एलोपेसिया: विल स्मिथ की पत्नी जेडा पिंकेट स्मिथ को कौन सी बीमारी है

जेडा पिंकेट

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    • Author, शालिनी कुमारी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

बेस्ट एक्टर का ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाले विल स्मिथ की पत्नी जेडा पिकेंट की एक बीमारी दो दिन से चर्चा में है.

वजह- ऑस्कर अवॉर्ड समारोह के दौरान कॉमेडियन क्रिस रॉक का विल की पत्नी के सिर के बालों का मज़ाक उड़ाना और फिर विल स्मिथ का क्रिस को थप्पड़ मारना.

रॉक ने जेडा पिंकेट के सिर की तुलना फ़िल्म 'जीआई जेन' की एक्ट्रेस डेमी मूर से की थी जिन्होंने फ़िल्म के लिए अपना सिर मुंडवा लिया था.

ऐसा माना जा रहा है कि क्रिस रॉक ने ये तुलना जेडा पिंकेट के छोटे बालों के संदर्भ में की थी. उन्होंने कहा था, "आई लव यू ज़ेड. मैं जीआई जेन 2 देखने को बेसब्र हूं."

'द मैट्रिक्स फ्रैंचाइज़ी' और 'गोथम' जैसे फिल्मों के लिए जाने वाली अमरीकी अभिनेत्री जेडा पिंकेट ने पहले भी कई इंटरव्यू में अपने बालों की स्थिति के बारे में बात की थी और कहा था कि बाल झड़ने की समस्या गंभीर होने की वजह से उन्हें सिर मुंडवाना पड़ा था.

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जेडा पिंकेट को है एलोपेसिया

जेडा ने अपने फेसबुक वॉच सीरीज़, रेड टेबल टॉक के मई 2018 के एपिसोड के दौरान बताया था कि उन्हें एलोपेसिया है.

उन्होंने उस वीडियो में कहा था, "इसके बारे में बात करना बहुत मुश्किल है."

"मुझसे ये पूछा जाता था कि मैं सिर पर कपड़ा क्यों बांधती हूं. ऐसा इसलिए क्योंकि मेरे बाल झड़ रहे हैं. जब ये पहली बार मेरे साथ हुआ, मुझे बहुत डर लगा. एक दिन मैं नहा रही थी और मेरे हाथ में मुट्ठी भर बाल सिर से गिर चुके थे. मैं ये सोचने लगी कि क्या मैं गंजी हो रही हूं?"

विल स्मिथ

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"वो मेरे ज़िंदगी के उन पलों में से एक था जब मैं डर से बिल्कुल कांप रही थी. इसलिए मैंने अपने बाल काट दिए और मैं इसे काटती रहती हूं. मेरे बाल मेरे लिए बहुत जरूरी थे."

"बाल रखने या ना रखने का विकल्प मेरे लिए बहुत ख़ास था लेकिन एक दिन मेरे पास ये विकल्प ही नहीं बचा."

उन्होंने दिसम्बर 2021 में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो डालकर भी बताया था कि वो एलोपेसिया से जूझ रही हैं.

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क्या है एलोपेसिया

ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के अनुसार, एलोपेसिया एक इंफ्लेमेटरी बीमारी है जिसमें बाल झड़ने लगते हैं. इसका असर कभी-कभी नाखूनों पर भी होता है. ज़्यादातर मामलों में बहुत सारे बाल एक साथ झड़ जाते हैं और झड़ते हुए बालों का गुच्छा भी नज़र आता है. इसकी शुरुआत किसी भी उम्र में हो सकती है और किसी को भी हो सकता है.

दिल्ली में 11 सालों से डर्मटॉलॉजिस्ट के तौर पर काम कर रहीं डॉक्टर सोनाली चौधरी एलोपेसिया को समझाते हुए कहती हैं, "एलोपेसिया गंजेपन के लिए एक मेडिकल टर्म है जहां धीरे-धीरे हमारे बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं. पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग तरीके के एलोपेसिया हो सकते हैं. इसके अलग-अलग पड़ाव भी होते हैं."

उन्होंने बताया कि इस स्थिति में शुरुआत में बाल पतले होने लगते हैं और जब वो पतले हो जाते हैं तो वो जड़ से निकल जाते हैं और उस जगह गंजापन हो जाता है.

डॉक्टर सोनाली कहती हैं, "एलोपेसिया को हम ऑटो इम्यून डिसॉर्डर नहीं बोल सकते क्योंकि एलोपेसिया अलग-अलग तरह की होती है."

उन्होंने बताया कि एलोपेसिया आनुवंशिक कारणों और पोषण की कमी से भी होती है.

डॉक्टर सोनाली चौधरी ने बताया, "कुछ मामलों में ये तब होता है जब आपकी रोग प्रतिरोध शक्ति आपके ही खिलाफ काम करने लगती है. आपके शरीर की रोग प्रतिरोध शक्ति किसी भी तरह के संक्रमण से लड़ने की जगह, बालों के रोम पर हमला करने लग जाती है. लेकिन ये हर मामले में नहीं होता."

डॉक्टर सोनाली चौधरी
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क्या है एलोपेसिया के प्रकार

डॉक्टर सोनाली ने बताया कि एलोपेसिया के अलग-अलग प्रकार और स्टेज होते हैं.

उन्होंने कहा, "इसका एक प्रकार एलोपेसिया टोटेलिस होता है जिसमें आपके भौं भी चले जाते हैं और एलोपेसिया यूनिवर्सिलस में पूरे शरीर के बाल चले जाते हैं."

इसके अलावा एलोपेसिया एरियाटा भी है जो बाल झड़ने का सबसे सामान्य प्रकार है. इसकी वजह से गंजापन होता है.

डॉक्टर सोनाली ने एलोपेसिया के लिए और भी कुछ प्रकार बताए हैं. उन्होंने कहा, "नॉन स्कारिंग एलोपेसिया महिलाओं में होता है, ये आनुवंशिक कारणों से होता है. ये हमारे बालों के बीच से शुरू होता है, जहां से हम अपनी मांग निकालते है, वहां से बाल पतले होते है और फिर धीरे-धीरे गिर जाते हैं."

"पुरुषों में एंड्रोजेनेटिक एएलोपेसिया होता है जिसमें ज़्यादातर पुरुषों के स्कैल्प पर असर होता है, इसमें भी पांच स्टेज होते है, बालों की रेखा पीछे चली जाती है और सर के सामने से बाल गिर जाते हैं."

उन्होंने बताया कि ज़्यादातर सिर के आगे के बाल शरीर में मौजूद हॉर्मोन के उतार-चढ़ाव की वजह से गिर जाते हैं.

विल स्मिथ अपनी पत्नी जेडा पिंकेट के साथ

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क्या है इसका इलाज?

डॉक्टर सोनाली ने बीबीसी को बताया कि इलाज के लिए पहले वो ये देखती हैं कि शरीर में पोषण की क्या स्थिति है.

उन्होंने कहा, "कुछ ऐसी चीजें हैं जिसकी वजह से हमारे बाल बहुत ज़्यादा झड़ने लगते हैं जैसे आयरन या बी12 की कमी. हम डी3, थाइरॉइड प्रोफाइल, पीसीओएस जैसी चीजों का भी परीक्षण करते हैं ताकि अंदरूनी समस्या का पहले इलाज किया जा सके."

"अगर वहां से हमें कुछ पता नहीं चलता तो फिर हम स्कैल्प का परीक्षण करते हैं, हम ये देखते हैं कि क्या वहां कोई संक्रमण है."

उन्होंने बताया कि इसके बाद ही वो ऑटो इम्यून कंडीशन की तरफ़ जाते हैं. उन्होंने कहा, "इसमें हॉर्मोन से जुड़ी समस्याएं होती हैं. इसे ठीक करना थोड़ा मुश्किल होता है."

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क्या है इसके लक्षण?

डॉक्टर सोनाली ने बताया कि लोगों को ये ध्यान रखना चाहिए कि कब उनके बाल पतले होने लगे हैं.

पुरुषों के अंदर इस बीमारी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "ये देखिए कि क्या आपका माथा बड़ा होता जा रहा है और क्या बालों की रेखा पीछे जा रहे हैं और क्या सर के किनारों में गंजापन नज़र आ रहे है."

"महिलाओं को ये देखना होगा कि क्या उन्हें उनकी मांग चौड़ी नज़र आ रही है. क्या उन्हें अपना स्कैल्प अब दूर से नज़र आने लगा है."

उन्होंने कहा कि युवा महिलाओं को अपने बालों पर खास तौर पर ध्यान रखना होगा. उन्होंने कहा, "क्या उन्हें बहुत ज़्यादा ऐक्ने या चहरे या शरीर पर बहुत ज़्यादा बाल हो रहे है? ये कुछ लक्षण है कि आपके शरीर में हॉर्मोन के स्तर में कुछ बदलाव आया है."

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एलोपेसिया एरियाटा का मानसिक असर

एनएचएस ने एलोपेसिया एरियाटा पर जारी की गई गाइडलाइंस में ये कहा था कि कुछ मामलों में इस डिसॉर्डर की वजह से मानसिक तनाव भी हो सकता है. उसमें कहा गया है कि कुछ मरीज़ों के लिए इस डिसॉर्डर की चर्चा करने से, इसका इलाज और इलाज में लगने वाले समय से तनाव हो सकता है.

कुछ मामलों में शुरुआती सफलता के बाद भी रीलैप्‍स हो सकता है जो मरीज़ों के लिए निराशा का माध्यम बन जाती है. गाइडलाइंस में ये कहा गया कि बच्चों के मामले में इस बात का ज़्यादा ध्यान रखना चाहिए.

हालांकि कुछ मरीज़ ऐसे भी है जो इस बात से खुश थे कि उन्होंने कम से कम कोशिश की, नतीजे चाहे जो भी हो.

डॉक्टर सोनाली बताती हैं कि एलोपेसिया की वजह से आपके शरीर पर ज़्यादा प्रभाव नहीं पड़ता. आप सारे काम कर सकते हैं और आपको आराम की भी ज़रूरत नहीं पड़ती. लेकिन इसका लोगों पर मानसिक तनाव ज़रूर पड़ता है.

उन्होंने कहा, "आजकल लोग अपने बालों पर बहुत ध्यान देते हैं, खास तौर पर युवाओं को क्योंकि उन्हें अच्छा दिखना पसंद है."

उन्होंने बताया कि उनके पास कुछ ऐसे मरीज़ भी आते हैं जो उनसे कहते हैं कि बस शादी तक उनके बालों को बचा लिया जाए और शादी के बाद उन्हें इलाज की ज़रूरत नहीं होगी.

डॉक्टर सोनाली ने कहा, "यहां पर मैं ये भी कोशिश करती हूं कि मेरे मरीज़ यहां आपस में बात करें ताकि उनकी निराशा थोड़ी कम हो, एक सपोर्ट ग्रुप की तरह."

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