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शनिवार, 08 मई, 2004 को 22:49 GMT तक के समाचार
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'सासेर वायरस का जन्मदाता' गिरफ़्तार
कंप्यूटर
सासेर वायरस इंटरनेट के ज़रिए कंप्यूटर को निशाना बनाता है.
जर्मनी के एक छात्र ने 'सासेर' इंटरनेट वायरस बनाना क़बूल कर किया है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार 18 साल का ये युवक हाई स्कूल का छात्र है.

पिछले सप्ताह 'सासेर' वायरस ने क़रीब दस लाख कम्प्यूटरों को निशाना बनाया था, जिसकी वजह से इंटरनेट पर काम करने वाले छोटे-बड़े व्यावसायिक संगठनों को भारी नुकसान पहुँचा था.

इस वायरस के जन्मदाता दोषी युवक को एफबीआई और माइक्रोसॉफ्ट की मदद से शुक्रवार को उत्तरी जर्मनी के रॉटनबर्ग शहर से गिरफ़्तार किया गया. लेकिन कुछ समय बाद उसे छोड़ दिया गया.

पुलिस ने उसके घर से कई कम्प्यूटर और डिस्क भी बरामद किए हैं.

हालाँकि पुलिस ने इस किशोर के बारे में ज़्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया लेकिन जर्मनी के एक अख़बार ने ये रिपोर्ट छापी थी कि सीआईए और एफबीआई इस सिलसिले में स्टीवन जे नाम के युवक की तलाश कर रही है.

गिरफ़्तारी

पुलिस के प्रवक्ता फ्रैंक फेदेरू का कहना है, "उसने अपना जुर्म क़बूल किया है और माइक्रोसॉफ्ट के विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वही इस वायरस का जन्मदाता था."

 उसने अपना जुर्म क़बूल किया है और माइक्रोसॉफ्ट के विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वही इस वायरस का जन्मदाता था
फ़्रैंक फेदेरू, पुलिस प्रवक्ता

बुधवार को कुछ सूत्रों ने इस किशोर के बारे में जानकारी देते हुए ये जानना चाहा कि इसके लिए कितना इनाम मिलेगा.

शनिवार को माइक्रोसॉफ्ट के 'जनरल काउंसल' ब्रैड स्मिथ ने कहा कि वे जानकारी देने वालों को पैसा देने के लिए तैयार हैं.

इससे पहले भी माइक्रोसॉफ्ट ने कई बुरे वायरस के दोषियों के सिर पर ढाई लाख डॉलर तक का इनाम रखा था.

जर्मनी की आईटी सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि कम्प्यूटरों में चार तरह के सासेर वायरस थे और अभी ये कहना मुश्किल है कि ये किशोर इन सभी के लिए ज़िम्मेदार था.

नेटस्काई से संबंध

सासेर एक मई को सामने आने के बाद पूरी दुनिया में फैल गया था.

कई अस्पताल, बैंक, हवाई सेवा, सरकारी एजेंसियाँ और घरों से काम करने वाले कारोबारी इससे प्रभावित हुए.

विंडोज़ 2000, विंडोज़ सरवर 2003 और विंडोज़ एक्स-पी पर इसका हमला हुआ.

विशेषज्ञों के अनुसार कम्प्यूटर के इंटरनेट से जुड़ने के दस मिनट के भीतर कम्प्यूटर इससे संक्रमित हो जाते थे.

इस वायरस हमले के 48 घंटे के अंदर ही क़रीब 15 लाख लोगों ने माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट पर जाकर सासेर से अपने कम्प्यूटर को साफ़ कराने की कोशिश की थी.

हालाँकि इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये वायरस बिल्कुल ख़त्म नहीं होगा और कभी भी फिर सामने आ सकता है.

विशेषज्ञों ने ये भी आशंका जताई है कि सासेर का संबंध एक पुराने वायरस नेटस्काई से भी हो सकता है.

पुलिस प्रवक्ता ने ये तो स्पष्ट नहीं किया कि पकड़े गए किशोर की नेटस्काई के बारे में भी जांच
की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बारे में भी कुछ निकल कर आता है तो ये एक बड़ी क़ामयाबी होगी.

एक ब्रितानी सुरक्षा संस्था के ग्राहम क्लूली कहते हैं, "हो सकता है कि इस गिरफ़्तारी से पुलिस के हाथ नेटस्काई गैंग लग गया हो. हो सकता है कि पूरा मसला ही सुलझ जाए."

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