क्या है ‘एज’, कैसे चलता है 4जी?

- Author, तुषार बनर्जी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
मोबाइल इंटरनेट ने बीते कुछ वर्षों में जिस तरह से दुनिया भर में अपनी पकड़ बनाई है उससे साफ़ पता चलता है कि कुछ ही समय में ये इंटरनेट उपयोग की परिभाषा बदल देगा.
दुनिया के कई विकसित देशों में जहाँ फिक्स लाइन इंटरनेट की व्यवस्था पूर्वस्थापित है वहाँ भी मोबाइल इंटरनेट बाज़ार के आधे से ज़्यादा या लगभग उतने ही हिस्से पर कब्जा कर चुका है.
भारत की बात करें तो विभिन्न स्रोतों से मिले आँकड़ों के अनुसार पूरे देश में लगभग 15 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं, जिनमें से 9 करोड़ मोबाइल से इंटरनेट पर आते हैं.
मोबाइल इंटरनेट के बढ़ते दायरे के साथ ही बाज़ार में उतारी जा रही है सेलुलर नेटवर्किंग की नई तकनीकें, जिनके बारे में आपमें से कई लोग जानते होंगे और कई नहीं.
पेश है कुछ महत्वपूर्ण सेलुलर तकनीकें और उनसे जुड़े तथ्य-
क्या होता है 4जी ?

मोबाइल इवोल्यूशन यानी मोबाइल नेटवर्किंग के विकास की चौथी जेनरेशन का संक्षिप्त नाम है 4जी. सेलुलर नेटवर्किंग के क्षेत्र में ये अभी तक की सबसे नई तकनीकों में से एक है. माना जा रहा है कि भारत में 4जी के पूरी तरह से आने पर बैंडविथ से जुड़ी समस्याएं सुलझेंगी.
भारत के कुछ चुनिंदा शहरों में एयरटेल 4जी सेवाएं उपलब्ध करा रही है, जबकि मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस इंफोकॉम बड़े स्तर पर 4जी सेवाएं बाज़ार में उतारने की तैयारियां कर रही है.
ज़्यादातर देशों में 4जी के दाम 3जी के बराबर या थोड़े ज़्यादा रखे गए हैं. रिसर्च एजेंसी गार्टनर के प्रमुख विश्लेशक ऋषि तेजपाल मानते हैं कि भारत में भी 4जी का दाम 3जी से थोड़ा अधिक रखा जा सकता है.
क्या है 3जी ?
मोबाइल इवोल्यूशन की तीसरी जेनरेशन की तकनीक है 3जी. भारत के लगभग सभी बड़े शहरों में अलग-अलग मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के माध्यम से ये सेवा उपलब्ध है. भारत में कुछ कंपनियां एचएसआईए (हाई स्पीड इंटरनेट एक्सेस) या 3जी प्लस सेवाएं भी उपलब्ध कराती हैं, जो आम 3जी से तेज़ होती है.
डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इंटरनेट के लिए जो 3जी डॉन्गल प्रयोग किए जाते हैं वो भी एचएसआईए तकनीक पर काम करते हैं.
क्या है 2जी ?

मोबाइल इवोल्यूशन की दूसरी जेनरेशन को 2जी प्रणाली बताई गई. इस तकनीक में पहली बार फॉन कॉल का डिजिटल प्रारूप जारी किया गया और साथ ही डाटा सेवाएं भी जारी की गई.
2जी की उत्पत्ति फ़ॉन कॉल और स्लो डाटा ट्रांसफ़र सेवाओं के लिए हुई थी.
द्वितीय जेनरेशन के ही तकनीक में थोड़ी उन्नत सेवा जीपीआरएस (जनरल पैकेट रेडियो सर्विस) यानि 2.5 जी और ईडीजीई (एन्हांस्ड डाटा रेट्स फॉर जीएसएम इवोल्यूशन) यानि 2.75जी जारी की गई जो अब भी भारत के कई इलाके में चलती है. दूर दराज के इलाकों में 3जी नेटवर्क कनेक्टिविटी के अभाव में ईडीजीई और जीपीआरएस के माध्यम से ही डाटा सेवाएं प्रदान की जा रही है.
क्या है 1जी या एनालॉग नेटवर्क ?

2जी या डिजिटल तकनीक आने से पहले जो सेलुलर नेटवर्किंग तकनीक मौजूद थी उसे 1जी तकनीक कहा जाता है. दुनिया के कई हिस्सों में ये एनालॉग तकनीक साल 1980 के दशक में आम लोगों के लिए बाज़ार में उतारी गई थी.
ये सेवा काफ़ी महंगी थी और केवल वॉइस कॉल को ही सपोर्ट करती थी. दुनिया भर के ज़्यादातर देशों से 1जी सेवा खत्म हो चुकी है.
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