चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का मलबा मिला: नासा

इमेज स्रोत, NASA
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे उसके उपग्रह ने भारत के चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का मलबा खोज लिया है.
7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर उतरने की कोशिश करते हुए तय समय से थोड़ी देर पहले विक्रम का संपर्क टूट गया था.

इमेज स्रोत, NASA
नासा ने अपने उपग्रह से ली गई तस्वीरें पोस्ट की हैं जिनमें दिखता है कि विक्रम किस जगह गिरा और कैसे उसका मलबा वहाँ बिखरा हुआ है.
नासा ने उस जगह की पहले और बाद में ली गई तस्वीरें भी पोस्ट की हैं जिनसे समझ आता है कि चंद्रमा पर वो जगह कैसे बदली दिख रही है जहाँ विक्रम गिरा था.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
इससे पहले, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख के सिवन ने 9 सितंबर को कहा था कि इसरो को चांद पर विक्रम लैंडर से जुड़ी तस्वीरें मिली हैं.
47 दिनों की यात्रा के बाद 7 सितंबर को जब चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर दूर था तब इसरो से उसका संपर्क टूट गया था.
इसरो प्रमुख ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "ऑर्बिटर से मिली तस्वीर से लगता है कि विक्रम लैंडर की चांद पर हार्ड लैंडिंग हुई है. चांद का चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की थर्मल इमेज ली है."

इमेज स्रोत, Getty Images
क्या है हार्ड लैंडिंग?
चांद पर किसी स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग दो तरीके से होती है- सॉफ्ट लैंडिंग और हार्ड लैंडिंग. जब स्पेसक्राफ्ट की गति को धीरे-धीरे कम करके चांद की सतह पर उतारा जाता है तो उसे सॉफ्ट लैंडिंग कहते हैं जबकि हार्ड लैंडिंग में स्पेसक्राफ्ट चांद की सतह पर क्रैश करता है.
सॉफ्ट लैन्डिंग का मतलब होता है कि आप किसी भी सैटलाइट को किसी लैंडर से सुरक्षित उतारें और वो अपना काम सुचारू रूप से कर सके.
अगर सब कुछ ठीक रहता और विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग होती तो भारत दुनिया का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा के दक्षिण ध्रुव के क़रीब उतरता.
अब तक अमरीका, रूस और चीन को ही चांद की सतह पर सॉफ्ट लैन्डिंग में सफलता मिली है. हालांकि ये तीन देश अब तक दक्षिण ध्रुव पर नहीं उतरे हैं.

इमेज स्रोत, EPA
चंद्रयान-2 को इस मिशन पर भेजने में 11 साल लगे. विक्रम लैंडर मुख्य रूप से चांद की सतह पर वहां के चट्टानों का विश्लेषण करने वाला था.
विक्रम लैंडर से निकलकर प्रज्ञान रोवर की मदद से चांद की सतह पर पानी की खोज करना इसरो का मुख्य लक्ष्य था.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












