चीन का चांद की छाती पर कदम

जेड रैबिट रोवर का चित्रांकन. 1970 के बाद यह चांद की सतह पर जाने वालाय पहला मिशन है.
इमेज कैप्शन, जेड रैबिट रोवर का चित्रांकन. 1970 के बाद यह चांद की सतह पर जाने वालाय पहला मिशन है.

चीन का रोवर मिशन, जेड रैबिट रोबोट चांद की सतह पर पहुंच गया है.

दिसंबर के पहले सप्ताह में लान्च किए गए इस मिशन में रोबोटिक रोवर चांद के ज्वालामुखी के पठार वाले क्षेत्र में उतरा है जिसे साइनस इरिडियम कहा जाता है.

इससे पहले शनिवार को रोवर से लैस लैंडिंग माड्यूल को सतह पर उतारने के लिए फायर किया गया.

चांद के उत्तरी गोलार्ध में चीन का यह कदम उसके महात्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम की अहम सफलता है.

लैंडिंग माड्यूल एक साल तक जबकि रोबोटिक रोवर करीब तीन महीने तक काम करेगा.

<link type="page"><caption> चांग ई-3 मिशन </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131201_china_moon_rover_aj.shtml" platform="highweb"/></link>ज़ीचांग सेटेलाइट लॉन्च सेंटर से विकसित लॉन्ग मार्च 3बी रॉकेट के ज़रिए चीन के दक्षिणी इलाक़े ज़ीचांग से करीब 12 दिन पहले छोड़ा गया था.

ढलान पर चढ़ने में सक्षम

लैंडिंग के बाद जेड रोवर अलग हो गया, जोकि तीन महीने तक सतह का परीक्षण करेगा.
इमेज कैप्शन, लैंडिंग के बाद जेड रोवर अलग हो गया, जोकि तीन महीने तक सतह का परीक्षण करेगा.

<link type="page"><caption> </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131201_china_moon_rover_aj.shtml" platform="highweb"/></link>आधिकारिक न्यूज एजेंसी 'शिन्हुआ' के अनुसार, भारतीय समयानुसार 6 बजकर 30 मिनट पर छोड़े गया यान करीब 11 मिनट बाद साइनस इरिडियम (बे ऑफ़ रेनबोज़) की सतह पर पहुंचा.

यूसीएल के मलार्ड स्पेस साइंस लेबोरेटरी से जुड़े प्रोफेसर एंड्र्यू कोट्स ने बीबीसी न्यूज़ को बताया, ''मैंने कुछ साल पहले शंघाई में रोवर का प्रोटोटाइप देखा था. यह एक अद्भुत तकनीकी उपलब्धि है जो चांद तक पहुंची है.''

चांग ई-3 तीसरा और 40 वर्षों में पहला मानव रहित रोवर मिशन है जो चांद की सतह तक पहुंचा है.

इससे पहले 840 किलोग्राम का सोवियत यान लुनोखोद-2 अंतरिक्ष यान चांद पर पहुंचा था जिसे गर्म रखने के लिए प्लूटोनियम का इस्तेमाल हुआ था.

हालांकि छह पहियों वाला यह चीनी रोबोटिक रोवर पहले से कहीं अधिक अत्याधुनिक मशीनों से लैस है.

इसमें सतह को भेदने वाला रडार है जो मिट्टी और चट्टानों के बारे में जानकारियां इकट्ठा करेगा.

120 किलोग्राम वजन वाला जेड रैबिट रोबोट 30 डिग्री कोण वाली ढलान पर चलने में सक्षम है और इसकी रफ्तार 200 मीटर प्रति घंटे है.

इसका नाम एक ऑन लाइन सर्वेक्षण में 34 लाख लोगों के सुझाव पर रखा गया है.

'चांद की देवी'

यह रोवर चांद के ज्वालामुखी के पठार वाले इलाके का अन्वेषण करेगा.
इमेज कैप्शन, यह रोवर चांद के ज्वालामुखी के पठार वाले इलाके का अन्वेषण करेगा.

<link type="page"><caption> </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131201_china_moon_rover_aj.shtml" platform="highweb"/></link>चीन के प्राचीन मिथकीय चरित्र एक चूहे के नाम पर इसका नामकरण किया गया है जो चांद की देवी चांग का पालतू था.

रोवर और लैंडिंग माड्यूल सौर्य ऊर्जा द्वारा चालित है.

हालांकि कुछ स्रोत स्वीकार करते हैं कि यान को गर्म रखने के लिए इसमें प्लूटोनियम-238 वाले रेडियो आइसोटोप्स हीटिंग यूनिट्स भी लगे हुए हैं.

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक रविवार को किसी एक बिंदु पर लैंडर और रेवर एक दूसरे की तस्वीर भी लेंगे.

चीनी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार, मिशन को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इससे नई तकनीक का परीक्षण, वैज्ञानिक आंकड़े इकट्ठा करना और विशेषज्ञता हासिल करने जैसे उद्देश्यों को हासिल किया जा सके.

आगे भी योजना

इसका एक अहम उद्देश्य चांद पर खनिज पदार्थों की खोज करना है जिसका भविष्य में खनन किया जा सके.

शिन्हुआ ने चीन की चंद्र मिशन से जुड़े इंजीनियर सुन हूज़ियान के हवाले से बताया कि, ''यह मिशन अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण अन्वेषण के लिए मानवीय प्रयासों का एक अहम हिस्सा है.''

इस मिशन के बाद चीन के सतह के नमूनों को 2017 तक पृथ्वी तक लाने की चीन की योजना है.

नमूनों के परीक्षण के बाद आगे के रोबोटिक मिशन के बारे में निर्णय होगा जोकि 2020 दशक में एक मानव चंद्र यान के रूप में अस्तित्व में आ सकता है.

वाशिंगटन में दक्षिणपंथी थिंक टैंक हेरिटेज फाउंडेशन से जुड़े एक शोधकर्ता देन चेंग ने कहा, ''चीन का यह मिशन उसकी 'व्यापक राष्ट्रीय शक्ति' की अवधारणा के अनुरूप है. इसे 'राज्य की सर्वांगीण क्षमता' के रूप में भी समझा सकता है.''

हालांकि उनका कहना है कि चीन खुद को किसी के साथ अंतरिक्ष दौड़ के रूप में नहीं देखता है.

''1950 और 1980 के दशक में जिस तरह अमरीका और सोवियत अंतरिक्ष दौड़ में एक दूसरे को पछाड़ने के लिए लगभग हर महीने कोई न कोई लांचिंग करते थे वैसी प्रतिद्वंद्विता चीन के साथ नहीं दिखाई देती.''

यह सफलता चीन के महत्कांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक अहम चरण है.
इमेज कैप्शन, यह सफलता चीन के महत्कांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक अहम चरण है.

इसकी अपेक्षा, चीन ने बहुत व्यवस्थित और धैर्य के साथ उन क्षेत्रों में काम किया जो अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए जरूरी हैं.

लांचर और पृथ्वी की कक्षा में मानव अभियान से लेकर मानव रहित अंतरग्रहीय यान तक चरणबद्ध रूप से विकसित किया और उसने इसमें भारी मात्रा में धन निवेश किया.

चेंग के अनुसार, चीन कहता है, हमने वह किया है जिसे दुनिया की दो शक्तियां ही कर पाईं- अमरीका और सोवियत संघ.

<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पन्ने पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>