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सासेर वायरस की खोज तेज हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंटरनेट के ज़रिए बहुत तेज़ी से फैले एक नए तरह के कंप्यूटर वायरस सासेर को बनाने वालों की खोज तेज़ कर दी गई है. ग़ौरतलब है कि सासेर नाम के इस नए वायरस ने क़रीब दस लाख कम्प्यूटरों को निशाना बनाया है और दुनिया भर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के लिए बहुत मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. अब सासेर के कंप्यूटर कोड का विश्लेषण किया जा रहा और इस पहेली को सुलझाने की कोशिश की जा रही है कि इस बुरी नीयत वाले कंप्यूटर प्रोग्राम को किसने बनाया होगा. माइक्रोसॉफ़्ट ने कहा था कि के विंडोज़ पर हमला करने वाला ये सबसे नए तरह का वायरस है और दुनिया के अधिकतर कंप्यूटर इसी प्रणाली के आधार पर काम करते हैं. 'सासेर' नाम के इस वायरस की वजह से इंटरनेट पर लोगों के काम में मुश्किलें आ रही हैं और बहुते से लोगों ने इंटरनेट का इस्तेमाल कम कर दिया. अब तक तो वायरस किसी ई-मेल के ज़रिए आते थे मगर इस वायरस का असर कंप्यूटर ऑन करके इंटरनेट पर जाने के साथ ही हो जाता है. इससे घरों पर इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले और छोड़े कारोबारी तो प्रभावित हुए ही हैं, बड़े व्यावसायिक संगठनों को भी भारी नुक़सान हुआ है.
विशेषज्ञों के अनुसार कंप्यूटर के इंटरनेट से जुड़ने के दस मिनट के भीतर कंप्यूटर इससे संक्रमित हो जाता है. इस वायरस के हमले के 48 घंटे के अंदर ही क़रीब 15 लाख लोगों ने माइक्रोसॉफ़्ट की वेबसाइट पर जाकर सासेर से अपने कंप्यूटर को साफ़ कराने की कोशिश की थी. जर्मनी के डाकघरों में तो क़रीब तीन लाख कंप्यूटरों को सासेर ने ऐसा निशाना बनाया कि वहाँ कर्मचारी नक़दी से संबंधित काम कर ही नहीं पाए. अमरीका में क़रीब 500 अस्पताल इसका निशाना बने और वहाँ कई घंटों तक कोई कामकाज नहीं हो सका. इतना ही नहीं वाशिंगटन में भी स्वास्थ्य सेवाएं कई घंटे बाधित रहीं. कोशिशें माइक्रोसॉफ़्ट के एक प्रवक्ता का कहना है कि अमरीकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई सासेर वायरस के कोड का विश्लेषण करके यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसे किसने तैयार किया होगा. फ़िनलैंड की एंटी वायरस कंपनी एफ़ सिक्योर ने सासेर डी और नेट्स्की वी वायरसों का एक विश्लेषण प्रकाशित किया है और दावा किया है कि इन दोनों में कुछ समानताएं हैं. हालाँकि इस विश्लेषण से जाँचकर्ताओं को कोई ख़ास मदद नहीं मिलने वाली है क्योंकि नेट्स्की की विभिन्न श्रेणियों के वायरसों के बनाने वाले 29 लोग अब भी फ़रार हैं. |
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