BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 08 जनवरी, 2005 को 23:27 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
आधुनिक युग की पहली सूनामी आपदा
News image
धरती की कमज़ोर परत को तोड़कर बाहर निकलता है लावा
हिंद महासागर में 26 दिसंबर 2004 को आए भूकंप से पैदा हुई सूनामी लहरों की विनाशलीला विश्व की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिनी जाती है.

आधुनिक युग की पहली सूनामी आपदा भी हिंद महासागर में ही आई थी, और इसका भी केंद्र इंडोनेशिया के पास ही था.

हालाँकि 1880 के दशक में तबाही मचाने वाली सूनामी लहरें भूकंप की वजह से नहीं बल्कि जावा और सुमात्रा के बीच स्थिक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने से पैदा हुई थीं.

एक जर्मन व्यक्ति अगस्त 1883 में आई इन सूनामी लहरों से बाल-बाल बच निकला और बाद में उसने अपने अनुभवों के बारे में लिखा था.

जिस समय सूनामी लहरे आई वे 30 मीटर ऊँचे पहाड़ पर स्थित तीन मंज़िली इमारत में अपने दफ़्तर में बैठा था.

उसने लिखा कि उस सोमवार की सुबह 40 मीटर उँची लहरें आईं और उसे अपने साथ बहाकर ले गईं.

जब वह लहरों के साथ बह रहा था उसे एक घड़ियाल पर सवार होना पड़ा. मगर ये भी कोई आसान काम नहीं था, उसे घड़ियाल की आँखों में अपने अंगूठा डालकर अपने आप को बचाना पड़ा.

आख़िरकार, सूनामी लहर जब थमी तो वो वहाँ से भाग निकला.

आधुनिक युग की पहली आपदा

क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने और उसके बाद आई सूनामी लहरों को औपचारिक रूप से आधुनिक युग की पहली प्राकृतिक आपदा माना जाता है.

26 दिसंबर को सूमात्रा के पास आए भूकंप के जो कारण थे क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने के पीछे भी वही कारण थे और उनका प्रभाव भी उतना ही गहरा हुआ है.

माना जाता है कि जब क्राकाटोआ ज्वालामुखी फटा तो धमाका इतना ज़ोरदार था क़रीब 4,776 किलोमीटर दूर रोड्रीग्स द्वीपों में पुलिस प्रमुख का कहना था कि उन्हें आवाज़ साफ़ सुनाई दी थी.

फिर जब ज्वालामुखी फटा तो 6 हज़ार सो भी ज़्यादा किलोमीटर दूर लाशें तैरती नज़र आई थीं.

माना जाता है कि इसके बाद आई सूनामी लहरों से प्रभावित जावा और सुमात्रा द्वीपों में 40 हज़ार लोग मारे गए थे.

क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने के समय विश्व में विज्ञान इतना विकसित नहीं था कि वो भूकंप और ज्वालामुखी को समझ पाए.

उस वक़्त लोगों ने ईश्वर से अपने सवालों का जवाब मांगा था. यहाँ तक की जावा द्वीप में कुछ इस्लामिक नेताओं ने कहा था कि ये अल्लाह के क्रोध का संकेत है.

क्राकाटोआ त्रासदी ने इंडोनेशिया समेत कई देशों में भयंकर तबाही मचाई थी मगर अब अगर उन्हीं देशों उन्हीं द्वीपों को देखें तो मनुष्य ने फिर वहीं गांव बसाए हैं, वहाँ पुनर्निमाण किया है.

इस बार हिंद महासागर में आए भूकंप के बाद उठे समुद्री उफान से जो इलाक़े तबाह हुए हैं वहाँ भी मनुष्य अपना घर ज़रूर बसाएगा चाहे उसे इसके लिए कुछ समय लगे.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>