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'लाखों महिलाओं-बच्चों की जान ख़तरे में' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में लाखों महिलाओं और बच्चों का जीवन ख़तरे में है. सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर ये रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जारी की है. रिपोर्ट कहती है कि नवजात शिशुओं पर ख़तरा सर्वाधिक है क्योंकि माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जो योजनाएँ बनती हैं उनमें नवजात शिशुओं को भुला दिया जाता है. आज विश्व में हर वर्ष पाँच लाख से भी अधिक महिलाएँ गर्भावस्था के दौरान या बच्चों को जन्म देत समय मारी जाती हैं. वहीं हर साल पाँच वर्ष से कम उम्र के एक करोड़ 10 लाख बच्चे मारे जाते हैं क्योंकि उनको चिकित्सा सुविधाएँ नहीं मिलतीं. और 40 लाख बच्चे हर साल जन्म लेने के एक महीने के भीतर मारे जाते हैं. मगर जो बात महत्वपूर्ण है और जिसके बारे में जानकारी कम है वो ये बात है कि कुछ सस्ते उपायों से ऐसी मौतों की संख्या अच्छी-ख़ासी कम की जा सकती है. धारणा विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए काम करनेवाली बोत्स्वाना की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जॉय पुनापी कहती हैं कि जान बचाने के लिए बच्चों के जन्म के बारे में जारी धारणा को बदलना होगा. वे कहती हैं,"महिलाओं की उपेक्षा होती है क्योंकि माना जाता है कि उनकी जान जाना कोई बड़ी बात नहीं है और ये एक प्राकृतिक घटना भर है". विश्व स्वास्थ्य संगठन दरअसल जो चीज़ चाहता है वो ये कि इस दिशा में अभियान चलाने के लिए लग रही राशि में अच्छी-ख़ासी बढ़ोतरी की जाए. संगठन चाहता है कि माताओं और बच्चों की मौतों की संख्या में कमी के लिए अगले 10 वर्ष तक हर साल नौ अरब डॉलर की रकम ख़र्च की जाए. ये राशि ऐसे मद में ख़र्च की जाएगी जिससे ये तय हो सके कि हर महिला के बच्चे को जन्म देने के समय उसके पास एक प्रशिक्षित सहायक रहे. साथ ही ये भी तय किया जाएगा कि महिलाओं को गर्भावस्था के पहले और गर्भावस्था के दौरान भी स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध रहें. इसके अतिरिक्त बच्चे के जीवन के आरंभिक दिनों में भी उसका ख़याल रखा जाएगा. |
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