डिजिटल इंडियंस: बीबीसी हिंदी का पहला गूगल हैंगआउट

डिजिटल इंडियंस, भारत, तकनीक, सिरीज़
    • Author, मुकेश शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बीबीसी डिजिटल इंडियंस की हमारी सिरीज़ अब दूसरे हफ़्ते में प्रवेश कर रही है.

पहले हफ़्ते में आपने इसे लेकर जो रुचि दिखाई है, उससे हम उत्साहित हैं.

टेक्नॉलॉजी की दुनिया में भारतीयों के इनोवेशन को लेकर सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर हैशटैग #BBCDI के ज़रिए चर्चा शुरू हो चुकी है.

आप उसमें शरीक हो रहे हैं, लेकिन ख़ासतौर पर हिंदी से जुड़ी जो चर्चा है उसके अभी और गर्म होने की गुंजाइश है.

उम्मीद है कि इस हफ़्ते आप फ़ेसबुक-ट्विटर और गूगल प्लस पर इन चर्चाओं में और बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे.

हफ़्ते के अंत में ख़ासतौर पर हिंदी के पाठकों के लिए हम बीबीसी हिंदी का पहला गूगल हैंगआउट लेकर आ रहे हैं.

ये हैंगआउट भारत के गाँवों में इंटरनेट की पहुँच पर चर्चा करेगा. वैसे तो सिरीज़ में ये हैंगआउट प्रस्तावित नहीं था लेकिन भारत में सोशल मीडिया को लेकर हमने पिछले हफ़्ते जो <link type="page"><caption> हैंगआउट</caption><url href="http://www.youtube.com/watch?v=2S6rDb58xug" platform="highweb"/></link> किया, उसमें हिंदी के पाठकों की रुचि देखते हुए हमने यह चर्चा रखी है.

इसमें कैसे शामिल होना है और विशेषज्ञ कौन होंगे- ये हम आपको आने वाले दिनों में बताएँगे.

गूगल हैंगआउट, बीबीसी हिंदी, सोशल मीडिया
इमेज कैप्शन, सोशल मीडिया पर हैंगआउट को बीबीसी के पाठकों ने काफ़ी पसंद किया.

हमने कहा था न कि हम आपकी बातें सुन रहे हैं- यह उसी का नतीजा है.

गूगल हैंगआउट

पिछले हफ़्ते के <link type="page"><caption> हैंगआउट</caption><url href="http://www.youtube.com/watch?v=2S6rDb58xug" platform="highweb"/></link> में हमारी चर्चा का विषय था- ‘भारत में सोशल मीडिया की स्थिति और यह बाक़ी दुनिया से कैसे अलग है?’.

हमारे विशेषज्ञों ने न सिर्फ़ युवाओं के फ़ेसबुक और ट्विटर से आगे व्हाट्स ऐप और ब्लैकबेरी मैसेंजर पर बढ़ जाने पर चर्चा की बल्कि हमने यह भी जाना कि कैसे कुछ लोग बिना इंटरनेट के भी गाँवों के लोगों को आपस में चर्चा के लिए एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म मुहैया करा रहे हैं.

गाँव वाले यह कैसे कर रहे हैं, इस हफ़्ते हम आपको इस बारे में विस्तार से बताएँगे. काफ़ी रोचक कहानी है, आपको ज़रूर पसंद आएगी.

हैंगआउट में हमने भारत के सोशल मीडिया की स्थिति की तुलना अफ़्रीका से भी की और जाना कि कैसे वहाँ और यहाँ कई विषयों में समानताएँ दिख रही हैं.

कैसे दोनों ही जगह सत्ता-प्रशासन में बैठे लोग सोशल मीडिया को लेकर असहज हुए हैं और अब उसे अपने ढंग से समझने की कोशिश भी कर रहे हैं.

हमारी यह चर्चा उस हैंगआउट से निकलकर अब सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर जारी है.

आपने पिछले हफ़्ते सागरिका देब की कहानी काफ़ी पसंद की. उन्होंने कैसे इंटरनेट पर एक संगीत बैंड बनाया और इंटरनेट उनका बुरे वक़्त का साथी बना.

ऐसी ही एक और डायरी आएगी, लेकिन इस हफ़्ते नहीं, उसके लिए थोड़ा और इंतज़ार.

हम जिन पाँच डिजिटल इंडियंस की कहानी आप तक इस सिरीज़ के ज़रिए ला रहे हैं उनमें से दो कहानियाँ आप इस हफ़्ते पढ़ेंगे.

हमें पूरा विश्वास है कि आपको इस हफ़्ते की हमारी पेशकश भी पसंद आएगी. सिरीज़ में आपको जो भी अच्छा या बुरा लगे, हमें यहाँ या फिर सोशल मीडिया पर बताते रहिए,

क्योंकि डिजिटल इंडियंस की बातें हम सुन और सुना रहे हैं.

(मुकेश शर्मा डिजिटल इंडियंस प्रोजेक्ट टीम का हिस्सा हैं. आप उनसे ट्विटर पर @mukeshtilak पर जुड़ सकते हैं.)

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