तकनीक खा ना जाए आपकी तस्वीरें !

विंट सर्फ

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विंट सर्फ़ उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें इंटरनेट का जनक कहा जाता है. लेकिन उन्हें इन दिनों एक चिंता सता रही है.

चिंता ये है कि जो भी तस्वीरें या दस्तावेज़ हम कंप्यूटर पर सेव कर रहे हैं, हो सकता है कि वो एक दिन बेकार हो जाएं.

क्योंकि हम डिजिटल डाटा तो संरक्षित कर रहे हैं, लेकिन उस टेक्नोलॉजी को सहेजने पर हमारा ध्यान कम है जिसमें वो काम करती है.

नए सॉफ़्टवेयर

याहू, जीमेल, इंटरनेट

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मतलब जिस फ़ॉर्मेट में तस्वीर या दस्तावेज़ आपने सेव किया है, हो सकता है कि वो आगे काम ही न करें. लेकिन विंट सर्फ़ इसका उपाय भी बताते हैं.

विंट सर्फ़ फ़िलहाल दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी गूगल के उपाध्यक्ष हैं और जिन लोगों की वजह से आज हम इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे हैं, सर्फ़ उनमें से एक हैं.

उनका कहना है कि सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर तेज़ी से पुराने पड़ रहे हैं और उनकी जगह नए नए सॉफ़्टवेयर ले रहे हैं और ये सिलसिला लगातार जारी है.

ऐसे में उन डिजिटल डाटा के अस्तित्व पर संकट भी मंडरा रहा है जो हम समझते हैं कि हमने संरक्षित कर लिया है.

डिजिटल डाटा

इंटरनेट

वे कहते हैं, "असल में मुझे इसकी बहुत चिंता है और हम पहले से ही इस तरह का अनुभव कर रहे हैं. पुराने फ़ॉर्मेट या प्रजेंटेशन में जो डॉक्यूमेंट हमने बनाए, हो सकता है कि वो सॉफ़्टवेयर के नए वर्ज़न में खुल ही न पाएं, क्योंकि इस बात को हमेशा गारंटी नहीं दी जाती है कि कोई सॉफ़्टवेयर पुराने फ़ॉर्मेट के मुताबिक है."

विंट सर्फ़ का कहना है, "ऐसे में ये होगा कि हम चाहें जितना डिजिटल डाटा जमा कर लें, लेकिन हो सकता है कि हमें पता ही ना लगे कि उसमें है क्या."

विंट सर्फ़ को लगता है कि हम 'डिजिटल डार्क एज' की तरफ़ बढ़ रहे हैं जहां हो सकता है कि भावी पीढ़ियों के पास 21वीं सदी को लेकर बहुत ही थोड़ी या बिल्कुल भी जानकारी न हो.

इतिहास के लिए खतरा

पुराने कम्प्यूटर

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अब उनका ध्यान इस बात पर है कि हमारे इतिहास के लिए ख़तरा बन रही इस समस्या से छुटकारा दिलाया जाए.

वो कहते हैं, "इसका समाधान ये है कि डिजिटल सामग्री के साथ साथ ऑपरेटिंग सिस्टम को भी सहेजा जाए, जिसमें वो काम करती है, या जिसकी मदद से वो इस्तेमाल करने योग्य रहे. और उसे लंबे समय तक संरक्षित रखा जाए. इस तरह हम अपने अतीत को भविष्य में फिर से साकार कर सकते हैं."

आईबीएम कम्प्यूटर

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बीबीसी के विज्ञान संवाददाता पल्लव घोष विंट सर्फ़ से सैन जोंस में एक विज्ञान सम्मेलन में मिले. जहां ये बातें उन्होंने साझा कीं.

इस मौके पर बीबीसी संवाददाता विंट सर्फ़ का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलें, क्योंकि उन्हीं जैसे लोगों की वजह से आज हम इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस पर विंट सर्फ़ ने कहा, "किसी के लिए इससे ज़्यादा खुशी की क्या बात हो सकती है, कि वो कुछ काम आए."

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