एशिया में मिली चिड़िया की एक नई प्रजाति

चिड़िया की एक नई प्रजाति की खोज

इमेज स्रोत, RAMKI SRINIVASAN CONSERVATION INDIA

शोधकर्ताओं ने एशिया में चिड़िया के एक अनोखे समूह यानी परिवार की खोज की है. इसकी ख़ासियत है कि इस समूह की केवल एक ही प्रजाति है.

खोज करने वाले वैज्ञानिकों के दल ने पसेरिडा समूह की चिड़ियों के बसेरों के आधार पर उनकी 10 विभिन्न शाखाओं की पहचान की है.

इस शोध के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि धब्बे वाली यह चिड़िया, लंबे पंजों वाली और गाने वाली यूरोपीय चिड़िया रेन-बैब्लर और बैब्लर से काफ़ी अलग है.

विशेषज्ञों की राय है कि इस तरह की विशिष्ट चिड़ियों को इलैचुरा के नाम से बुलाना चाहिए.

इस खोज को रॉयल सोसायटी के जर्नल <link type="page"><caption> बायोलॉजी लेटर्स</caption><url href="http://rsbl.royalsocietypublishing.org/embargo?embargoed-uri=http%3A%2F%2Frsbl.royalsocietypublishing.org%2Fcontent%2F10%2F3%2F20131067" platform="highweb"/></link> में प्रकाशित किया गया है.

चाइनीज एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़, बीजिंग के शोधकर्ताओं के साथ काम करने वाले स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंसेज़ उपासला के प्रोफ़ेसर पेर ऑस्ट्राम कहते हैं, "चिड़िया की यह इकलौती प्रजाति अपने पूर्ववर्ती चिड़ियों के सबसे बड़े समूह की जीवित प्रतिनिधि हैं. दुनियाभर की 10,500 चिड़ियों की प्रजातियों का करीब 36 फ़ीसदी हिस्सा इस विशिष्ट प्रजाति का है."

'ऊंची आवाज़ वाला गीत'

इलैचुरा फॉरमोसा को पहले स्पेलॉइरोनिस फॉरमोसस के नाम से जाना जाता था, यह छोटी चिड़िया पूर्वी हिमालय से दक्षिण चीन तक के क्षत्रों में पाई जाती है.

प्रोफ़ेसर ऑस्ट्राम बताते हैं, "इस रहस्यमयी चिड़िया को देखना काफ़ी कठिन है, आमतौर पर यह उपोष्णकटिबंधीय पहाड़ों के घने जंगलों में छिपकर रहती है."

वे कहते हैं, "प्रजनन के मौसम में नर पक्षी अपनी ख़ास ऊंची आवाज़ वाले गीत गाते हैं, जो एशियाई महाद्वीप की किसी अन्य चिड़िया से मेल नहीं खाता है."

वे चिड़िया की पहचान के बारे में कहते हैं, "इसको पहले रेन या रेन बैब्लर या फुदकी (एक प्रकार की छोटी चिड़िया) से 'लगभग समानता' के कारण अनदेखा किया गया होगा."

प्रोफ़ेसर ऑस्ट्राम के अनुसार, "यह समानता महज संयोगवश है या फिर एक बिंदु पर मिलने वाले उद्विकास की वज़ह से है, जिसके कारण एक समान वातावरण में रहने वाली विभिन्न प्रजातियां रूप-रंग में समान होती हैं- कुछ रेन बैब्लर या छोटी चिड़ियां इलैचुरा की करीबी भी हो सकती हैं."

<link type="page"><caption> (पढ़ेंः गिद्धों के बारे में सात आश्चर्यजनक बातें)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/02/140202_vultures_surprising_facts_ap.shtml" platform="highweb"/></link>

कैसे हुई इसकी खोज?

जीव वैज्ञानिकों ने अपनी खोज चिड़ियों के डीएनए की आणविक संरचना का विश्लेषण करने के बाद किया. इससे उनको चिड़ियों के उद्विकास का इतिहास भी पता चलता है.

हाल के वर्षों में इस विधि का काफ़ी उपयोग किया गया है. इससे कई आश्चर्यजनक जानकारियां सामने आई हैं.

प्रोफ़ेसर ऑस्ट्राम कहते हैं, "आणविक विश्लेषण पक्षियों के बीच रिश्तों की पड़ताल करने के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हैं. जैसे इससे बाज़, तोते और पैसेरिनिस के बीच रिश्तों की पड़ताल में मदद मिली है."

वे कहते हैं, "भविष्य में इस तरह की और खोजें सामने आ सकती हैं, क्योंकि अभी बहुत सी प्रजातियों का विश्लेषण किया जा रहा है. हालांकि मुझे संदेह है कि इलैचुरा जैसी और अधिक विशिष्ट प्रजातियों की पहचान होनी फिर भी बाकी रह जाएगी."

<italic><bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक </caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>और <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link>पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold></italic>