इंसानों से बर्ड फ्लू फैलने का पहला मामला

चीन में इंसानों से इंसानों को बर्ड फ़्लू होने का पहला मामला सामने आया है. इससे पहले इंसानों के एक दूसरे के संपर्क में आने से एच7एन9 वायरस के संक्रमण के साक्ष्य नहीं मिले थे.
केवल पक्षियों के साथ सीधे संपर्क से बर्ड फ़्लू संक्रमणका ख़तरा होता था. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के अनुसार एक 32 वर्षीय महिला बर्ड फ़्लू से प्रभावित अपने पिता की देखभाल के दौरान बर्ड फ़्लू से संक्रमित हो गई थी.
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि "इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि वायरस ने मनुष्यों के बीच आसानी से फैलने की क्षमता विकसित कर ली है."
पूर्वी चीन में 30 जून तक एच7एन9 संक्रमण के 133 मामले सामने आए हैं. इससे 43 लोगों की मौत हो चुकी है. इसमें से अधिकांश लोग बीमार होने के दो दिन और एक सप्ताह पहले मुर्गीपालन फार्म के साथ सीधे संपर्क में आए थे.
शोधकर्ताओं ने पाया कि 32 वर्षीय महिला मार्च महीने में अपने पिता की अस्पताल में देखभाल करने के दौरान बर्ड फ़्लू से संक्रमित हो गई थी.
पिता से मिला संक्रमण
उसके पिता बीमार होने के एक सप्ताह पहले मुर्गी बाज़ार गए थे. लेकिन महिला ने कभी भी मुर्गी फार्म नहीं देखा था. लेकिन अपने पिता के साथ संपर्क के 6 दिन बाद वह बीमार पड़ गई.
पिता और बेटी दोनों की मौत सघन चिकित्सा कक्ष में सभी अंगों के काम करना बंद करने की वज़ह से हुई. दोनों मरीजों पर किए गए परीक्षण से एक समान बर्ड फ़्लू वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है.
इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि लड़की की मौत पिता से प्राप्त वायरस संक्रमण के कारण हुई थी. इसके अलावा महिला के संक्रमण का कोई अन्य स्त्रोत सामने नहीं आया.
सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बर्ड फ़्लू से प्रभावित मरीजों के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों पर किए गए एच7एन1 के परीक्षणों का परिणाम नकारात्मक आया है. इससे वायरस के सीमित संक्रमण की क्षमता का पता चलता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि वायरस ने इंसानों से इंसानों के बीच फैलने की क्षमता विकसित कर ली है.
लड़की की पिता से प्राप्त संक्रमण से होने वाली मौत 'संभावित संक्रमण' का पहला मामला है.
महामारी बनने का ख़तरा

शोधकर्ताओं का कहना है कि खोज से वायरस के महामारी का रुप लेने की संभावनाओं का पता चलता है.
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एण्ड ट्रॉपिकल मेडिसिन के डॉ. जेम्स रज का कहना है कि "इंसानों के बीच वायरस का संक्रमण हैरान करने वाली बात नहीं है. इसके पहले <link type="page"><caption> बर्ड फ़्लू वायरस एच5एन1 </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/01/120121_flu_study_pa.shtml" platform="highweb"/></link>में भी इंसानों के एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलने के मामले पहले भी आ चुके हैं."
डॉ. रज कहते हैं कि "चिंता की बात तब होगी अगर हम इंसानों के बीच इसके फैलने की लंबी कड़ी देखने लगेंगे."
वे कहते हैं कि "अगर बर्ड फ़्लू वायरस से संक्रमित हर व्यक्ति से औसतन दो व्यक्ति संक्रमित होते हैं तो इसे <link type="page"><caption> महामारी की प्रारंभिक अवस्था</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/06/120621_bird_flu_pandemic_aa.shtml" platform="highweb"/></link> की चेतावनी माना जा सकता है."
बीएमजे में प्रकाशित एक संपादकीय के डॉ. रज सह लेखक हैं. इसके अनुसार यह अध्ययन एच7एन1 के महामारी बनने का संकेत नहीं करता. लेकिन ये सचेत जरूर करता है कि हमें इस बारे में हमेशा सतर्क रहना चाहिये.
<bold>(बीबीसी हिन्दी का नया एंड्रॉएड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे <link type="page"><caption> फेसबुक </caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>पन्ने पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












