अवसाद का संबंध दिमाग ही नहीं, देह से भी

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अवसाद को आमतौर पर एक दिमागी बीमारी माना जाता है जबकि इसका संबंध देह से भी है.
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि जो दवाइयां ओवरएक्टिव यानी बेहद सक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली को शांत करने के काम आती हैं, संभवतः वही दवाएं अवसाद में भी कारगर हो सकती हैं.
एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर के लगभग 35 करोड़ लोग अवसाद से पीड़ित है.
एक शोध में पाया गया कि इनमें से एक तिहाई लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली बेहद सक्रिय यानी ओवरएक्टिव पाई गई.
लंदन के किंग्स कॉलेज में प्रोफेसर कारमिने परियंते के अनुसार किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली और दिमाग की कार्यशैली के बीच यदि एक कड़ी बनती है तो इसे पिछले 20 वर्ष में मनोरोग विज्ञान के क्षेत्र में हुए सबसे अहम खोजों में से एक माना जाएगा.

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प्रोफेसर परियंते कहते हैं, "यह बेहद महत्वपूर्ण कड़ी है. पहली बार ये बात सामने आई है कि अवसाद का संबंध सिर्फ दिमाग से नहीं होता. इसका संबंध शरीर की गड़बड़ी से भी होता है."
इस कड़ी की पहचान स्थापित हो जाए तो यह इंसानों में अवसाद को ठीक करने में एक क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है.
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