'बच सकती है' चीन के चंद्रयान जेड रैबिट की जान

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चीन के पहले चंद्रयान जेड रैबिट को यांत्रिक गड़बड़ी के बावजूद 'बचाया जा सकता' है.
इससे पहले चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया था कि रोबोट 'मंगलवार को एक बार फिर काम शुरू नहीं कर पाया'.
हालांकि बाद में एजेंसी ने एक प्रवक्ता के हवाले से बताया कि रोवर अपनी निष्क्रियता से 'जाग' गया है और 'इसे बचाने का एक मौका मिल गया है'.
इस रोबोट का नाम यूटू या 'जेड रैबिट' रखा गया था. चीनी लोक कथाओं में इस नाम का चरित्र चंद्रमा पर निवास करता है.
रिपोर्ट के मुताबिक जेड रैबिट को जनवरी में एक बड़ी यांत्रिक गड़बड़ी का सामना करना पड़ा और तबसे ये काम नहीं कर रहा था.
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कामयाबी
समाचार पत्र ने यह भी बताया है कि रोवर के बारे में मौजूदा स्थिति और मरम्मत के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है और इस बारे में 'आने वाले दिनों में' आधिकारिक जानकारी मिलने की उम्मीद है.
जेड रैबिट 15 दिसंबर को छोड़ा गया था और यह 1976 के बाद से चंद्रमा पर पहली सफ़ल लैंडिंग थी.

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उम्मीद जताई गई थी कि ये रोवर तीन महीनों तक चंद्रमा की सतह का अध्ययन करेगा लेकिन जनवरी में अपनी निर्धारित सुप्तावस्था में जाने से पहले रोबोट में ख़राबी आ गई थी.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने गुरुवार को बताया कि रोवर जागा और उसने सिग्नल भी ग्रहण किए, हालांकि उसकी यांत्रिक गड़बड़ी अभी बनी हुई है.
शिन्हुआ ने लूनर जांच कार्यक्रम के प्रवक्ता पी झाओ यू के हवाले से बताया, "पहले हमें चिंता थी कि रोवर चंद्रमा के कम तापमान को सहन नहीं कर पाएगा क्योंकि वो असामान्य रूप से निष्क्रिय अवस्था में चला गया था. लेकिन वो जीवित है."
उन्होंने कहा, "वो अब भी जीवित है और इसलिए उम्मीद है कि उसे बचा लिया जाएगा."
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झटका
रिपोर्टों में कहा गया कि चंद्रमा पर रात 14 दिन लंबी होती है और इस दौरान यान निष्क्रिय हो जाएगा क्योंकि चंद्रयान के सौर पैनल को चार्ज करने के लिए सूर्य की रोशनी उपलब्ध नहीं होगी.
अगर इस अभियान के समाप्त होने की पुष्टि हो जाती है तो इसे चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियान के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जाएगा.
इस घोषणा को लेकर चीन के सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है.
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