फेसबुक ने एड ब्लॉक के ख़िलाफ़ छेड़ी जंग

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ऑनलाइन विज्ञापन ब्लॉक करने वाले ऐप को लेकर अब जंग बढ़ती जा रही है.
फ़ेसबुक ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि एड ब्लॉक ऐप के ख़िलाफ़ उसने तैयारी कर ली है और अब ऐसे ऐप को खुद ही ब्लॉक करने को तैयार है.
<link type="page"><caption> इस खबर </caption><url href="http://lifehacker.com/facebook-now-blocks-ad-blockers-1785033813" platform="highweb"/></link>के अनुसार, एड ब्लॉक ऐप के खिलाफ़ उसने मोर्चा खोल दिया है.
इससे इंटरनेट पर एड ब्लॉक ऐप इस्तेमाल करने वाले लोग उसका फ़ायदा नहीं उठा पाएंगे.

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लेकिन दूसरी तरफ एडब्लॉक प्लस नाम की कंपनी ने एक फ़िल्टर लॉन्च किया है जिससे फ़ेसबुक की एडब्लॉक ऐप को ब्लॉक करने की कोशिश बेकार हो जाएगी.
अगर आप क्रोम या फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र इस्तेमाल करते हैं तो ये फ़िल्टर इस्तेमाल करके ऑनलाइन विज्ञापनों को ब्लॉक कर सकते हैं.
फ़ेसबुक जैसी कंपनी की मोटी कमाई ऑनलाइन विज्ञापनों से ही होती है और इसीलिए उसने इस काम को करने का बीड़ा उठाया है.
गूगल की भी कमाई ऐसे ही होती है, लेकिन उसके ईमेल, यूट्यूब, सर्च, मैप जैसे कई और सर्विस से तरह तरह के ग्राहकों के बारे में जानकारी मिल जाती है.
ऑनलाइन विज्ञापन देने वाली कंपनियों और इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के बीच ये लड़ाई पिछले एक-दो साल में काफी तेज़ हो गई है.
फ़ेसबुक जैसी हज़ारों ऑनलाइन कंपनियों का मानना है कि ऑनलाइन ग्राहकों को मुफ्त का कंटेंट मिल रहा है, इसलिए उन्हें तरह-तरह के विज्ञापन दिखाए जाने चाहिए.

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ऑनलाइन ग्राहकों और प्राइवेसी के हक़ में बोलने वालों का मानना है कि ग्राहकों को विज्ञापन तो दिखाए जा ही रहे हैं. इससे बचने के लिए वो एड ब्लॉक ऐप का इस्तेमाल जायज़ समझते हैं.
कुछ अखबार और मैगज़ीन छापने वाली भारतीय कंपनियों ने हाल ही में ऐसे एड ब्लॉक ऐप के खिलाफ भी जंग छेड़ दी है.
अगर आपके डिवाइस पर ये ऐप हैं तो ये कंपनियां चाहती हैं कि इन वेबसाइट के विज्ञापन को ऐसे एड ब्लॉकर से बख्श दिया जाए.
उनका कहना है कि चूंकि लोग ऑनलाइन पढ़ने के लिए पैसे नहीं देते हैं इसलिए कंपनियां विज्ञापन के सहारे ही ये कंटेंट लोगों तक पहुंचा सकती हैं.
दोनों पक्ष के इस झगड़े पर आपको नज़र रखना ज़रूरी है.
अगर आप विज्ञापन नहीं चाहते हैं तो हो सकता है आपको इंटरनेट के तरह तरह के कंटेंट को पढ़ने के लिए अब पैसे देने पड़ें.
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