एनॉनिमसः रूस-यूक्रेन युद्ध में हैकर भी लड़ रहे, वेबसाइटों पर हो रहे साइबर हमले

- Author, जोए टिडी
- पदनाम, बीबीसी साइबर संवाददाता
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से ही साइबर हैकरों का समूह एनॉनिमस रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कमज़ोर करने के लिए रूस पर लगातार साइबर हमले कर रहा है. एनॉनिमस के बैनर तले काम कर रहे कई लोगों ने बीबीसी से बात की और अपने इरादों और रणनीति के बारे में बताया.
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही अब तक रूस की वेबसाइटों पर बहुत से साइबर हमले किए गए हैं, लेकिन इनमें रूस के एक टीवी नेटवर्क पर हुआ हमला अलग ही दिखाई देता है.
ये साइबर हमला टीवी पर प्रसारित एक छोटे वीडियो क्लिप में दिखाई देता है. टीवी नेटवर्क के सामान्य कार्यक्रम में खलल पड़ता है और स्क्रीन पर यूक्रेन में बमबारी की तस्वीरें दिखाई देने लगती है. वीडियो में युद्ध के ख़ौफ़ के बारे में बात करते सैनिक भी नज़र आते हैं.
ये वीडियो 27 फ़रवरी को सोशल मीडिया पर एनॉनिमस के अकाउंट से ही पोस्ट किया गया था और दावा किया गया था कि रूस के सरकारी टीवी चैनल को एनॉनिमस ने हैक करके यूक्रेन का सच दिखाने के लिए इस्तेमाल किया.
कुछ ही दिनों में इस वीडियो को लाखों लोगों ने देख लिया था. इस काम में एनॉनिमस के हैक करने के तरीक़े की छाप दिखाई दे रही थी. नाटकीय, प्रभावशाली और आसानी से ऑनलाइन शेयर करने योग्य. एनॉनिमस समूह के बाकी हैक की तरह ही इसकी भी स्वतंत्र रूप से पुष्टी करना मुश्किल है.
एनॉनिमस हैकरों के एक छोटे समूह ने दावा किया है कि वो इस हैक के पीछे थे और रूस के चैनल के प्रसारण पर 12 मिनट तक उनका क़ब्ज़ा था.

जिस व्यक्ति ने सबसे पहले ये वीडियो पोस्ट किया था वो ये साबित कर सका है कि वीडियो सही है. एलिज़ा अमेरिका में रहती हैं और उनके पिता रूस के हैं. जब उनके टीवी शो में खलल पड़ा तो उन्हें एलिजा को फ़ोन करके बताया था.
एलिज़ा बताती हैं, "जब ये हुआ तो मेरे पिता ने मुझे फ़ोन किया और कहा कि 'हे ईश्वर, वो सच दिखा रहे हैं'. मैंने उनसे इसे रिकॉर्ड करने के लिए कहा और वीडियो को ऑनलाइन पोस्ट कर दिया. मेरे पिता का कहना है कि उनके एक दोस्त ने भी ये सब होते हुए देखा था."
बीबीसी ने इस घटनाक्रम के बारे में चैनल का संचालन करने वाली रूसी कंपनी रॉसटेलिकॉम से संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका.
हैकरों का तर्क है कि उन्होंने जो किया सही किया क्योंकि यूक्रेन में सैकड़ों बेगुनाह लोग मारे जा रहे हैं. हैकरों का कहना है, "यदि यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए कुछ नहीं किया गया तो हम रूस पर साइबर हमले और तेज़ करेंगे."
एनॉनिमस का कहना है कि उन्होंने रूस की एक वेबसाइट पर नियंत्रण किया और रूस का सरकारी डेटा भी हासिल किया. लेकिन साइबर सिक्योरिटी पर काम करने वाली कंपनी रेड गोट से जुड़ी लीज़ा फोर्टे कहती हैं कि अधिकतर साइबर हमले काफ़ी साधारण किस्म के हैं.
हैकर आम तौर पर डीडीओएस हमले कर रहे हैं जिनमें वेबसाइट को सर्वर को जाम कर दिया जाता है. लीज़ा कहती हैं कि ये साइबर हमले काफ़ी आसान होते हैं और इनसे कुछ समय के लिए ही वेबसाइट पर असर पड़ता है.
वो कहती हैं, "लेकिन टीवी को हैक करना बहुत जटिल काम था और इसे करना बहुत आसान नहीं रहा होगा. ये काफ़ी रचनात्मक भी था."
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एनॉनिमस हैकरों ने रूस की कई वेबसाइटों के साथ भी छेड़छाड़ की है. लीज़ा फोर्टे के मुताबिक़ ऐसा करने के लिए वेबसाइट पर नियंत्रण करना ज़रूरी होता है.
अभी तक साइबरों हमलों की वजह से काम में खलल पड़ा है और शर्मनाक स्थिति पैदा हुई है, लेकिन साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से ही हैकिंग बढ़ गई है और ये चिंता की बात है.
उन्हें चिंता है कि कहीं हैकर किसी अस्पताल के नेटवर्क को बर्बाद ना कर दें या कोई ज़रूरी संचार लिंक ना तोड़ दें.
साइबर पॉलिसी जर्नल से जुड़ी एमिली टेलर कहती हैं, "हमने अभी तक ऐसा कुछ नहीं देखा था."
वो कहती हैं, "इन साइबर हमलों के ख़तरे भी हैं, इनसे युद्ध में तनाव बढ़ सकता है, कोई दुर्घटनावश आम जनजीवन के लिए ज़रूरी व्यवस्था को वास्तविक नुक़सान भी पहुंचा सकता है."

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एनॉनिमस कौन हैं?
- हैकरों का ये समूह सबसे पहले साल 2003 में वेबसाइट 4chan के ज़रिए सामने आया था.
- इस समूह का कोई नेतृत्व नहीं है. समूह अपने बारे में कहता है- हम एक सेना हैं जो अलग-अलग जगहों से काम करते हैं.
- कोई भी इस समूह का हिस्सा होने के दावा कर सकता है और किसी मक़सद के लिए हैकिंग कर सकता है. लेकिन आमतौर पर ये समूह सत्ता या ताक़त का दुरुपयोग करने वाली सरकारों और संस्थानों को निशाना बनाता है.
- इनका प्रतीक गॉय फॉकी मास्क है जो एलन मूर के नॉवेल 'वी फ़ॉर वेनडेटा' से चर्चित हुआ था. इस नॉवेल में हिंसक क्रांतिकारी एक भ्रष्ट सरकार का तख़्तापलट करते हैं. इस समूह के कई सोशल मीडिया अकाउंट हैं और अकेले ट्विटर पर ही डेढ़ करोड़ से अधिक फॉलोवर हैं.


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हाल के सालों में एनॉनिमस बहुत एक्टिव नहीं था. यूक्रेन के टेक कारोबारी रोमन अब हैकरों के एक समूह का नेतृत्व करते हैं. यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले उनके एनॉनिमस के साथ कोई संबंध नहीं थे.
रोमन बताते हैं कि जब उन्होंने और उनकी टीम ने कुछ समय के लिए रूस की समाचार सेवा तास की वेबसाइट पर पुतिन विरोधी पोस्टर लगाया तो उन्होंने उस पर एनॉनिमस के लोगो (प्रतीक चिन्ह) का इस्तेमाल किया था.
रोमन यूक्रेन की राजधानी कीएव की एक छह मंजिला इमारत से काम करते हैं. वो अपनी टीम के साथ समन्वय बनाकर काम करते हैं. उनकी टीम वेबसाइटें, एंड्रॉयड एप और टेलीग्राम बॉट बनाती है और मानती है कि वो इस तरह के युद्ध में सहयोग कर रही है. उनकी टीम रूस की वेबसाइटों पर हमला करने में जुटी रहती है.
वो कहते हैं, "मैं यूक्रेन के लिए लड़ने के लिए बंदूक उठाने को तैयार हूं लेकिन मुझे लगता है कि मेरी योग्यता का बेहतर इस्तेमाल कंप्यूटर के साथ है. मैं यहां अपने अपार्टमेंट हूं और अपने दो लैपटॉप के साथ हर समय डटा हूं ताकि तकनीक के क्षेत्र में इस प्रतिरोध को जारी रखा जा सके."
वो दावा करते हैं कि उनके समूह ने रूस की एक क्षेत्रीय रेल टिकट सेवा को कुछ घंटों के लिए बाधित कर दिया था. हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं की जा सकी है.
वो कहते हैं कि इस तरह की चीज़ें तब तक ही ग़लत हैं जब तक आप पर या आपके परिवार और रिश्तेदारोंपर ख़तरा ना हो.
पोलैंड का हैकिंग समूह स्क्वॉड 303 भी एनॉनिमस के साथ उभर रहा है. इसका नाम दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड की चर्चित सैन्य टुकड़ी स्क्वॉड 303 के नाम पर रखा गया है.
दूसरे विश्व युद्ध के पॉयलट जान ज़ुमबाच का नाम इस्तेमाल करने वाले एक हैकर समूह का कहना है, "हम एनॉनिमस के साथ मिलकर काम करते हैं और अब मैं अपने आप को एनॉनिमस समूह का ही हिस्सा मानता हूं."

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हैकर समूह कहता है कि वो नहीं चाहते कि उनकी तस्वीर किसी लेख के साथ प्रकाशित हो लेकिन उनके साथ काम कर रहे एक यूक्रेनी सदस्य ने अपनी तस्वीर बीबीसी को भेजी है जिसमें वो हेलमेट और मॉस्क लगाए हुए हैं.
वो बताते हैं कि दिन में वो बैरिकेड पर राइफल लेकर खड़े होते हैं और रात में एनॉनिमस के साथ मिलकर हैकिंग को अंजाम देते हैं.
स्क्वॉड 303 ने एक वेबसाइट बनाई है जिसके ज़रिए आम लोग रूस के मोबाइल नंबरों पर सीधे संदेश भेजकर उन्हें युद्ध के हालात के बारे में जानकारी दे सकते हैं और सच बता सकते हैं. उनका दावा है कि अभी तक बीस लाख से अधिक एसएमएस और व्हाट्सएप संदेश उनकी वेबसाइट के ज़रिए भेजे जा चुके हैं.
एनॉनिमस से जुड़े जिन दो समूहों से हमने बात की उनका कहना था कि यूक्रेन युद्ध के दौरान ये अभी तक का सबसे प्रभावशाली काम रहा है.
जब हमने पूछा कि वो समूह की अवैध गतिविधियों को वो कैसे सही ठहराएंगे तो जैन जुंबाच कहते हैं कि वो लोगों की निजी जानकारियां नहीं चुरा रहे हैं बल्कि रूस के लोगों को युद्ध के बारे में सही जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि वो ये भी बताते हैं कि अगले कुछ दिनों में उनका समूह और भी प्रभावशाली हैकिंग करने पर काम कर रहा है.
वहीं दूसरी तरफ रूस से जुड़े साइबर हैकर भी यूक्रेन पर साइबर हमले कर रहे हैं लेकिन वो छोटे स्तर पर ये काम कर रहे हैं.
जनवरी के बाद से यूक्रेन पर तीन बार बड़े डीडीओएस हमले किए जा चुके हैं. इसके अलावा हैकिंग की तीन गंभीर घटनाएं भी हुई हैं. 'वाइपर' हमलों के ज़रिए यूक्रेन के कंप्यूटरों से डेटा डिलीट किया गया है.
वहीं इसी बुधवार को यूक्रेन के एक टीवी चैनल यूक्रेनिया 24 पर राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का एक डीप फ़ेक वीडियो पोस्ट किया गया. चैनल की वेबसाइट को हैक कर लिया गया था. हालांकि मौजूदा माहौल में ये बता पाना मुश्किल है कि किसी एक साइबर हमले के पीछे कौन हो सकता है.
एनॉनिमस समूह से जुड़े चर्चित हैकर एनॉन2वर्ल्ड कहते हैं कि एनॉनिमस की कमज़ोरी ये है कि कोई भी एनॉनिमस के साथ जुड़े होने का दावा कर सकता है, इनमें वो पक्ष भी हैं जिनके ख़िलाफ़ हम लड़ाई लड़ रहे हैं.
वो कहते हैं, "मौजूदा लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी के साथ ही ये भी तय है कि सरकार प्रतिक्रिया देगी. लेकिन जहां तक अराजकता फैलाने का सवाल है, हम तो अराजकता के आदि हैं, ख़ासकर ऑनलाइन अराजकता के."
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