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जेनेसिस कैप्सूल के नमूने 'सुरक्षित' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी अंतरिक्ष यान जेनेसिस ने सूरज के कणों के जो नमूने एक कैप्सूल में भेजे थे वे अब भी सुरक्षित हैं, बुधवार को यह कैप्सूल धरती पर गिरा था और वैज्ञानिक मान रहे थे कि नमूने नष्ट हो गए हैं. बुधवार की निराशा के बाद अब अमरीकी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि सूरज की सतह से उड़ने वाले कणों को परीक्षण के लिए धरती पर लाने का अभियान मोटे तौर पर सफल ही रहा है. अमरीकी की लॉस एल्मोस राष्ट्रीय प्रयोगशाला के वैज्ञानिक रॉजर वाइन्स ने कहा, "इस वैज्ञानिक अभियान के अगर सभी नहीं तो, ज़्यादातर लक्ष्य पूरे हो जाएँगे." बुधवार को जेनेसिस से छूटा कैप्सूल पैराशूट के सहारे धीरे-धीरे उतरने के बदले जब यूटा के रेगिस्तान में सीधे जा गिरा तो वैज्ञानिकों को भारी सदमा लगा, बताया गया कि बैटरी की ख़राबी के कारण कैप्सूल से जुड़ा पैराशूट खुला ही नहीं. इन कणों के ज़रिए वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि अब से लगभग साढ़े चार अरब वर्ष पहले सूरज और पृथ्वी जैसे ग्रह कैसे बने थे. वैज्ञानिकों ने विशेष टॉर्चों और आईनों के ज़रिए कैप्सूल के अंदर देखने के बाद घोषणा की है कि उसका ज़्यादातर हिस्सा अब भी सुरक्षित है. कैप्सूल के अंदर के हिस्से में कई परतें लगी थीं जिनमें सूरज के कण जमा हो रहे थे, ये परतें गिरने के बाद भी सही-सलामत हैं. इस परियोजना के मुख्य इंजीनियर डॉन सेविला ने कहा कि इस कैप्सूल के गिर जाने से नमूनों का नुक़सान तो हुआ है लेकिन इससे विज्ञान को अभी भी बहुत मदद मिल सकती है. नाकामी योजना यह थी कि कैप्सूल में लगी बैटरी के सहारे पैराशूट खुलेंगे जिससे वह धीरे-धीरे ज़मीन पर उतर आएगा, इस उतरते हुए कैप्सूल को हवा में ही पकड़ने के लिए एक हेलिकॉप्टर को तैनात किया गया था. लेकिन पैराशूट खुला ही नहीं, कैप्सूल 310 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से सीधा ज़मीन पर आया और हॉलीवुड की फ़िल्मों में हैरतअंगेज़ कारनामों के लिए जान की बाज़ी लगाने वाला स्टंट पायलट देखता रह गया. यूटा के रेगिस्तान में गिरे 205 किलो के इस कैप्सूल को अमरीकी सेना के विशेष रूप से तैयार किए गए धूलमुक्त कक्ष में ले जाया गया जहाँ वैज्ञानिक इसके अध्ययन में जुटे हैं. अब से तीन वर्ष पहले नासा ने 26 करोड़ डॉलर की लागत से जेनेसिस परियोजना शुरू की थी. |
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