‘तरल प्रकाश’ कैसे चलाएंगे आपके कम्प्यूटर?

प्रकाश

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इमेज कैप्शन, प्रकाश तरल पदार्थ की तरह व्यवहार कर सकता है
    • Author, कार्लोस सेरानो
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड

नोबल पुरस्कार विजेता गेब्रियल गार्सिया मार्केज़ अपनी कहानी 'लाइट इज़ लाइक वॉटर' में टोटो और जॉएल की रोमांचक कहानी बताते हैं. दोनों बच्चे रात में अपने घर का बल्ब फोड़ देते हैं और उनसे बहने वाली रोशनी के बीच तैरते हैं.

कहानी में लिखा गया है, "टूटे हुए बल्ब से निकलने वाली सुनहरी रोशनी एक ताज़े पानी की तरह बहती है और वे भागते रहते हैं. बाद में वे करंट बंद कर देते हैं और नाव लेकर उसे चलाने लगते हैं."

यह दृश्य बेहद काल्पनिक है लेकिन यह हक़ीक़त से दूर भी नहीं है.

'क्वांटम फ़ेनोमेना' का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक बताते हैं कि रोशनी विशेष परिस्थितियों में तरल पदार्थ की तरह व्यवहार करती है जो बहती है और बाधाओं के आने पर लहरों की तरह टकराती है. यह उसी तरह है जिस तरह एक नदी की धारा पत्थरों के बीच बहती है.

तरल प्रकाश

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इमेज कैप्शन, बाएं: सुपरफ़्लूड बनने से पहले जब प्रकाश टकराता है. दाएं: टकराने के बाद जब प्रकाश सुपरफ़्लूड में बदल जाता है.

यह कैसे काम करता है?

'तरल प्रकाश' एक ख़ास पदार्थ है. ये न ठोस रूप में है और न ही प्लाज़मा. इसके अलावा यह तरल और गैस के रूप में भी व्यवहार नहीं करता है.

वैज्ञानिक इसे बोस-आइंस्टीन कंडेंसेट (बीईसी) कहते हैं और इसको किसी 'पदार्थ की पांचवीं स्थिति' माना गया है.

इस स्थिति में सभी कण एक साथ काम करते हैं और एकजुट होते हैं जिसे 'सुपरफ़्लूड' या उत्तम तरल पदार्थ कहा जाता है.

इटली के नेनोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में शोधकर्ता डेनियल सेनवितो कहते हैं, "यह किसी अन्य तरल पदार्थ या गैस की तरह ही लगता है लेकिन इसमें विशेष गुण हैं और इनमें से एक गुण इसके हर हिस्सों से संबंधित है."

यह सुपरफ़्लूड्स लहरें पैदा नहीं करते और इसमें कोई घर्षण या चिपचिपापन नहीं होता है.

सेनवितो कहते हैं कि इनका एक 'सामूहिक व्यवहार' होता है. वह कहते हैं, "यह एक डांसरों के समूह की तरह है जो एक जैसे स्टेप्स करते हैं या एक ही समय पर चल रहे लोगों की तरंग जैसा पैदा करते हैं."

सामान्य तरल पदार्थ दीवार से टकराकर वहीं रुक जाता है लेकिन तरल प्रकाश जैसे सुपरफ़्लूड्स दीवार के पार बह सकते हैं.

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इमेज कैप्शन, तरल प्रकाश सूचना और ऊर्जा को संचारित करने में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है

तरल प्रकाश का क्या इस्तेमाल है?

कुछ सालों तक सुपरफ़्लूड्स को केवल -273 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर पाया जा सकता था लेकिन सेनवितो और उनके सहकर्मियों का कहना है कि कमरे के तापमान पर भी इसे पैदा किया जा सकता है.

प्रकाश और पदार्थ का इस्तेमाल कर वे ऐसा कर भी चुके हैं, इसे वे 'पोलारिटोन्स' कहते हैं. सेनवितो कहते हैं, "रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस पदार्थ के प्रयोग की एक शुरुआत भर है."

कम्प्यूटर

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इमेज कैप्शन, इस तकनीक से नई पीढ़ी के ऑप्टिकल कम्प्यूटर्स बनाए जा सकेंगे

अभी तक लेब में हुए प्रयोगों से बीईसी ने छोटे स्तर पर ही कामयाबी हासिल की है लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि इसमें गहरी क्षमता है और इसके ज़रिए सूचना और ऊर्जा को बिना किसी ठोस वस्तु के संचारित किया जा सकेगा.

एक उदाहरण के तौर पर इससे ऑप्टिकल कम्प्यूटर बनाए जा सकेंगे जिसमें प्रकाश कणों का इस्तेमाल होगा और इसमें सामान्य कम्प्यूटरों की तरह गर्म होने जैसी समस्या नहीं होगी.

इस तकनीक के ज़रिए लेज़र और सोलर पैनल तकनीक को इस्तेमाल करने में क्रांति आ सकती है. हालांकि, अभी के लिए यह कल्पना में ही संभव है या फिर मार्केज़ की कहानियों में था.

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