| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंबी उड़ान ख़तरनाक हो सकती है
न्यूज़ीलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया है कि लंबी उड़ान पर जाने वाले 100 में से एक यात्री में रक्त के थक्के जमने की शिकायत देखी गई है. यदि ये थक्के किसी तरह खून के प्रवाह के साथ फेफड़ों में पहुँच जाएँ तो जान पर बन आती है. वैज्ञानिकों ने लंबी उड़ान पर जाने 900 यात्रियों का परीक्षण किया और पाया कि उनमें से नौ को डीप वेन थ्रम्बोसिस (डीवीटी) यानी खून के थक्के जमने की शिकायत पाई गई. विज्ञान पत्रिका द लेंसेट का कहना है कि इन लोगों को ये परेशानी अन्य कारणों से भी हो सकती है. लेकिन इसके पहले के अध्ययनों में लंबी उड़ान पर जाने वालों में डीवीएस की और अधिक संभावना को बताया गया था. ये परेशानी 10 घंटे या उससे अधिक की लंबी हवाई यात्रा से उत्पन्न होती है. क्या है डीवीटी वैज्ञानिकों का कहना है कि जब पैर एक ही स्थिति में लंबे समय तक रहते हैं तो रक्त का प्रवाह धीमा पड़ जाता है. इससे रक्त वाहनियों में खून के थक्के जम जाते हैं. इससे पैरों में सूजन आ जाती है और उनमें दर्द शुरु हो जाता है. इसके बाद पैर सुन्न हो जाता है और स्थिति उसे काटने तक पहुँच जा सकती है. यदि ये थक्के किसी तरह खून के प्रवाह के साथ फेफड़ों में पहुँच जाएँ तो जान पर बन आती है. चिकित्सा संबंधी अनेक रिपोर्टों में कहा गया है कि हवाई यात्रा और डीप वेन थ्रम्बोसिस में सीधा संबंध है. लेकिन कुछ वैज्ञानिक इस तथ्य से सहमत नहीं हैं. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||