सब्जी-फलों से भी हासिल होगें फिंगर प्रिंट

फिंगर प्रिंट
इमेज कैप्शन, अब खाद्य पदार्थों से मिलेंगे फिंगर प्रिंट

ब्रिटेन के एबर्टे विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसी तकनीक विकसित की है जिसकी मदद से खाद्य पदार्थों से भी <link type="page"><caption> फिंगर प्रिंट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/09/120920_international_us_plus_fingerprint_tb.shtml" platform="highweb"/></link> लिए जा सकते हैं.

इससे पहले, केवल भारत और स्लोवानिया में ही इस तरह के अध्ययन किए गए हैं.

हालांकि उन दोनों अध्ययनों में रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था जबकि ब्रिटेन के अध्ययन में रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

ये तकनीक पुलिस बल और मुकदमे के निपटान में सहायक साबित होगी.

हालांकि पहले ये तकनीक इतनी सफल साबित नहीं हुई थी. लेकिन अब इसी तकनीक में सुधार किया गया है.

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने कहा है कि पहले ये माना जाता था कि इस काम को नहीं किया जा सकता लेकिन उन्होंने इसे कर दिखाया है.

अपराधियों पर नकेल

पिछले 10 सालों से विश्वविद्यालय में काम करने वाले फॉरेंसिक एक्सपर्ट डेनिस जेन्टलेस कहते है, "हालांकि अलग अलग सतहों से फिंगर प्रिंट लेने की सफल विधियां पहले से ही हैं लेकिन कुछ सतहें ऐसी भी हैं जो इससे अछूती रहती हैं.जैसे इंसान और जानवर की चमड़ी."

"पहले इस श्रेणी में फल और सब्जियां भी आते थे क्योंकि उनकी सतह एक दूसरे से बहुत अलग होती है.अब जबकि हम लोग इस तरह की सतहों से भी फिंगर प्रिंट लेने में कामयाब हुए हैं ये <link type="page"><caption> अपराध रोकने</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/10/121007_science_durable_fingerprint_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> की दिशा में एक कदम आगे की बात होगी."

इससे पहले के दोनों अध्ययनों में फिंगर प्रिंट लेने के लिए रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था.

इसके बजाय ब्रिटेन के डॉकटरों ने एक पाउडर जैसा पदार्थ विकसित किया है जो प्याज और टमाटर और दूसरे चिकने फलों की सतह से भी उंगलियो की छाप को पकड़ लेता है.

जेनटेल्स का कहना है, "शुरुआत में इस तकनीक का विकास चिपकने वाले टेप से प्रिंट हासिल करने के लिए किया गया था."

"चूंकि ये दूसरी सतह पर भी का कर रह था इसलिए हमने सोचा कि ये खाद्य पदार्थों पर भी काम कर सकता है.हमने पाया कि ये दूसरी विधियों से ज्यादा कारगर साबित हुआ."

हलांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि इस तकनीक को “सभी तरह के फलों पर लागू करने से पहले बहुत तरह के शोध की जरूरत है."

फॉरेंसिक साइंस की पत्रिता “साइंस एंड जस्टिस” में इस शोध के प्रकाशित होने का मतलब ये है कि दूसरे लोग भी इस रिपोर्ट की नकल करेंगे.