अब नेटफ़्लिक्स पर ऑनलाइन देखें नई फ़िल्में

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दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन मूवी कंपनी नेटफ़्लिक्स भारत में अपने क़दम रख चुकी है. अब आपके मनोरंजन की ज़रूरतें ऑनलाइन काफ़ी आसानी से पूरी हो सकती हैं.
बाज़ार में इस कंपनी को इरोस इंटरनेशनल का सामना करना होगा.
अगर आप दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में फ़िल्म देखने जाएंगे, तो काफ़ी समय लगता है. पार्किंग ढूंढने में दिक़्क़त, टिकट मिलने या न मिलने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.
इससे बचने के लिए कई लोग अब ऑनलाइन फ़िल्में देखना पसंद करते हैं. ऐसे लोगों के लिए नेटफ़्लिक्स काफ़ी सुविधाजनक साधन बन सकता है.
हालांकि भारत के बाज़ार में नेटफ़्लिक्स अकेली कंपनी नहीं.
क़रीब 2000 फ़िल्मों की लाइब्रेरी वाली कंपनी इरोस इंटरनेशनल भी कुछ ऐसी ही सर्विस लॉन्च करने की तैयारी में है. सभी बॉलीवुड फ़िल्मों पर कॉपीराइट इरोस का अपना है.
इरोस की कोशिश होगी कि वह बॉलीवुड और दूसरी भारतीय भाषाओं की फ़िल्में ऑनलाइन देखने वालों में अपनी पकड़ बनाए.

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इरोस की टक्कर नेटफ़्लिक्स के लिए बहुत कड़ी हो सकती है क्योंकि कंपनी साल भर में क़रीब 70 फ़िल्में रिलीज़ करती है. दर्शकों से वह कह सकती है कि फ़िल्म रिलीज़ होते ही वो उन्हें ऑनलाइन भी देख सकते हैं.
पिछले एक साल में थोड़ी बहुत कोशिश के बाद इरोस को क़रीब ढाई करोड़ ग्राहक मिल गए हैं. वहीं नेटफ़्लिक्स अंग्रेज़ी फ़िल्मों के लिए जाना जाएगा.
भारत ऐसा बाज़ार है, जहां सभी भाषाओं में हर साल क़रीब 800 फ़िल्में बनती हैं. दुनिया के किसी भी देश में इतनी फ़िल्में नहीं बनतीं.
स्मार्टफ़ोनों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और चीन के बाद भारत में सबसे ज़्यादा मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वाले लोग हैं.
बॉलीवुड फ़िल्में देश ही नहीं दुनिया भर में मशहूर हैं और भारत की कंपनियों को लगता है कि दुनिया भर का ऑनलाइन फिल्म बाज़ार उनके लिए खुल सकता है.
इन सभी की पहली नज़र आपके स्मार्टफ़ोन पर है कि आप कितनी देर तक वीडियो देखते हैं और दूसरी नज़र आपकी जेब पर.
लोगों का मानना है कि नेटफ़्लिक्स का भारत आना ख़ुद में भारतीय अॉनलाइन बाज़ार की अहमियत दिखाता है.
नेटफ़्लिक्स 2016 के अंत तक भारत सहित 200 देशों में अपनी सेवा पहुँचाने की कोशिश में है पर इरोस के लिए यह शुरुआती क़दम है.
अगर आप इरोस की सेवा लेने की सोचेंगे तो विज्ञापन वाली सर्विस अभी फ़्री है, लेकिन बिना विज्ञापन वाली सर्विस के लिए हर महीने क़रीब सौ रुपए देने पड़ेंगे. दूसरे देशों में इरोस की सर्विस इससे महँगी है.
बालाजी टेलीफ़िल्म्स ने भी अपनी ऐसी ही सर्विस क़रीब 200 रुपए महीने में लॉन्च की है. यह प्रोडक्शन कंपनी अपने टेलीविज़न सीरियल के लिए मशहूर है.
टाइम्स समूह ने क़रीब साल भर पहले बॉक्स टीवी भी लॉन्च किया था. यहां पर आप हिंदी समेत 11 भाषाओं में फ़िल्में और टीवी सीरियल देख सकते हैं.

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इन सबकी टक्कर देश के अंदर मुकेश अंबानी के रिलायंस समूह की कंपनी रामोजी फ़िल्म्स से भी होगी.
रिलायंस समूह क्षेत्रीय भाषाओं की फ़िल्मों को अपने ग्राहकों के लिए सस्ती दरों पर दे सकता है. उसे फ़ायदा यह होगा कि वह फ़िल्में भी बनाता है और मोबाइल नेटवर्क भी उसका अपना है. उस लिहाज़ से कोई भी दूसरी कंपनी उससे टक्कर नहीं ले सकती.
अगर ये सभी कंपनियां लोगों को ऑनलाइन फ़िल्में देखने की आदत डाल दें तो यह बहुत बड़ा बदलाव होगा.
फ़िल्म निर्माताओं के लिए यह बढ़िया ख़बर है. उन्हें उम्मीद है कि इससे पाइरेसी कम होगी और उन्हें साफ़ पता चल पाएगा कि किस देश में उनकी फ़िल्में देखने वाले कितने ग्राहक हैं.
भारत में लोग घर में केबल टीवी के लिए हर महीने पैसे देते हैं, लेकिन ऐसी सर्विस के लिए पैसे कितने लोग देने को तैयार होंगे, फ़िलहाल बहस का मुद्दा है.
एक और मुद्दा जो इन कंपनियों को समझना होगा वो ये कि ब्रॉडबैंड की क़ीमत अभी भी महँगी है.
एयरटेल ब्रॉडबैंड पर 2000 रुपए में आपको 120 गीगाबाइट डेटा मिलता है, जिस पर आप पूरे महीने में कई पिक्चर देख सकते हैं.
अगर आप ये क़ीमत देने को तैयार भी हो गए, तो महानगरों से दूर कई इलाक़ों में आपको कम से कम 16 गीगाबाइट की स्पीड वाली इंटरनेट सर्विस मिलना आसान नहीं होगा. और अगर ये रफ़्तार मिल गई तो वह सर्विस पूरे महीने काम करेगा कि नहीं उसकी गारंटी भी मिलना मुश्किल होगी.
क़रीब साल भर पहले स्टार टीवी ने हॉटस्टार नाम का ऐप लॉन्च किया था. डिस्ट्रीब्यूशन पर होने वाले खर्च को कम करके दर्शकों तक सीधा पहुंचने की इस सेवा पर स्टार टीवी का दावा है कि ये काफ़ी सफल रही है और क़रीब दस लाख ग्राहक उसे लॉन्च के शुरुआती हफ़्तों में ही मिल गए. लेकिन उसके बाद स्टार ने इस ऐप के बारे कोई जानकारी नहीं दी है.
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