कोरोना वायरस: क्या एनपीआर और जनगणना का काम रुक जाएगा?

अमित शाह

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कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनपीआर) का काम फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए रोका जा सकता है. एनपीआर और जनगणना 2021 के पहले चरण का काम एक अप्रैल से शुरू होना था.

अधिकारियों के मुताबिक इसकी आधिकारिक घोषणा एक या दो दिन में कर दी जाएगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि सरकार में एनपीआर और जनगणना 2021 लेकर उच्च स्तरीय चर्चाएं चल रही हैं और कोरोना वायरस के प्रभाव की वजह से यह काम आगे बढ़ाया जा सकता है.

एनपीआर, हाउस लिस्टिंग और जनगणना 2021 का काम एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच होना था.

बीते सप्ताह गृह मंत्रालय ने कहा था कि एनपीआर और जनगणना का काम शुरू करने की तैयारियां ज़ोरो पर हैं और यह एक अप्रैल से शुरू हो जाएगा.

एनपीआर को लेकर सरकार के फ़ैसले का देशभर में विरोध हो रहा है और कई राज्यों ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया है.

शाहीन बाग़

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जनता कर्फ़्यू के बीच शाहीन बाग़ में पेट्रोल बम से हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर रविवार को देशभर में जनता कर्फ़्यू लगाया गया है. इसी बीच दिल्ली के शाहीन बाग़ में हमले की ख़बर है.

शुरुआती ख़बरों में कहा जा रहा है कि शाहीन बाग में तोड़-फोड़ की गई और पेट्रोल बम फेंके गए. शाहीन बाग़ वही जगह है जहां बीते साल 15 दिसंबर से नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ महिलाएं प्रदर्शन कर रही है.

हालांकि इस संदर्भ में जब बीबीसी ने पुलिस से बात की तो उन्होंने घटना की पुष्टि तो की लेकिन यह नहीं कहा कि यह हमला ही था. पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच हो रही है और जांच के बाद ही कोई बयान जारी किया जाएगा.

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फ़ॉरेंसिक इंवेस्टिगेशन टीम और दिल्ली पुलिस के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं और मामले की जांच चल रही है.

हालांकि कोरोना वायरस को देखते हुए शाहीन बाग़ में प्रदर्शन कर रही महिलाओं से कहा गया था कि वो अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें लेकिन उनका कहना था कि प्रदर्शन जारी रहेगा.

हालांकि प्रदर्शन के आयोजकों ने यह ज़रूर कहा था कि संक्रमण का ध्यान रखते हुए कम संख्या में ही महिलाएं प्रदर्शन में शामिल होगी.

शाहीन बाग़

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वहीं आज जनता कर्फ़्यू को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे लोग सांकेतिक प्रदर्शन के तौर पर अपनी चप्पलों को प्रदर्शन स्थल पर छोड़कर गए थे.

हमले के ठीक बाद घटनास्थल पर पहुंचे एक शख़्स ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि हमलावर बाइक पर सवार होकर आया था.

उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने हमलावर को देखा. वो बाइक पर सवार था और उसकी बाइक पर पीछे एक ट्रे थी. जिसमें संभव है कि रसायनिक तत्व रहे हों.

इस शख़्स के मुताबिक़, पुलिस घटनास्थल पर मौजूद थी. हालांकि इस हमले में किसी के भी हताहत होने की ख़बर नहीं है.

दिल्ली से नोएडा को जोड़ने वाली सड़क पर महिलाएं नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ दिसंबर से ही धरने पर बैठी हुई हैं. बीते सप्ताह दिल्ली सरकार ने निर्देश जारी किए थे जिसके तहत शादी के मौकों को छोड़कर 50 से ज़्यादा लोगों के एक जगह पर इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई थी. बाद में 50 की निर्धारित संख्या को घटाकर 20 कर दिया गया है.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ़ किया था कि ये निर्देश शाहीन बाग़ पर लागू होंगे. शुक्रवार को महिला प्रदर्शनकारियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि एक वक़्त में उनके धरने में 50 से ज़्यादा महिलाएं शरीक नहीं होती है.

नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक प्रदर्शनकारी ने कहा था कि रविवार को वे छोटे-छोटे टेंट में बैठेंगे.

अयूब मिर्जा

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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के नेताओं ने कोरोना वायरस पर की पीएम मोदी के क़दम की तारीफ़

फिलहाल निर्वासन में रह रहे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगिट बालिस्तान के नेताओं ने कोरोना वायरस को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क़दम की सराहना की है.

ग्लासगो में रह रहे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के नेता डॉ. अमजद अयूब मिर्ज़ा ने कहा "भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिअ जनता के कर्फ़्यू की घोषणा की है वो अपने आपमें सराहनीय क़दम है."

पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में स्थिति हाथ से बाहर चली गई है क्योंकि वहां नेतृत्व का अभाव है और कोई एक्शन प्लान बी नहीं है.

एएनआई की ख़बर के मुताबिक़, पाकिस्तान में जिन लोगों को कोरोना वायरस संक्रमित पाया जा रहा है, उन्हें आइसोलेशन के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भेजा जा रहा है.

डॉ. अमजद अयूब मिर्ज़ा ने कहा कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है क्योंकि इससे प्रांत में कोरोना वायरस का संक्रमण और तेज़ी से फैलेगा.

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