़रूरत महसूस हुई. वैज्ञानिकों ने 84 लोगों पर अध्ययन के दौरान पाया कि उनके ख़ून में ऑक्सीजन का स्तर औसत चार फ़ीसद कम हो गया था. जब विमान ज़मीन पर था उस समय यात्रियों के ख़ून में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य का 97 प्रतिशत रह गया था, विमान के उड़ान भरने के बाद यह मात्रा 93 प्रतिशत ही रह गई. उल्लेखनीय कि अनेक अस्पतालों में किसी रोगी के ख़ून में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से 94 प्रतिशत से नीचे जाने पर उसे अतिरिक्त ऑक्सीजन दिया जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार शरीर में ऑक्सजीन का स्तर गिरने से कोई व्यक्ति सांस लेने में परेशानी महसूस करने लगता है, उसे सिरदर्द की शिकायत होती है और दम घुटने तक की नौबत आ सकती है. 'चिंता नहीं' अनुसंधान रिपोर्ट विज्ञान जर्नल एनेस्थीसिया में छपी है. इस अध्ययन से जुड़े मुख्य विशेषज्ञ डॉ. सुसन हम्फ़्री ने कहा, "हम समझते हैं ऑक्सीजन का स्तर गिरने के साथ-साथ डिहाइड्रेशन, चलने-फिरने के मौक़े नहीं होने और विमान केबिन में आर्द्रता कम रहने के कारण यात्रियों के बीमार होने की आशंका रहती है." उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में विमानों के और तेज़, और ऊँचा उड़ते जाने के कारण यह समस्या गंभीर हो गई है. लेकिन ब्रिटेन के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के एक प्रवक्ता ने कहा है कि स्वस्थ व्यक्तियों को विमान यात्रा से घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है. प्रवक्ता ने कहा, "स्वस्थ यात्रियों को ऑक्सीजन स्तर घटने से कोई ख़तरा नहीं है. हमारी चिंता सिर्फ़ फेफड़े और दिल की बीमारियों वाले लोगों को लेकर आशंकित है. वैसे लोगों के लिए पहले से ही निर्देश है कि वे हवाई यात्रा करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें." |
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