जीन टेस्ट 'बचाएगा कैंसर के मरीज़ों की जान'

इमेज स्रोत, SPL
- Author, हेलेन ब्रिग्स
- पदनाम, हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट
छोटी आंत के कैंसर से जूझ रहे मरीज़ों को नई ज़िंदगी मिल सकती है.
एक शोध में कहा गया है कि इनके मरीज़ों की आनुवांशिक जांच के जरिए ये पता लगाया जा सकता है कि उनके कैंसर के बढ़ने का खतरा और कितना है.
ट्यूमर की आनुवांशिक जांच से मरीज़ों की ज़िंदगी बच सकती है और यह ब्रितानी स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने वाले एनएचएस के लिए कम खर्चीला भी होगा.
आनुवांशिक कारणों से होने वाले कैंसर के बढ़ने का ख़तरा अधिक रहता है, ख़ासकर आंत और गर्भाशय के कैंसर का. इसे लिंच सिंड्रोम कहते हैं.
कैंसर रिसर्च के लिए करोड़ों रुपए जुटाने वाले किशोर स्टीफ़न सटन के परिवार में भी कैंसर का इतिहास रहा है.
आनुवांशिक जांच

इमेज स्रोत,
<link type="page"><caption> यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्ज़ेटर के मेडिकल स्कूल</caption><url href="http://medicine.exeter.ac.uk/" platform="highweb"/></link> से जुड़े डॉक्टर ट्रिस्टान स्नोसिल कहते हैं, "लिंच सिंड्रोम या कैंसर की आशंका वाले लोगों की सेहत सुधारने का ये एक तरीका है. खासकर उन लोगों के लिए, जिन्हें नहीं मालूम कि उन्हें ये हो सकता है."
रिसर्च टीम में डॉक्टर ट्रिस्टान के साथ काम करने वाले कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी के <link type="page"><caption> इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल जेनेटिक्स</caption><url href="http://medicine.cf.ac.uk/cancer-genetics/research/medical-genetics/" platform="highweb"/></link> के डॉक्टर इयन फ़्रेलिंग का कहना है, "आनुवांशिक जांच की लागत अब कम हो रही है. छोटी आंत के कैंसर से पीड़ित मरीज़ों के लिए ये अच्छी खबर है कि वे इसकी जांच करवा सकते हैं. इससे लोगों की ज़िंदगी बचाई जा सकेगी."
लिंच सिंड्रोम

इमेज स्रोत, BBC World Service
50 साल तक की उम्र वाले आंत के कैंसर के 12 मरीजों में से एक का मामला लिंच सिंड्रोम का होता है.
एक तिहाई लोगों की आंत का कैंसर 70 साल की उम्र आते-आते पूरी तरह विकसित हो जाता है.
करीबी रिश्तेदारों पर लिंच सिंड्रोम के असर की संभावना 50 फीसदी होती है.
अगर उनकी पहचान समय रहते हो जाए तो दवाओं के जरिए इसके असर को कम किया जा सकता है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












