परिंदों ने आपकी ज़िन्दगी को सुर दिए और आपने?

पक्षियों का <link type="page"><caption> चहचाहना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/10/101020_burqa_mumbai_psa.shtml" platform="highweb"/></link> किसे अच्छा नहीं लगता होगा. पर ये पंछी खुद <link type="page"><caption> शहर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2010/02/100218_berlin_children_va.shtml" platform="highweb"/></link> के बढ़ते शोर से इस कदर <link type="page"><caption> परेशान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2011/05/110509_birds_stress_us.shtml" platform="highweb"/></link> हैं कि उन्हें अपने लिए एक अदद आशियाना नहीं मिल पा रहा है.
कनाडा के <link type="page"><caption> शोधकर्ताओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2005/07/050719_noise_sc.shtml" platform="highweb"/></link> ने एक अध्ययन में यह पाया कि शोर शराबे के माहौल में पक्षियों के संगीत की सदा गुम होती जा रही है.
इतना ही नहीं बढ़ते <link type="page"><caption> ध्वनि प्रदूषण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/11/121116_sex_beast_gallery_va.shtml" platform="highweb"/></link> की वजह से पंछियों के संवाद करने की क्षमता पर भी असर पड़ा है.
पक्षियों की <link type="page"><caption> गतिविधियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/11/121115_grasshoppers_love_tune_pn.shtml" platform="highweb"/></link> पर नजर रखने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि नर पक्षी के आवाज़ को पूरी तरह से सुन पाने में नाकाम होने वाली मादाएं अपने नर साथियों को बीमार समझकर खारिज कर सकती हैं.
शोर का असर
इस <link type="page"><caption> शोध के नतीजे</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2011/06/110607_bustard_extinction_sy.shtml" platform="highweb"/></link> ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुए हैं.
शोध से जुड़े डैरेन प्रॉपे कहते हैं,“शहरी इलाकों में मधुर आवाज़ वाले पक्षियों को बचाने को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. यह जैव विविधता से भी जुड़ा हुआ है.”
उन्होंने कहा,“हम यह भी जानते हैं कि इन इलाकों में शोर का स्तर अधिक होता है.”
शोध के दौरान युनिवर्सिटी ऑफ अलबर्टा से जुड़े डॉक्टर प्रॉपे फिलहाल अमरीका के कैल्विन कॉलेज के लिए काम कर रहे हैं.

वह कहते हैं,“शहर के कुछ इलाकों को देखकर ऐसा लगता है कि यहां गाने वाले पक्षियों के लिए माकूल माहौल होगा लेकिन वहां इनकी तादाद बहुत कम होती है.”
शोध के नतीजे
शोध करते वक्त में इसी मुद्दे को केंद्र में रखा गया था कि क्या किसी शहर में रहने वाले पक्षियों और वहां के शोर के स्तर के बीच कोई संबंध भी है.
एडमंटन में इस अध्ययन के लिए एक टीम शहर के 113 प्राकृतिक जगहों पर गई.
डॉक्टर प्रॉपे ने इस बारे में कहा,“शोध में हमने पाया कि शहर के जिन इलाकों में शोर ज्यादा था वहां गाने वाले पक्षियों की तादाद कम थी.”
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि मादा पक्षी निम्न आवृत्ति वाले किसी गीत को सुन पाने में खुद को जब असमर्थ पाती हैं तो वे नर पक्षी की आवाज को असामान्य महसूस करने लगती हैं तो धीरे-धीरे इसका नतीजा सामने आने लगता है.
अगर नर पक्षियों को मादा जोड़े ना मिले तो उनकी नस्लें कम होने लगेंगी और इसका असर उनकी आबादी पर दिखेगा.












