पांच में से एक ही बच्चे को प्रकृति से लगाव

- Author, मैट मैक्ग्रॉ
- पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
एक अध्ययन में पता चला है कि बच्चों की एक बहुत बड़ी संख्या प्रकृति से दूर होती जा रही है.
पर्यावरण संरक्षण संस्था आरएसपीबी के एक अध्ययन के अनुसार 8 से 12 वर्ष तक की उम्र के केवल 21 प्रतिशत ब्रितानी बच्चे ही प्रकृति से जुड़ाव रखते हैं.
अध्ययन में यह भी पाया गया कि लड़कों की अपेक्षा लड़कियां प्रकृति के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं.
संस्था के अनुसार, बड़ों में प्रकृति के खतरनाक होने की धारणा से बच्चों की रुचि प्रभावित होती है.
'नेचर डेफिसिट डिसॉर्डर'
हाल के वर्षों में इस तरह के बहुत से शोध हुए हैं जिसमें इस बात को रेखांकित किया गया है कि प्रकृति के प्रति जुड़ाव और उसका अहसास बच्चों के बीच कम होता जा रहा है.
कुछ लोगों का तर्क है कि इससे बच्चों का स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यवहार प्रभावित होता है.
ब्रिटेन के नेशनल ट्रस्ट ने 2012 में एक रिपोर्ट प्रकाशित कर इसे 'नेचर डेफिसिट डिसॉर्डर' का नाम दिया था. हालांकि इसे बीमारी नहीं माना गया.
लड़कियां संवेदनशील
आरएसपीबी का दावा है कि बच्चों का बाहरी दुनिया से लगाव या उससे दूरी को आंकने के लिए उसने पहली बार एक पैमाना बनाया है.
संस्था ने 16 बिंदुओं की एक प्रश्नावली तैयार की और उसे पूरे ब्रिटेन में 1,200 बच्चों से भरने को कहा गया.
नतीजे में पता चला कि 21 प्रतिशत बच्चे ही उस पैमाने पर खरे उतरे, जबकि 27 प्रतिशत लड़कियां इस पैमाने पर खरी उतरीं और उनके समकक्ष 16 प्रतिशत लड़के ही इस पैमाने पर खरे उतरे.
शहरी बच्चे आगे
अध्ययन में पता चला है कि वेल्स के 13 प्रतिशत बच्चे ही प्रकृति को लेकर संवेदनशील दिखे जबकि उत्तरी आयरलैंड और स्कॉटलैंड में यह प्रतिशत दोगुना था.
इसी तरह लंदन के बच्चों ने देश के बाक़ी हिस्से की अपेक्षा ज़्यादा स्कोर किया. कुल मिलाकर ग्रामीण बच्चों की अपेक्षा शहरी बच्चों में प्रकृति के प्रति ज्यादा लगाव दिखा.
आरएसपीबी का मानना है कि बच्चों में प्रकृति के प्रति जुड़ाव न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित होगा.
यदि हम बच्चों की ऐसी पीढ़ी विकसित कर सकें जिनका पर्यावरण से गहरा जुड़ाव हो और वे खुद को उसका हिस्सा मानें तो प्रकृति को बचाने लायक भविष्य में हमारे पास ताकत पैदा हो जाएगी.
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