चीन के जेड रैबिट ने परखी चांद की मिट्टी

चीन का जेड रैबिट रोवर

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चीन के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि देश के जेड रैबिट रोवर ने चांद की सतह पर भूमि परीक्षण का अपना पहला काम पूरा कर लिया है.

बीजिंग अंतरिक्ष नियंत्रण केंद्र का कहना है कि रोवर ने अपनी यांत्रिक भुजा का इस्तेमाल करते हुए मंगलवार रात चंद्रमा के सतह की जाँच की.

यह काम आधे घंटे तक चला. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़ परीक्षण के दौरान रोवर सभी कसौटियों पर खरा उतरा.

रोवर दिसंबर में चांद की सतह पर उतरा था. साल 1976 के बाद यह पहला मौका है जब लैंडिंग मॉड्यूल और रोवर चांद पर उतरा है.

इस मिशन का उद्देश्य नई तकनीक का परीक्षण करना, वैज्ञानिक आंकड़े जुटाना और अंतरिक्ष के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना है.

लैंडिंग मॉड्यूल वहां एक वर्ष तक काम करेगा जबकि रोवर के तीन महीने तक कार्य करते रहने की अपेक्षा है.

मिशन का उद्देश्य

इस अभियान में धरती पर बने केंद्र से 380,000 किलोमीटर दूर रोबोट पर नियंत्रण का परीक्षण किया गया. चीन के अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस तरह की ख़ास तकनीक में विशेषज्ञता हासिल करने के इच्छुक थे.

बीजिंग अंतरिक्ष नियंत्रण केंद्र से वु फेंगलेई ने कहा, ''पहला परीक्षण चांद की सतह पर इतनी सुगमता के साथ यांत्रिक भुजा पर नियंत्रण की सफलता को दिखाता है.''

दो सप्ताह तक सुसुप्तावस्था में रहने के बाद लैंडर और रोवर ने पिछले सप्ताहांत अपना काम शुरू किया. चंद्रमा पर एक रात दो सप्ताह के बराबर होती है.

अब दोनों ही ताक़त जुटाने के लिए सूर्य की किरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसका मतलब ये भी हुआ कि उन्हें लैंडिंग साइड पर अंधेरा होने से पहले ही ऊर्जा संचित कर लेनी होगी.

चंद्रमा पर रात में प्लूटोनियम-238 के ज़रिए रेडियोआइसोटोप हीटिंग यूनिट्स रोवर को गरम रखेंगी. रात के दौरान चांद पर तापमान -180 डिग्री तक गिर जाता है.

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