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'विमानों से पर्यावरण को गंभीर ख़तरा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन के बाद कहा गया है कि यात्री विमानों की बढ़ती संख्या दुनिया को पर्यावरण का सबसे गंभीर ख़तरा है. यॉर्क यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में कहा गया है कि एक ओर तो ग्रीन हाउस गैसों को कम करने का लक्ष्य रखा जा रहा है और दूसरी ओर एयरपोर्ट के विस्तार की योजनाएँ बन रही है. अध्ययन करने वाले प्रोफ़ेसर जॉन व्हाइट लेग और हॉवर्ड कैम्ब्रिज का कहना है कि विमानों से निकलने वाले धुएँ की मात्रा बढ़ती जा रही है. उनका सुझाव है कि एयरलाइनों से नुक़सान के बराबर पर्यावरण क्षतिराशि वसूलनी चाहिए. उधर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की सरकारों ने कहा है कि वे यात्री विमानों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अध्ययन में कहा गया है कि विमानतल पर पहुँचाने वाले 50 प्रतिशत यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन साधनों से विमानतल आना चाहिए. सुझाव दिया गया है कि जिनको भी 400 किलोमीटर से कम दूरी की यात्रा करनी हो उन्हें रेल यात्रा करनी चाहिए और इससे विमानों की संख्या 45 प्रतिशत तक कम की जा सकती है. प्रोफ़ेसर व्हाइटलेग ने बीबीसी से कहा कि यूरोस्टार जैसी तेज़ रफ़्तार रेलों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए. उनका कहना था कि रेल सेवा ऐसी होनी चाहिए जिससे कि विमान यात्राओ का अच्छा विकल्प मिल सके. |
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