काम के लंबे घंटे सेहत के लिए ख़तरा

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- Author, जेम्स गैलाघर
- पदनाम, स्वास्थ्य संपादक, बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट
काम के घंटे जितने अधिक होते हैं, सेहत पर उतना ही ख़तरा बढ़ जाता है.
इस बात को एक रिपोर्ट में भी सही पाया गया है.
लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों के काम के घंटे ज़्यादा होते हैं, उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक होती है.
इस अध्ययन में पांच लाख से ज्यादा लोगों का विश्लेषण किया गया.
इस विश्लेषण से मालूम हुआ कि दिन में 9 बजे से 5 बजे के बीच दिल का दौरा पड़ने की संभावना ज़्यादा होती है.
काम के लंबे घंटे

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काम के लंबे घंटे और दौरा पड़ने के बीच का संबंध फिलहाल अनिश्चित है लेकिन सैद्धांतिक तौर पर तनावपूर्ण काम के जीवन शैली पर नुकसानदेह असर को दौरा पड़ने की एक वजह माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग लंबे घंटों तक काम करते हैं, उन्हें अपने रक्तचाप पर नज़र रखनी चाहिए.
इस अध्ययन के अनुसार, हफ्ते में 35-40 घंटे काम करने की तुलना में अगर व्यक्ति 48 घंटे काम करता है तो उसे दौरा पड़ने की संभावना 10 फीसदी बढ़ जाती है.
54 घंटे काम करने पर 27 फीसदी और 55 घंटे काम करने पर 33 फीसदी.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के डॉ. मिका किविमाकी ने कहा कि हर दस साल में हर 35 से 40 घंटे प्रति हफ्ते काम करने वाले एक हज़ार लोगों में पांच स्ट्रोक्स से भी कम केस थे.
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं

जो 55 घंटे प्रति हफ्ते काम करते थे उनमें यही संख्या बढ़ कर 6 स्ट्रोक प्रति हज़ार व्यक्ति हो गई. डॉ. किविमाकी ने स्वीकार किया कि अभी ये शोध शुरुआती अवस्था में है.
दौरे पड़ने की वजहों में लंबे घंटों तक काम करने से होने वाला तनाव और लंबे समय तक बैठ कर काम करना शामिल है.
बहरहाल, ये भी हो सकता है कि जिन्हें लंबे समय तक ऑफिस में बैठना पड़ता है, उनके पास सेहतमंद खाना पकाने और व्यायाम करने का वक्त नहीं होता.
इसलिए सेहत पर ख़राब असर पड़ता है.
डॉ. किविमाकी ने बीबीसी को बताया, "लोगों को इस बारे में अधिक सचेत रहने की ज़रूरत है कि वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और ये पक्का करें कि उनका रक्तचाप ना बढ़े."
हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. टिम चिको का कहना था कि हममें से ज़्यादातर लोग लंबे घंटों तक काम करते हुए भी उस समय को कम कर सकते हैं जितना हम बैठे हुए बिताते हैं, अपनी शारीरिक गतिविधियों को थोड़ा ज्यादा कर सकते हैं और अपनी डाइट में भी सुधार ला सकते हैं.
और जितना ज़्यादा वक्त हम दफ्तर में बिताते हैं, इन बातों पर अमल करना उतना ही अहम हो जाता है.
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