वे ख़ुद को 'कैंसर बहनें' कहती हैं

इसराइल फलस्तीन सहायता समूह

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    • Author, शीरा जीमर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज, यरूशलम

"शांति कोरी कल्पना नहीं है, ये एक संभावना का नाम है. जब हम एक कमरे में बैठे होते हैं तो कौन फलस्तीनी है और कौन इसराइली, ये फर्क मिट जाता है."

यरूशलम के पूर्वी हिस्से में माउंट ओलिव है. यहां एक बेंच पर दो महिलाएं बैठी हैं. <link type="page"><caption> एक यहूदी और एक मुसलमान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130808_israel_palestinians_talks_ar.shtml" platform="highweb"/></link>. गले मिलती, बतियाती हुई ये महिलाएं एक नजर में पक्की सखियां लगती हैं.

इब्तिसाम एरेकात और रूथ एबेन्स्टाइन कहती हैं कि वे सहेलियों से भी बढ़कर हैं. वे खुद को '<link type="page"><caption> कैंसर बहनें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140204_cancer_survivors_story_pkp.shtml" platform="highweb"/></link>' बुलाती हैं.

'कैंसर बहनें' इब्तिसाम एरेकात और रूथ एबेन्स्टाइन तीन साल पहले 'कोप' फोरम में मिली. कोप फोरम एक ऐसा सहायता समूह है जिसमें इसराइल और फलस्तीन की स्तन कैंसर से प्रभावित महिलाएं हैं.

सहायता समूह

45 वर्षीय रूथ का बेटा जब तीन साल का था तब उन्हें अपनी स्तन कैंसर की बीमारी का पता चला था.

रूथ एबेन्स्टाइन बताती हैं, "मेरी दोस्त को जब पता चला कि मुझे कैंसर है तो उसने फौरन एक इसराइल-फलस्तीन सहायता समूह के बारे में बताया जो स्तन कैंसर पीड़ितों की मदद करता था. मैं यह सोच कर फौरन उनसे मिलने पहुंची कि मेरे दर्द को उन औरतों से बेहतर कौन समझ सकता है जो खुद उसी दर्द से गुजर रही हैं?"

इसराइल फलस्तीन सहायता समूह

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इमेज कैप्शन, रूथ और इब्तिसाम का मानना है कि कोप ने इलाके में शांति की संभवानाओं को जगाया है

रूथ को 'कोप' में यरुशलम की सीमा के पास बसे फलस्तीनी शहर अबू दिस की रहने वाली 50 साल की इब्तिसाम एरेकात मिलीं. उनकी कहानी रूथ जैसी ही थी.

इब्तिसाम ने बताया, "मुझे स्तन कैंसर का पता साल 2000 में चला. तब मेरी एक बेटी थी और मुझे एक महीने का गर्भ था."

रूथ बताती हैं कि दो मुल्कों की ये दो औरतें आपस में केवल कैंसर की बातें ही नहीं करती थीं.

वे कहती हैं, "संयोग से हम दोनों ही ईश्वर में दृढ़ विश्वास करते हैं. दोनों खुशमिजाज और मस्त हैं. हम खूब हंसते हैं और जोर-जोर से हंसते हैं. बिना ये परवाह किए हुए कि लोग क्या सोचेंगे."

कैंसर का तोहफा

एक दूसरे के जीवन की बातें साझा करते हुए उनकी दोस्ती गहरी होती चली गई.

रूथ ने जब जोखिम से बचने के लिए अपना अंडाशय हटवाया तो उन्होंने सर्जरी के बाद और किसी को फ़ोन नहीं किया केवल इब्तिसाम को फोन कर अपना हाल-चाल बताया.

इब्तिसाम कहती हैं, "हम दोनों ही आशावादी हैं. संकट से जूझने की भावना भी हममें एक है. वह सचमुच में कैंसर का तोहफा है."

दोनों महिलाओं की दोस्ती का असर उनके परिवार के सदस्यों पर भी हुआ.

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इमेज कैप्शन, रूथ और इब्तिसाम का कहना है कि वे गहरी दोस्त ही नहीं कैंसर बहनें हैं

रूथ बताती हैं, "मेरी इब्तिसाम के परिवार के हर सदस्य से दोस्ती हो गई. मेरे बच्चे उसे पहचानने लगे. मेरा पांच साल का बेटा मुझसे कहता हैः मम्मा, मैं जल्द से जल्द अरबी सीखना चाहता हूं ताकि इब्तिसाम से बात कर सकूं. मैं उन्हें हीब्रू (यहूदियों की भाषा) सिखाऊंगा."

जागरूकता की कमी

एक और बात जो दोनों महिलाओं में एक है , वह है स्तन कैंसर से जुड़ी जागरूकता के लिए उनकी गहरी सक्रियता और उत्साह.

फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय में महामारी विज्ञान से जुड़े डॉक्टर जवाद बीतर कहते हैं कि स्तन कैंसर गज़ा और पश्चिमी तट में अधिकांश फलस्तीनी महिलाओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है.

वे कहते हैं, "अफसोस है कि जब तक फलस्तीनी महिला में स्तन कैंसर का पता चलता है तब तक यह शरीर के अधिकांश हिस्सों में फैल चुका होता है. देर से पता लगने के कारण स्तन कैंसर के मरीजों के बचने की गुंजाइश कम रहती है."

उत्तरी इसराइली शहर साफेद के ज़िव मेडिकल सेंटर में कैंसर विभाग के प्रमुख जमाल जिदान के शोध में कहा गया है कि स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, खासकर अरब महिलाओं में.

एकजुटता और सहानुभूति

जहां एक ओर इस बात पर <link type="page"><caption> आम सहमति</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130730_israel_palestine_us_talk_pp.shtml" platform="highweb"/></link> बन रही है कि दोनों मुल्कों की महिलाओं को अब स्तन कैंसर से डरने की जरूरत नहीं है और उनमें जागरूकता तथा जांच जरूरी है वहीं रूथ और इब्तिसाम इसराइल और फलस्तीन के बीच के संबंधों के प्रति आशावादी हैं जिनको कोप प्रोत्साहित कर रहा है.

इजराइल में हाई हील रेस

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इमेज कैप्शन, 24 अक्टूबर 2013 को यरूशलम में स्तन कैंसर के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हाई हील रेस का आयोजन किया गया

इब्तिसाम कहती हैं, "समूह के भीतर सच्ची एकजुटता और सहानुभूति का माहौल है."

"मैंने कई इसराइली महिलाओं को फलस्तीनी महिलाओं से यह कहते हुए सुना है कि चलो मैं तुम्हें तेल अवीव के अपने डॉक्टर के पास ले चलूं. मुझे अपनी रिपोर्ट दो मैं इसे अपने डॉक्टर से दिखाती हूं. ये सब मुझमें उम्मीद जगाते हैं."

शांति कोरी कल्पना नहीं

रूथ भी इन बातों से इत्तेफाक रखते हुए कहती हैं, "शांति कोरी कल्पना नहीं, यह एक संभावना का नाम है. लोगों को एक-दूसरे तक पहुंचना होगा, उम्मीद बरकरार रखनी होगी और इन रिश्तों की उलझनों को भी समझना होगा."

वह कहती हैं, "उम्मीद हो कि दोनों मुल्कों के बीच की दीवार गिरेगी और हम बिना किसी पूर्वाग्रह के सहज रूप से मिल सकेंगे. क्योंकि हमारा असली दुश्मन कैंसर है न कि इंसान की पैदा की हुई लड़ाई."

रूथ के अनुसार, "जब हम एक कमरे में होते हैं कौन फलस्तीनी है और इसराइली, ये फर्क मिट जाता है. हमने स्तन कैंसर को हरा दिया है. हमने मध्य पूर्व संघर्ष भी बड़े दुश्मन का सफाया किया है. हमने कैंसर से लड़ाई की है, और हम जीते हैं."

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