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मंगलवार, 06 जनवरी, 2004 को 20:42 GMT तक के समाचार
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मंगल ग्रह की शानदार रंगीन तस्वीरें आईं
मंगल की सतह
तस्वीरों से लगता है जैसे चट्टान लंबे समय से तेज़ हवा के बीच पड़े थे

मंगल ग्रह की खोजबीन के लिए वहाँ गए स्पिरिट नाम के रोबोट ने मंगल की रंगीन तस्वीरें भेजी हैं.

मंगल की धूल भरी और चट्टानी सतह की ये अब तक की सबसे ज़्यादा विस्तृत तस्वीरें हैं.

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने कहा है कि ये रोबोट बिल्कुल ठीक है और इसे गुस्टेव क्रेटर की जानकारी लेने के लिए तैयार किया जा रहा है.

इस बीच यूरोप की एक स्पेस एजेंसी अपने एक यान बीगल-2 की खोज कर रही है जो इसे लेकर जा रहे यान मार्स एक्सप्रेस से अलग होने के बाद ग़ायब हो गया.

तस्वीरें

मंगल की सतह

 मैं चकित हूँ. हमने स्पिरिट को इसके लिए तैयार किया था इसलिए चकित होना नहीं चाहिए मगर इसके बावजूद तस्वीरें चौंका देनेवाली हैं

जिम बेल, वैज्ञानिक

स्पिरिट से पहली रंगीन तस्वीरों के मिलने के बाद इस अभियान से जुड़े कॉर्नेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक जिम बेल ने कहा कि वे इन तस्वीरों से अभिभूत हैं.

कैलीफ़ोर्निया में नासा की प्रयोगशाला में उन्होंने पत्रकारों को बताया, "मैं चकित हूँ. हमने स्पिरिट को इसके लिए तैयार किया था इसलिए चकित होना नहीं चाहिए मगर इसके बावजूद तस्वीरें चौंका देनेवाली हैं".

नासा ने मार्स की सतह की एक तस्वीर जारी की है जिसमें मंगल पर छोटी चट्टानें और धूल नज़र आ रही है.

ये तस्वीर दरअसल 12 अलग-अलग तस्वीरों को मिलाकर तैयार की गई है जिन्हें स्पिरिट ने पैनकैम नाम के कैमरे से उतारा है.

अध्ययन

जिम बेल ने कहा कि तस्वीरों से ये पता चलता है कि ये चट्टान लंबे समय से ऐसे माहौल में थे जहाँ तेज़ हवा चल रही थी.

मगर उनका कहना था कि इन तस्वीरों से चट्टानों की संरचना का कुछ पता नहीं चलता.

उन्होंने कहा कि अभी सारे आँकड़ों को इकट्ठा कर उनसे जानकारी प्राप्त करने में वक़्त लगेगा.

नासा के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि चट्टानों की इन तस्वीरों से उन्हें इस ग्रह के अतीत के मौसम के बारे में जानकारी मिलेगी.

उन्होंने कहा कि तस्वीरों से ऐसा लगता है कि जहाँ अभी गुसेव क्रेटर है वहाँ कभी एक झील हुआ करती थी.

जनवरी के आख़िर में मंगल ग्रह पर स्पिरिट के ही समान एक और रोबोट भेजा जाएगा जिसका नाम अपॉरच्युनिटि है.

खोज

इस बीच यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी बीगल-2 नाम के उस अंतरिक्ष यान को खोजने में जुटी है जो 25 दिसंबर को मंगल पर उतरने के बाद से ही ग़ायब हो गया है.

अमरीकी उपग्रह मार्स ओडिसी और एक रेडियो टेलीस्कोप से तलाश की कोशिशें नाक़ाम रही हैं.

अब मार्स एक्सप्रेस नाम का वही यान तलाश के लिए भेजा जा रहा है जो बीगल-2 को लेकर गया था.

अगर मार्स एक्सप्रेस बीगल-2 का पता नहीं लगा पाया तो मान लिया जाएगा कि ये यान लापता हो गया.

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