क्या उपवास रखने से याददाश्त तेज़ होती है?

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हम मानते हैं कि उम्र के साथ-साथ हमारी स्मरण शक्ति कमज़ोर पड़ने लगती है. लेकिन कुछ नए शोध संकेत देते हैं कि हम इस प्रक्रिया को रोक सकते हैं बल्कि इसे फिर से वापस भी ला सकते हैं और ये सब इस बात पर निर्भर है कि आप कितना खाते-पीते हैं. लंदन के किंग्स कॉलेज में डॉक्टर गाइल्स यो ने इस विषय पर और अधिक जानकारी जुटाने के लिए एक शोध में हिस्सा लिया.

शोध

चूहों पर शोध से ये सामने आया कि कैलोरीज़ की मात्रा कम किए जाने पर दिमाग़ नई कोशिकाएं या न्यूरॉन्स पैदा करते हैं. इस प्रक्रिया को न्यूरोजेनेसिस कहते हैं. वैज्ञानिकों ने पाया कि उनकी याददाश्त में बेहतरी हुई है. किंग्स कॉलेज के डॉक्टर सैन्ड्रिन ठूरेट और क्यूरी किम जांच-पड़ताल कर रहे हैं कि क्या ऐसा इंसानों में भी संभव है.

प्रयोग

किंग्स कॉलेज के डॉक्टर गाइल्स समेत 43 लोगों को टेस्ट के लिए चुना गया. उनकी उम्र 45 से 75 के बीच थी. चार सप्ताह के लिए उन सबको कम कैलोरी वाला भोजन दिया गया. उनको सप्ताह के दो दिन 500-600 कैलोरी ही दी गई. बाक़ी पांच दिन वो उतना खा सकते थे जितना वो सामान्य दिनों में खाते थे.

याददाश्त

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प्रयोग के चार सप्ताह की शुरुआत और अंत में हर व्यक्ति की स्मरण शक्ति का टेस्ट लिया गया. इसे पैटर्न सेपरेशन टेस्ट के नाम से जाना जाता है. प्रयोग में उन तस्वीरों में फ़र्क़ ढूंढना होता है जो आप पहले देख चुके हैं और फिर नई तस्वीरें दिखाई जाती हैं.

प्रयोग में शामिल हर व्यक्ति का ब्लड टेस्ट किया गया जिसमें ख़ून में प्रोटीन की मात्रा जांची गई. इल प्रोटीन को क्लोथो कहते हैं. उम्र के साथ व्यक्ति के शरीर में इसकी कमी होती जाती है. शोध में पाया गया है कि क्लोथो के बढ़ने से नई कोशिकाएं और न्यूरॉन्स पैदा होते हैं जिनकी बात ऊपर हो चुकी है.

परिणाम

प्रयोग के नतीजे काफ़ी उत्साहजनक रहे. पाया गया कि टेस्ट में शामिल सभी लोगों का पैर्टन सेपरेशन बेहतर हुआ था, उनका क्लोथो लेवल भी बढ़ गया था. इस प्रयोग से ये दिखाता है कि कम खाने से इंसान की स्मरण शक्ति बढ़ती है. क्लोथो लेवल का बढ़ना इस बात का संकेत है कि उनमें न्यूरोजेनेसिस हुआ होगा.

हालांकि इसके कुछ अपवाद भी रहे. डॉक्टर गाइल्स का पैटर्न सेपरेशन पहले से कम हो गया और क्लोथो प्रोटीन के स्तर में भी बदलाव नहीं हुआ.

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विशेषज्ञों के अनुसार इसके कुछ कारण हो सकते हैं. अच्छी नींद का न्यूरोजेनेसिस से गहरा संबंध है. लेकिन पूरी स्टडी के दौरान डॉ गाइल्स को नींद की कमी रही, शायद भूख इसकी वजह रही हो.

पूरे ग्रुप में गाइल्स सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे. वो नियमित रूप से व्यायाम करते हैं. यानी थोड़े अंतराल पर किए गए उपवास का असर कम होगा.

अब 60 साल के लोगों के ऊपर स्टडी करके इस बात का पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बुज़ुर्गों में ये किस तरह से काम करता है.

दिमाग़

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आपको क्या करना चाहिए?

परिणाम बताते हैं, यदि आप बुज़ुर्गों की पंक्ति में शामिल हैं और बहुत अधिक कसरत नहीं करते हैं तो सप्ताह में दो दिन उपवास से आपकी याददाश्त बढ़ सकती है. उन दो दिनों में महिलाओं को अपनी कैलोरी ग्रहण करने की मात्रा को 500 और पुरुषों को 600 के भीतर सीमित कर देनी चाहिए. सप्ताह के बाक़ी पांच दिन आप उतना खाएं जितना आप सामान्य तौर पर खाते हैं.

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