तकनीक होगी सहज : बामर

इंटरनेट
इमेज कैप्शन, स्टीव बामर मानते हैं कि आने वाले समय में संवाद वास्तविक से ज़्यादा आभासी होगा
    • Author, स्टीव बामर
    • पदनाम, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, माइक्रोसॉफ़्ट

मेरी राय में इंटरनेट, सॉफ्टवेयर और तकनीक की की दुनिया के लिए यह दशक बहुत असाधारण रहने वाला है.

कुछ चीज़े हैं जिसमें बदलाव को लोग महसूस करेंगे उसमें सबसे महत्वपूर्व है, संवाद करने के हमारे तौर-तरीक़ों में बदलाव.

आपस में जिस तरह व्यवहार करते हैं, तकनीक और सूचनाओं को हम जिस तरह बरतते हैं, वाले दिनों में उसमें ज़्यादा सहजता आ जाएगी.

बोलचाल, अभिव्यक्ति, विषय वस्तु, हमारे हावभाव, वीडियो रिकगनिशन इस सबको लेकर जो सबसे व्यापक आविष्कार होंगे, उसका ज़ोर इस बात पर होगा कि इंटरफ़ेस को किस तरह सहज बनाया जाए.

लोग अभी भी कहते हैं, "मैं अभी भी वह नहीं कर पा रहा हूँ, जो मैं करना चाहता हूँ या जो दूसरे लोग कर पा रहे हैं."

सहजता तब आएगी जब आप जिस तरह के निर्देश किसी व्यक्ति को देते हैं उसी तरह के निर्देश अपने कंप्यूटर को दे सकें.

अगर आपको कहीं जाना है तो कंप्यूटर को सिर्फ़ यह कहना पर्याप्त हो कि वह आपके जाने की तैयारी करे, न कि आप फ़ाइल खोलें फिर कोई वेबसाइट खोलें आदि. आप अपने सोफ़े पर बैठे रहें, बीबीसी का कोई कार्यक्रम देखते हुए और अपने फ़ोन या कंप्यूटर पर ही निर्देश देना काफ़ी हो.

क्लाउड कंप्यूटिंग

सारी दुनिया की सूचनाएँ, या बेहतर होगा कि कहें कि संचार साथ आने वाले हैं.

आने वाले दिनों में टीवी, प्रिंट और रेडियो, वॉइस कॉल और वीडियो कॉल सब कुछ इंटरनेट पर साथ आ जाएगा.

इसके लिए कोई ज़्यादा स्मार्ट सॉफ़्टवेयर आएगा जो कंप्यूटर या टीवी पर एक साथ काम करता रहेगा.

जब लोग 'क्लाउड कंप्यूटिंग' (यानी इंटरनेट के ज़रिए कंप्यूटर टेक्नॉलॉजी को प्रभावी बनाने का तरीक़ा) की बात करते हैं तो सबसे बड़ा सवाल होता है कि कैसे? कैसे हम कंप्यूटर और सॉफ़्टवेयर के काम करने के ढंग को बदलेंगे?

मैं देखता हूँ कि इन सबमें इंटरनेट की मुख्य भूमिका होगी. न केवल नई तकनीक और आविष्कारों के लिए बल्कि उन पुरानी तकनीक के लिए भी जिनका उपयोग हम इस समय कर रहे हैं.

'क्लाउड कंप्यूटिंग' इन सबमें मुख्य भूमिका निभाएगा इसमें कोई संदेह नहीं है.

विचार ज़रुर तेज़ी से आते हैं लेकिन तकनीक के ज़रिए दुनिया में होने वाले बदलावों को आने में काफ़ी समय लगेगा.

वर्चुअल इंटरेक्शन

इंटरनेट की दुनिया में महत्वपूर्ण बात यह होती है कि हम आपस में वर्चुअली या आभासी रुप से किस तरह से संवाद करते हैं.

आने वाले दिनों में संवाद का बड़ा हिस्सा आभासी ही होगा, आमने-सामने के संवाद लगातार कम होंगे.

उदाहरण के तौर पर मेरे दो बेटे हैं और हमारे लिए दोनों बेटों की दो गतिविधियों में एकसाथ शामिल होना हमारे लिए कठिन होता है.

तो यह कैसे संभव होगा कि मैं अपने दोनों बेटों से संपर्क कर सकूँ? तो इसका आसान तरीक़ा यह है कि माता और पिता दोनों एक दूसरे को ट्विटर फ़ीड देते रहें.

मेरा एक बेटा बास्केट बॉल खेलता है तो मैं उसके साथ होता हूँ और उसकी माँ को स्कोर ट्विटर के ज़रिए बताता रहता हूँ और दूसरी ओर मैं अपने दूसरे बेटे के बैंड कंसर्ट के बारे में जानकारी लेता रहता हूँ.