जहाँ धड़ल्ले से बिकती है शेर की खाल

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- Author, नवीन सिंह खड़का
- पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी
हाल के वर्षों में म्यांमार से चीन में शेरों और अन्य 'बिग कैट्स' की खालों का व्यापार तेज़ी से बढ़ा है.
दो दशकों के सर्वेक्षण आंकड़ों के अध्ययन में कहा गया है कि मुख्य रूप से यह कारोबार चीन की सीमा से सटे म्यांमार के क़स्बे मोंग ला में धड़ल्ले से हो रहा है.
वहां पिछले आठ साल में ऐसे सामानों की दुकानें तीन गुना तक बढ़ गई हैं.
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बॉयोलॉजिकल कंज़र्वेशन जर्नल में छपे अध्ययन के नतीजों के मुताबिक़ 80 फ़ीसदी सर्वेक्षणों में शेरों के अंग मिले, जो कम से कम 200 शेरों के थे.
जबकि अधिकांश उत्पाद तेंदुए के अंगों से जुड़े थे, जिनकी तादाद 480 रही होगी.
इस अध्ययन से उन दावों की पुष्टि होती है, जिनमें कहा गया था कि यह क़स्बा अफ्रीका समेत कई देशों की वन्य जीव सामग्री का उभरता हुआ बाज़ार है.
यह भी पता चला कि थाईलैंड से सटे म्यांमार के क़स्बे ताचीलेक में इस कारोबार में गिरावट आई है.
अंतरराष्ट्रीय वन्य जीव कारोबार मॉनीटरिंग नेटवर्क 'ट्रैफ़िक' से जुड़े और रिपोर्ट के लेखक क्रिस शेफ़र्ड कहते हैं, "संभव है कि थाईलैंड में कड़ी क़ानूनी कार्रवाइयों के कारण ऐसा हुआ हो."

विशेषज्ञों का कहना है, "चीन में अभी क़ानूनों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा, इसलिए मोंग ला में तस्करी का धंधा फल-फूल रहा है."
तस्करी में कमी
म्यांमार ने अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत शेरों और तेंदुओं की खालों के व्यापार पर प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन वन्यजीव संगठनों ने बीबीसी को बताया कि मोंग ला क़स्बे में यह क़ानून नहीं चलता.
ग्रेटर मेकॉन्ग क्षेत्र में वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फंड के थॉमस ग्रे कहते हैं, "वन्यजीवों का मांस और शेर की हड्डियों से बनी वाइन चीन में नहीं ले जाई जा सकती पर मोंग ला में चीनी पर्यटक इसका सेवन करते हैं."
"और कई खालें यादगार के तौर पर चीन में आयात की जाती हैं."

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वह कहते हैं, "इसलिए सीमा पर क़ानून का कड़ाई से पालन किए जाने की ज़रूरत है ताकि चीनी पर्यटक अपने साथ वन्यजीवों से बना सामान न ला सकें."
चीन सबसे बड़ा बाज़ार
यह ताज़ा अध्ययन, ताचीलेक में 1991 से 2013 के बीच किए गए 19 अलग-अलग अध्ययनों और मोंग ला में 2001 से 2014 के बीच किए गए सात सर्वेक्षणों पर आधारित है.
इनमें 'वाइल्ड कैट्स' के क़रीब 2000 अंगों के तथ्य जमा किए गए, जिनमें अधिकांश खालें थीं.
अन्य अंगों में शेरों और तेंदुओं के पंजे, खोपड़ी और दांत शामिल हैं.

सर्वे में यह भी पता चला कि 2006 में मोंग ला में सिर्फ़ छह दुकानें थी, जो अब बढ़कर 21 हो गई हैं.
चीन शेर के अंगों से बने उत्पादों का सबसे बड़ा बाज़ार है और वन्य जीवों के घरेलू कारोबार पर नियंत्रण न कर पाने के लिए उसकी आलोचना होती रही है.
इस वर्ष की शुरुआत में बीबीसी ने ख़बर दी थी कि चीन ने सार्वजनिक रूप से पहली बार माना था कि प्रतिबंध के बावजूद उसने शेर की खाल के व्यापार की इजाज़त दी थी.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता के बावजूद शेरों का शिकार जारी है और दुनिया में अब इस प्रजाति के केवल 3,000 जीव बचे हैं.

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यह संख्या एक शताब्दी पहले शेरों की संख्या का महज पांच प्रतिशत है.
हाथी दांत
मोंग ला और ताचिलेक के व्यापारियों का कहना है कि चीन में पहुंचने वाले शेर और तेंदुए के अंग, म्यांमार और भारत से आते हैं.
ऑक्सफ़ोर्ड ब्रुक्स यूनिवर्सिटी और 'ट्रैफ़िक' ने इस साल की शुरुआत में एक अध्ययन किया था, जिसमें पाया गया कि 3,300 हाथी के दांत मोंग ला में खुले तौर पर बिक्री के लिए रखे गए थे.
अध्ययन में कहा गया है कि 2009 के सर्वेक्षण में हाथी की खाल के केवल 25 टुकड़े पाए गए थे जबकि 2013 और 2014 के बीच यह संख्या बढ़कर 1,050 हो गई.
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