मोबाइल से स्वास्थ्य को खतरे के सबूत नहीं

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ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी की ओर से कराए गए एक शोध के अनुसार अभी तक उन्हें ऐसे कोई सबूत नहीं मिले है जिससे ये साबित हो सके कि मोबाइल के प्रयोग से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.
सैकड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं पर किए गए शोध में वैज्ञानिकों को मोबाइल के प्रयोग से कैंसर, दिमाग से जुड़ी बीमारी या नामर्दानगी जैसी बीमारियां होने का कोई सबूत नहीं मिला है.
हालांकि शोधकर्ताओं का मानना है कि इस संबंध में शोध आगे भी जारी रहना चाहिए क्योंकि मोबाइल फोन के लंबे अरसे तक प्रयोग करने पर स्वास्थ्य पर इससे पड़ने वाले प्रभाव के बारे में कोई खास जानकारी अभी तक उनके हाथ नहीं लगी है.
स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी यानी कि एचपीए का मानना है कि बच्चों को मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से बचना चाहिए.
एचपीए का ये शोध मोबाइल और स्वास्थ्य पर इसके असर से संबंधित अब तक की सबसे बड़ी शोध है.
रेडियो फ्रिक्वेंसी
ब्रिटेन में फिलहाल लगभग आठ करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हैं और शोधकर्ताओं का कहना है कि टीवी, वाई-फाई इंटरनेट के प्रयोग से ज्यादातर लोग वैसे भी निम्न-स्तरीय रेडियो फ्रिक्वेंसी के प्रभाव क्षेत्र में रहते है.
शोधकर्ताओं के साथ काम कर रहें विशेषज्ञों ने कहा है कि ब्रिटेन में जिन लोगों पर शोध किया गया उसमें से किसी में भी मोबाइल प्रयोग के बाद स्वास्थ्य संबंधी शिकायत नहीं की.
इन लोगों में वो भी शामिल थे जिनका स्वास्थ्य रेडियों फ्रिक्वेंसी के प्रति संवेदनशील है.
शोधकर्ताओ का कहना है कि पांच साल या उससे ज्यादा की अवधि तक मोबाइल का उपयोग करने से स्वास्थ्य पर होने वाले असर के बारे में अभी तक कोई खास जानकारी नहीं मिली है.
इस शोध की अध्यक्षता करने वाले वैज्ञानिक प्रोफेसर एंथनी स्वर्डलो ने कहा, “इस शोध के पुख्ता होने के बावजूद मुझे लगता है कि हमें इस संबंध में काम जारी रखना चाहिए.”
एचपीए ने इसी संबंध में साल 2003 में एक शोध किया था, जिसमें यही बताया गया था कि मोबाइल का स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है.












