एक तिहाई महिलाओं को स्तन कैंसर का ख़तरा

स्तन कैंसर
    • Author, पीपा स्टीफ़ंस
    • पदनाम, स्वास्थ्य संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि लगभग एक तिहाई महिलाओं को स्तन कैंसर का ख़तरा है और उन्हें तीन साल में एक से अधिक बार ज़रूर अपनी जाँच करानी चाहिए.

साल 2009 और 2013 के बीच 53,467 महिलाओं पर किए गए अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है.

वैज्ञानिकों ने इनमें से 14,593 महिलाओं में स्तन कैंसर का 'औसत से अधिक' जोखिम पाया है.

वे उम्मीद करते हैं, इस अध्ययन से महिलाओं में जागरूकता आएगी और वे अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएंगी जिससे <link type="page"><caption> स्तन कैंसर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/03/120328_cancer_mallika_va.shtml" platform="highweb"/></link> के मामले कम करने में मदद मिलेगी.

अध्ययन में कहा गया है कि औसत से अधिक जोखिम का मतलब है कि ऐसे मामलों में अगले दस साल में स्तन कैंसर होने की 3.5% संभावना है.

अभी 50 से 70 साल की महिलाओं को तीन साल में एक बार मैमोग्राम की सलाह दी जाती है ताकि शुरूआती चरण में ही कैंसर का पता चल पाए और उपचार के असरदार होने की संभावना बढ़ जाए.

तकलीफ़

प्रमुख शोधकर्ता मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर गैरेथ इवांस ने कहा, "रोकथाम न केवल महिलाओं को कैंसर की तकलीफ़ से बचाएगा बल्कि उपचार पर होने वाले 'अधिक ख़र्च' से भी बचाएगा.

वैज्ञानिकों ने परिवार के इतिहास, जीवन शैली के रूप में जोखिम कारकों का आकलन और लार से आनुवंशिक जानकारी एकत्र कर स्तन कैंसर के किसी मरीज़ में विकसित होने की आशंका का आकलन किया.

उन्होंने मैमोग्राम और दृश्य आकलन के ज़रिए स्तन ऊतक घनत्व को भी मापा जो स्तन कैंसर होने का किसी मरीज़ में संकेत होता है.

जीवन शैली में नियमित व्यायाम, वज़न कम करना, और शराब का सेवन कम करना जैसे कुछ बदलाव लाकर भी 30 फ़ीसद तक स्तन कैंसर का जोखिम कम किया जा सकता है.

प्रोफ़ेसर इवांस ने कहा, "यह बदलाव महिलाओं की किस्मत को उनके ही हाथों में सौंपेगा."

नया तरीक़ा

स्तन कैंसर

इमेज स्रोत, SPL

इमेज कैप्शन, वैज्ञानिकों ने 14,593 महिलाओं में स्तन कैंसर का 'औसत से अधिक' जोखिम पाया है.

स्तन कैंसर जांच की प्रभावशीलता के संबंध में एक स्वतंत्र समीक्षा 2012 में प्रकाशित हुई थी, जिसमें 'अधिक उपचार' की अवधारणा पर काफ़ी बहस हुई है.

अधिक उपचार तब होता है जब सही तरीक़े से स्क्रीनिंग के बाद ट्यूमर पाया जाता है, लेकिन जो नुक़सानदायक नहीं होता है.

इसकी वज़ह से महिलाओं को शल्य चिकित्सा, हार्मोन चिकित्सा, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के रूप में अनावश्यक उपचार से गुजरना पड़ सकता है और अक्सर इसके काफ़ी साइड इफ़ेक्ट होते हैं.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफ़ेसर माइकल मारमोट ने कहा, "इस मामले में इस अध्ययन से मदद मिल सकती है."

उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं में स्तन कैंसर का ख़तरा ज़्यादा होता है उनमें बीमारी के गंभीर लक्षण दिखने की संभावना होती है तब वैसी हालत में उपचार की प्रासंगिकता ज़्यादा होती है.

लेकिन उन्होंने कहा कैंसर के विकास में स्क्रीनिंग के एक या दो साल के अंतराल के महत्व का आकलन ज़रूरी है.

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