इंटरनेट पर पाँच में से एक बच्चा दुर्व्यवहार का शिकार

फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों का इस्तेमाल करने वाले पांच में से एक बच्चे को पिछले साल इंटरनेट पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा.
ये बात बच्चों के लिए काम करने वाली ब्रिटेन की संस्था नेशनल सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू चिल्ड्रन (एनएसपीसीसी) के शोध में सामने आई है.
पढ़िए: <link type="page"><caption> क्या आपका बच्चा साइबर बुलिंग से सुरक्षित है?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130314_cyber_bullying_sy.shtml" platform="highweb"/></link>
बच्चों को इंटरनेट पर धमकियों, अवांछित यौन संदेश, इंटरनेट पर पीछा करना और एक ख़ास तरीके से दिखने का दबाव झेलना पड़ता है.
एनएसपीसीसी का कहना है कि फेसबुक, ट्विटर और यू ट्यूब का इस्तेमाल करने वाले बच्चों में ‘बड़ी तादाद’ उन बच्चों की है जिनकी उम्र 13 साल से कम होती है.
फेसबुक का इस्तेमाल 13 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं कर सकते.
'भड़काऊ भाषा से दिक्कतें'
सर्वे में ये भी पता चला है कि बच्चों के लिए सबसे सामान्य बुरा अनुभव धमकी और ट्रॉलिंग यानी अनाम पहचान वाले लोगों से भड़काऊ भाषा का सामना करना रहा.
एनएसपीसीसी का कहना है कि सर्वे ये जानने के लिए किया गया था कि बच्चों और युवाओं को इंटरनेट पर किस तरह की सामग्री मिलती है.
ब्रिटेन में इस महीने की शुरुआत में 14 साल की हन्ना स्मिथ का शव छत से लटका हुआ मिला था.
हन्ना के पिता का कहना है कि उसे सोशल नेटवर्किंग साइट आस्क डॉट एफएम पर अपमानजनक संदेश भेजे गए थे.
'अकेला महसूस न करें बच्चे'
एनएसपीसीसी की विशेषज्ञ क्लेयर लिली का कहना है, “ये सोचना असहनीय है कि कोई युवा ये महसूस करेगा कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर दुर्व्यवहार के बाद ख़ुदकुशी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.”
क्लेयर लिली का ये भी कहना है कि इससे पहले कि बात बिगड़ जाए इस चीज़ से निपटना होगा.
क्लेयर कहती हैं,“हमें युवाओं में दुर्व्यवहार के खिलाफ बोलने का आत्मविश्वास भरना होगा ताकि वो अलग-थलग और अकेले महसूस न करें.”
बीते हफ्ते ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने लोगों से अपील की थी कि वो ऐसी वेबसाइटों का बहिष्कार करें जो ऑनलाइन दुर्व्यवहार से निपटने में नाकाम रही हैं.
हन्ना स्मिथ की मौत के बाद लातविया की वेबसाइट आस्क डॉट एफएम ने एक कानूनी कंपनी से कहा है कि वो वेबसाइट का ‘पूरा और स्वतंत्र ऑडिट करे’.
आस्क डॉट कॉम को जून में दुनिया भर से हर रोज़ करीब 1.32 करोड़ लोगों ने देखा था.
इस वेबसाइट पर लोग एक दूसरे से सवाल पूछ सकते हैं और ऐप्स या वेबसाइट के ज़रिए फोटो, वीडियो या टेक्स्ट के रूप में जवाब पा सकते हैं.
इस वेबसाइट का सबसे विवादास्पद पहलू ये है कि इस वेबसाइट पर लोग अनाम रहकर भी सवाल पूछ सकते हैं.
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