कोरोना से ठीक होने के बाद भी बीमार क्यों पड़ रहे हैं लोग

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    • Author, कमलेश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

हरियाणा में गुरुग्राम के रहने वाले भरत जुनेजा को मई में पता चला कि वो कोविड पॉज़िटिव हैं. उनके लक्षण गंभीर थे इसलिए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.

कई दिनों के इलाज के बाद वो पूरी तरह ठीक हो गए. इसके बाद भी उन्हें थकान, कमज़ोरी, साँस फूलना और ठीक से नींद ना आने जैसे समस्याएँ होने लगीं.

51 साल के भरत जुनेजा बताते हैं, “मुझे क़रीब सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रहना पड़ा था. इसके बाद 16 जून को मेरी रिपोर्ट निगेटिव आ गई और दो दिन बाद मैं डिस्चार्ज हो गया. लेकिन, इसके बाद भी मुझे थकान और कमज़ोरी महसूस होने लगी और चक्कर आने लगे.''

भरत ने बताया, '' मुझे सीढ़ियाँ चढ़ने में परेशानी होने लगी थी और जल्दी ग़ुस्सा आने लगा था. मुझे वेंटिलेटर पर कई दिनों तक रहने के चलते भी डरावने सपने आ रहे थे. डॉक्टर ने बताया कि ये प्रक्रिया का हिस्सा है. ये ठीक हो जाएगा.”

पेशे से इंजीनियर भरत जुनेजा का फ़ोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा है और अब वो बेहतर महसूस कर रहे हैं.

पीपीई में एक शख्स

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कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद भी कई लोग बीमार पड़ रहे हैं. उनमें साँस लेने में परेशानी, चक्कर आना, थकान, हल्का बुख़ार, जोड़ों में दर्द और उदासी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं. इसे पोस्ट कोविड सिम्पटम भी कहा जाता है.

भारत ही नहीं, विदेशों में भी लोगों ने सोशल मीडिया या सर्वे के ज़रिए अपने अनुभव बताए हैं. हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह की कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आने के तीन दिनों बाद उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था. उन्हें चक्कर आने और बदन दर्द की शिकायत थी.

दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में इसी महीने पोस्ट-कोविड क्लीनिक भी बनाया गया है, जहाँ कोविड से ठीक होने के बाद भी परेशानी महसूस कर रहे मरीज़ों का इलाज होता है.

डॉक्टरों के मुताबिक़ ऐसे कई मरीज़ सामने आ रहे हैं, जिनमें कोरोना वायरस की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी लक्षण बने हुए हैं और उन्हें इलाज की ज़रूरत पड़ रही है.

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पोस्ट कोविड लक्षण क्या हैं?

मैक्स अस्पताल, वैशाली में पल्मनॉलॉजी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. शरद जोशी कहते हैं, “कोविड-19 से ठीक होने के बाद हमारे पास कई मरीज़ आ रहे हैं. उन्हें थकान, साँस लेने में परेशानी, चक्कर आना और बेहोशी जैसे समस्याएँ हो रही है. कई लोगों में स्वाद का ना आना और गले में ख़राश की दिक़्क़त भी बनी रहती है.”

जिस मरीज़ में कोविड का संक्रमण जितना अधिक होता है, उतने ज़्यादा लक्षण उसमें ठीक होने के बाद देखने को मिलते हैं. हालांकि, कोविड के हल्के-फुल्के संक्रमण वाले लोगों को भी बाद में कमज़ोरी महसूस हो रही है.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद दोबारा संक्रमित हुआ शख़्स

कई मरीज़ों में ये कमज़ोरी इतनी ज़्यादा हो सकती है कि बेड से उठकर बाथरूम जाने में भी मुश्किल होने लगे. डॉक्टरों के मुताबिक़ ज़रूरी नहीं कि ये लक्षण हर मरीज़ में सामने आएँ.

डॉ. शरद जोशी के अनुसार जितने भी गंभीर लक्षण वाले मरीज़ उनके पास आ रहे हैं, उनमें से 30 से 35 प्रतिशत मरीज़ों में ठीक होने के बाद ये समस्या आ रही है.

30 प्रतिशत हल्के-फुल्के संक्रण वाले मरीज़ों में कमज़ोरी आ रही है. कुछ मरीज़ ऐसे हैं, जिनके एक्सरे में अच्छा सुधार दिखता है लेकिन पल्मनरी फ़ंक्शन टेस्ट करने पर पता चलता है कि उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है.

ब्रिटेन के नार्थ ब्रिस्टल एनएचएस ट्रस्ट के एक अध्ययन के मुताबिक़ डिस्चार्ज हुए 110 मरीज़ों में से 81 को साँस लेने में दिक्कत, बार-बार बेहोशी और जोड़ों में दर्द की परेशानी हुई है. ऐसे मरीज़ कम थे, जिनमें फेफड़ों की गंभीर समस्या हो या उनकी कार्यक्षमता में कमी आई हो. ये रिसर्च के प्राथमिक नतीजे हैं.

फेफड़े

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पल्मोनरी फ़ाइब्रोसिस

कोविड-19 के मरीज़ों में एक बड़ी समस्या पल्मनरी फ़ाइब्रोसिस को लेकर आ रही है, जो फेफड़ों से जुड़ी है.

डॉ. शरद जोशी बताते हैं, “जिन लोगों में कोविड-19 के संक्रमण के कारण एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो जाता है यानी फेफड़े ठीक से काम नहीं करते, उनमें पल्मनरी फ़ाइब्रोसिस की समस्या हो सकती है. पल्मनरी फ़ाइब्रोसिस में फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है. ऐसे मरीज़ों को सांस फूलने की परेशानी लंबे समय तक रह सकती है. ज़्यादा गंभीर स्थिति में घर में ऑक्सीजन भी लेनी पड़ सकती है.”

“कोविड-19 के जिन मरीज़ों में एआरडीएस देखा गया है, उनमें से एक प्रतिशत में ज़िंदगीभर फेफड़ों संबंधी परेशानी रह सकती है. उनके फेफड़े कमज़ोर हो जाते हैं और आगे भी किसी अन्य संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं. इन्हें लंबे समय के लिए अपना इलाज कराना पड़ेगा.”

डॉक्टर कहते हैं कि पल्मनरी फ़ाइब्रोसिस में बहुत अच्छी प्रतिक्रिया नहीं है. दूसरे वायरस जैसे सार्स या एच1एन1 में ठीक होने के बाद भी पल्मनरी फ़ाइब्रोसिस होना इतना सामान्य और विस्तृत नहीं था. कोविड-19 में ऐसे दोगुने मामले मिल रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस का कहर अंडमान की दुर्लभ जनजाति तक पहुंचा.

इसके अलावा कोरोना वायरस ठीक होने के बाद मरीज़ के न्यूरो सिस्टम पर भी असर पड़ता है.

फ़ोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम में न्यूरोलॉजी के प्रमुख डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं, “कोविड-19 से ठीक होने के बाद नसों में लकवा हो सकता है, कभी-कभी ये दिमाग़ पर भी असर करता है, जिससे याददाश्त प्रभावित होती है. कोविड में आइसोलेशन के बाद घबराहट हो सकती है. इसे पोस्ट डिजीज़ स्ट्रेस डिसऑर्डर कहते हैं. जिन मरीज़ों में दिमाग़ में सूजन या फेफड़ों की गंभीर समस्या होती है उनमें बाद में ज़्यादा लक्षण देखने को मिलते हैं वरना कमज़ोरी और चक्कर आना सबसे सामान्य लक्षण हैं.”

खांसती हुई एक महिला

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बीमारी ठीक होने पर भी लक्षण क्यों?

डॉक्टरों के मुताबिक़ ऐसा होना कोई नई बात नहीं है. ऐसा दूसरे वायरस के मामलों में भी होता है.

इसके कारण को लेकर डॉ. शरद जोशी ने बताया, “वायरस से लड़ने के लिए शरीर में बने एंटीजन इम्यून सिस्टम में इस तरह के बदलाव कर देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम अति प्रतिक्रिया करने लगता है. इसी कारण बुख़ार, बदन दर्द और अन्य समस्याएँ होने लगती हैं. शरीर में इनफ्लेमेट्री रिएक्शन होने लगता है जो पूरे शरीर पर प्रभाव डालता है. ऐसे में वायरस ख़त्म होने के बाद भी इनफ्लेमेट्री सेल्स और केमिकल बने रहते हैं. इम्यून सिस्टम की इस प्रतिक्रिया के कारण ही लक्षण बने रहते हैं.”

वो कहते हैं, “जैसे चिकनगुनिया में 8 से 10 दिन बुख़ार रहने के बाद ठीक हो जाता है लेकिन, उसके कई मरीज़ों को जोड़ों में दर्द और शरीर में दर्द कई महीनों तक रहता है. कई मरीज़ों को गठिया की बीमारी भी हो जाती है.”

लेकिन, कुछ मामलों को छोड़ दें तो ये लक्षण हमेशा के लिए धीरे-धीरे ठीक भी हो जाते हैं.

डॉक्टर प्रवीण गुप्ता बताते हैं कि शरीर की प्रकृति होती है धीरे-धीरे मरम्मत करना. इसलिए कुछ समस्याएँ बेहोशी और चक्कर आना धीरे-धीरे अपनेआप ठीक हो सकते हैं. लेकिन, कमज़ोरी, सांस लेने में दिक्कत या लकवे आदि की स्थिति में दवा की ज़रूरत होती है.

कोरोना वायरस ठीक होने के बाद के लक्षण ठीक होने में हफ़्तों से लेकर दो से छह महीने भी लग सकते हैं.

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कोरोना से ठीक होने के बाद बरतें ये सावधानियाँ

कोरोना वायरस ठीक होने जाने के बाद किसी व्यक्ति में 30 से 40 दिनों तक एंटीबॉडी बनी रहती है. ऐसे में उसके कोरोना से संक्रमित होने का ख़तरा बहुत कम हो जाता है. फिर भी डॉक्टर पूरी तरह सावधानियाँ बरतने की सलाह देते हैं.

डॉक्टर शरद जोशी का कहना है कि आपका शरीर एक वायरस से लड़कर जीता है. आपके इम्यून सिस्टम पर पहले से ही दबाव था. ऐसे में अपने खाने-पीने का ध्यान रखें.

मास्क, हाइजीन और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर सावधानियाँ बरतें. ऐसा ना करने पर हो सकता है कि आपको कोई और इंफेक्शन हो जाए और पहले से कमज़ोर शरीर पर उसका गंभीर असर हो जाए.

अगर कोविड ठीक होने के बाद कोई भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएँ.

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