कछुए को लगाई गई टाइटेनियम की चोंच

कछुए की टाइटेनियम चोंच

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एक नाव के प्रोपेलर से टकराने के बाद ज़ख़्मी हुए एक कछुए को थ्रीडी प्रिंटर से बनी चोंच लगाई गई है.

मेडिकल-ग्रेड टाइटेनियम से बनी यह चोंच लॉगरहेड कछुए के जबड़े की जगह लगाई गई है जो आधा नाव से टक्कर में टूट गया था.

इस कृत्रिम चोंच को बनाने के लिए घायल कछुए के सिर के विस्तृत स्कैन किए गए. अगर कछुए का शरीर इस कृत्रिम चोंच को अस्वीकार नहीं करता तो उसे जल्द ही समुद्र में छोड़ दिया जाएगा.

'हाथ से खिलाया'

इस 45 किलो वजनी समुद्री जीव को बुरी तरह घायल अवस्था में तुर्की के डेनिज़्ली में स्थित पमुक्काले विश्वविद्यालय के समुद्री कछुओं पर शोध संस्थान- सी टर्टल रिसर्च, रेस्क्यू एंड रिहेबिलिटेशन सेंटर- ले जाया गया था.

थ्री डी प्रिंटेंग

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शुरुआत में सेंटर के स्टाफ़ ने इसे हाथ से खिलाकर कुछ स्वस्थ किया लेकिन जल्द ही यह अहसास हुआ कि अगर इस कछुए को समुद्र में छोड़ा जाना है तो उसे खुद खाने लायक बनना होगा.

पुनर्वास केंद्र ने फिर तुर्की कंपनी बीटेक इनोवेशन से संपर्क किया जो इंसानों के लिए विशेष रूप से कृत्रिम मेडिकल उपकरण बनाती है और जानना चाहा कि क्या वह इस मामले में कुछ मदद कर सकते हैं.

बीटेक ने पशु चिकित्सकों से लिए सीटी स्कैन का इस्तेमाल ऐसी चोंच बनाने के लिए किया जो कछुए के टूटे हुए जबड़े को ठीक तरीके से लग जाए और वह खाना खाने के काबिल हो जाए.

यह कछुआ, जिसका नाम अकुट-3 रखा गया है, फ़िलहाल पुनर्वास केंद्र में स्वास्थ्यलाभ कर रहा है ताकि पशु चिकित्सक यह सुनिश्चित कर पाएं कि उसका धातु का जबड़ा उसके शरीर के अंग के रूप में काम कर रहा है.

यह पहला सरीसृप नहीं है जिसे थ्रीडी प्रिटिंग तकनीक का फ़ायदा मिला हो.

मार्च में डेनवर में कोलोराडो टेक्निकल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने एक कछुए के लिए कृत्रिम प्लास्टिक का खोल बनाया था. ख़राब ख़ाने की वजह से उस कछुए का मूल खोल ख़राब हो गया था.

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