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अमरीका का दूसरा यान मंगल पर उतरा
अमरीका का दूसरा रोवर यान अपॉर्चुनिटी मंगल ग्रह पर सफलता पूर्वक उतर गया है. वहाँ से उसने संकेत भेजने शुरु कर दिए हैं. इस रोबोट यान को मंगल ग्रह पर पानी की संभावनाओं का पता लगाना है. नए रोवर अपॉर्चुनिटी ने ग्रीनिच मानक समय के अनुसार सुबह पाँच बजकर पाँच मिनट पर उतरा. अमरीकी अंतरिक्ष केंद्र नासा के अनुसार अपॉर्चुनिटी मंगल की एक सपाट सतह पर उतरा है. इससे पहले चार जनवरी को नासा का पहला रोबोट यान स्पिरिट मंगल ग्रह पर उतरा था और वहाँ से उसने ग्रह की रंगीन तस्वीरें भेजी थीं. लेकिन पिछले बुधवार को स्पिरिट ने काम करना बंद कर दिया था. हालांकि नासा के वैज्ञानिक अब कह रहे हैं कि स्पिरिट में आई ख़राबी को दूर करने की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है. अपॉर्चुनिटी ने जो पहली तस्वीर भेजी है वह उस जगह की है जहाँ वह उतरा है. वैज्ञानिकों के अनुसार वहाँ चट्टानों के अलावा कुछ और दिखाई नहीं दे रहा है. उल्लेखनीय है कि अपॉर्चुनिटी जहाँ उतरा है उसके लगभग दूसरे छोर पर पहला रोबोट यान स्पिरिट उतरा था. ख़ुशी का माहौल जैसे ही अपॉर्चुनिटी ने अपने पहुँचने के संकेत पृथ्वी पर भेजे नासा में वैज्ञानिकों में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी और उन्होंने एक दूसरे को गले से लगा लिया. बाद में कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर अरनॉल्ड श्वार्ज़नेगर ने भी वहाँ पहुँचकर टीम को बधाई दी.
संकेतों से पता चलता है कि रोवर में कोई दिक़्क़त नहीं है. सिग्नल में आ रही रुकावटों से अनुमान लगता है कि सतह पर उतरने के बाद यान बीस मिनट तक सतह पर लुढ़कता रहा. वैज्ञानिकों का कहना है कि अपॉर्चुनिटी कोई 19,000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से मंगल में पहुँचा. उसकी रफ़्तार कम करने के लिए यान में पैराशूट लगे हुए थे और उसके चारों ओर कुशन लगे हुए थे. वैज्ञानिकों का कहना है कि अपॉर्चुनिटी जिस तरह उतरा है उसमें उसकी तीन सतहों में से वह सतह ऊपर है जो नीचे होनी चाहिए. इसका मतलब यह है कि पहले उसे अपने आपको सीधा करना होगा. जो स्पिरिट को नहीं करना पड़ा था क्योंकि वह सीधा ही उतरा था. जीवन अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसा के इस अभियान का उद्देश्य मंगल पर जीवन की संभावना तलाशना है. मंगल ग्रह पर खोजबीन में काफ़ी समय से रुचि रही है और माना जाता है कि इस ग्रह पर जीवन होने की संभावना सबसे ज़्यादा है. हाल में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि मंगल की सतह पर उसे पानी के प्रत्यक्ष प्रमाण मिले हैं. मार्स प्रोब के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने मंगल के दक्षिणी हिस्से में बर्फ का भी पता लगाया है. मंगल पर जीवन की खोज में अमरीका और रूस ने 1960 के दशक के बाद से वहाँ अंतरिक्ष यान भेजने की कई कोशिशें की हैं. लेकिन अब तक केवल तीन प्रयासों को ही सफलता मिली. 1976 में 'वाइकिंग' मंगल तक पहुँचा और 1997 में 'मार्स पाथफ़ाइंडर' अभियान ने मंगल की खोजबीन की कोशिशें कीं. |
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