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नासा का लेज़र से उड़ने वाला विमान
अमरीका में अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक ऐसे विमान का परीक्षण किया है जो ज़मीन से एक अदृश्य लेज़र किरण के सहारे उड़ता है. इसे एक बड़ी वैज्ञानिक सफलता माना जा रहा है क्योंकि इससे आगे कई रास्ते खुल सकते हैं. बहुत संभव है कि आने वाले दिनों में विमानों को ईंधन की बड़ी टंकियाँ ढोने से छुटकारा मिल जाए. इस परीक्षण में एक छोटे मॉडल विमान को अलाबामा में नासा फ़्लाइट सेंटर में अदृश्य लेज़र किरण की मदद से उड़ाया गया. लेज़र प्रोजेक्ट के प्रमुख रॉबर्ट बर्डेन ने कहा, "यह सचमुच बहुत ही महत्वपूर्ण सफलता है जिससे विमानों के क्षेत्र में नए रास्ते खुल जाएँगे." लगभग तीन सौ ग्राम वज़न वाले इस विमान के डैनों की चौड़ाई पाँच फुट के करीब थी और उसे एक प्लेटफॉर्म पर रखकर उड़ाया गया. एक अदृश्य लेज़र किरण के ज़रिए उसके इंजन को ऊर्जा दी गई और विमान उड़ान भरने लगा और जब लेज़र को स्विच ऑफ़ किया गया तभी वह रूका.
इसके बाद विमान खुद ही धीरे-धीरे नीचे उतर आया. रॉबर्ट बर्डेन ने कहा, "यह विमान तब तक उड़ सकता है जब तक कि इसे ऊर्जा मिलती रहे, इस मामले में ऊर्जा का स्रोत लेज़र किरण है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ." इस विमान में किसी बैटरी या ईंधन की ज़रूरत नहीं होती इसलिए इस पर अधिक से अधिक उपकरण फिट किए जा सकेंगे. ख़ास तौर पर मानवरहित टोही विमान के रूप में इसका इस्तेमाल काफ़ी सफल हो सकता है क्योंकि इस पर तरह-तरह के कैमरे दिशा निर्देश लेने वाले उपकरण फिट हो सकते हैं. कैलिफ़ोर्निया के ड्राइडेन फ्लाइट रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डेविड बुशमैन बताते हैं, "इस विमान पर कोई टेलीफ़ोन कंपनी अपना ट्रांसपॉन्डर रखकर पूरे शहर को फ़ोन की सुविधा दे सकता है यानी बड़ा-सा टावर बनाने की ज़रूरत नहीं." इसका इस्तेमाल केबल टीवी और मोबाइल फ़ोन के सिग्नलों के प्रसार के लिए भी किया जा सकता है. नासा के अधिकारियों का कहना है कि लेज़र तकनीक के क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएँ हैं. |
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