विकासशील देशों की जीवनशैली से बढ़े कैंसर मरीज़

विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि विकासशील देशों में जीवनशैली में हुए बदलाव के कारण पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ी है.

धूम्रपान, मोटापे के साथ-साथ लोगों की औसत आयु बढ़ने के कारण इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया में साल 2012 में कैंसर से पीड़ित 1.4 करोड़ लोगों का इलाज़ किया गया.

साल 2008 में कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या 1.27 करोड़ थी. उस वक्त इस बीमारी के कारण 76 लाख लोगों की मौत हुई थी, जबकि साल 2012 में इस बीमारी से 82 लाख लोग मारे गए.

पहचान और निदान

दुनिया में फेफड़े के से सबसे अधिक लोग पीड़ित हैं. इसका मुख्य कारण धूम्रपानहै. दुनिया में इस कैंसर से करीब 18 लाख लोग पीड़ित हैं, जो कैंसर मरीज़ों की कुल संख्या के 13 फ़ीसदी हैं.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक स्तन कैंसर के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह दुनिया की 140 देशों की महिलाओं में होने वाला सबसे कॉमन कैंसर है.

डब्ल्यूएचओ की कैंसर से जुड़ी रिसर्च एजेंसी के डॉ. डेविड फ़ॉरमैन ने कहा कि अल्प विकसित देशों में मौत का एक बड़ा कारण स्तन कैंसर है.

उनका कहना है कि एक तरफ जीवनशैली में बदलाव के कारण बीमारी से पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है, वहीं इन महिलाओं तक आधुनिक इलाज़ की तकनीक के नहीं पहुंचने के कारण मौत पर काबू नहीं पाया जा रहा है.

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि विकासशील देशों में स्तन कैंसर के पहचान और निदान को बढ़ावा देने की तुरंत जरूरत है. संगठन ने साल 2025 तक इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या 1.9 करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई है.

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