मोबाइल से डलेंगे वोट : सैम पित्रोदा

- Author, सैम पित्रोदा
- पदनाम, भारत के प्रधानमंत्री के सलाहकार
मेरी राय में मृत्यु के बाद तकनीक ही ऐसी चीज़ है, जो समाज में सबके लिए समान रुप से प्रभावी होती है.
हम बहुसंख्या जनता तक पहुंचने के लिए तकनीक का प्रभावी तरीक़े से उपयोग करना चाहते हैं.
इस समय भारत में 55 करोड़ टेलीफ़ोन कनेक्शन हैं और हर महीने कोई डेढ़ करोड़ नए फ़ोन कनेक्शन बढ़ते जा रहे हैं. इस लिहाज़ से हमारे पास दो साल बाद कोई 80 करोड़ फ़ोन कनेक्शन होंगे.
इसका मतलब यह है कि हमने पूरे देश को संचार माध्यम से जोड़ लिया है.
ब्रॉडबैंड
भारत में 2,50,000 पंचायतें हैं.
हम एक योजना बना रहे हैं जिसमें हम इन सभी पंचायतों को ब्रॉडबैंड के ज़रिए जोड़ना चाहते हैं.
निर्णय लेने और उस पर अमल करने का बहुत सा काम पंचायत के स्तर पर होता है.
हम मानते हैं कि अगले तीन से पाँच सालों के बीच देश में 10 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन होंगे. इसमें कोई संदेह नहीं है.
इसके बाद हम प्रशासन, स्वास्थ्य और शिक्षा को सुधारने के लिए इंटरनेट का ठीक तरह से उपयोग कर सकेंगे.
हम नेशनल नॉलेज नेटवर्क बना रहे हैं.
इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों, बड़े ग्रंथालयों और शोध केंद्रों जैसे पाँच हज़ार केंद्रों को जोड़ना है जिससे कि हम साझेदारी को बढ़ा सकें.
गुरु
इसमें शिक्षकों की जगह ब्रॉडबैंड को लाने जैसा कोई सवाल नहीं है.
यह ब्रॉडबैंड के ज़रिए शिक्षकों को बदलने की प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक परामर्शदाताओं में बदल जाएँगे.
भारत में गुरुओं की पुरानी परंपरा रही है और इंटरनेट इस गुरु परंपरा को वापस लाएगा.
तो शिक्षक इस तरह से हो जाएँगे जिनके पास बहुत से सवालों के जवाब होंगे लेकिन वे हर वक़्त पढ़ा नहीं रहे होंगे.
आज के समय में डस्टर और ब्लैकबोर्ड के साथ पढ़ाई करवाने वाले शिक्षक की भूमिका ख़त्म हो चुकी है, लेकिन फिर भी हम वही कर रहे हैं.
लेकिन इसको बदलना होगा.
यह इंटरनेट की ताक़त है. वह पूरी दुनिया के प्रतिमानों को बदलने जा रहा है.
वोटिंग
हम इस समय भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का उपयोग कर रहे हैं लेकिन मैं यह कह सकता हूँ कि पूरी दुनिया में मतदान अब मोबाइल फ़ोन के ज़रिए होने जा रहा है.
मुझे समझ में नहीं आता कि वोट डालने के लिए मुझे मतदान केंद्र तक जाने की क्या ज़रुरत है.
मेरे मोबाइल फ़ोन पर सुरक्षित ढंग से मतपत्र अपलोड कर दीजिए, जिससे कि मैं एक हफ़्ते से दस दिनों की अवधि में कभी भी उम्मीदवारों के नाम देखकर वोट डाल सकूँ.
मैं नहीं चाहता कि मुझे मतदान केंद्र पर जाकर लाइन में खड़ा होना पड़े, वहाँ सुरक्षा का इंतज़ाम करना पड़े और दस-बीस लोग इसलिए बैठे हों कि मैं मतदान करने के लिए जाने वाला हूँ.
यह बीते समय की बात हो चली है और हमें किसी दिन इसे समझना होगा.












