पांच साल की उम्र तक स्तनपान कराना फायदेमंद

स्तनपान

इमेज स्रोत, Getty Images

सभी जानते हैं कि मां का दूध बच्चे के लिए अमृत के समान है. लेकिन क्या पांच साल की उम्र तक दूध पिलाते रहना बच्चे के लिए फायदेमंद हो सकता है?

एमा शार्डलो हडसन दो बच्चों की मां है. उनकी एक पांच साल की बेटी है और दो साल का बेटा है. वो उन दोनों को ही दूध पिलाती हैं.

एमा का मानना है कि दूध पिलाने से उनके बच्चे स्वस्थ्य रहते हैं और जल्दी बीमार नहीं पड़ते.

ब्रिटेन में ये सलाह दी जाती है कि जबतक मां और बच्चा चाहें, स्तनपान कराया जा सकता है.

ब्रिटेन की स्वास्थ्य एजेंसी नेशनल हेल्थ सर्विस ने ऐसा कोई समय सीमा तय नहीं की है कि कब मां को स्तनपान कराना बंद कर देना चाहिए.

छह महीने की उम्र तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है. छह महीने के बाद दूध पिलाने के साथ-साथ दूसरे खाने दिए जा सकते हैं.

BBC
BBC
स्तनपान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, छह महीने के बाद बच्चे को खाने के लिए कुछ सख्त चीज़े दी जा सकती हैं

ब्रेस्ट फीडिंग के फायदे

विशेषज्ञों का मानना है कि स्तानपान मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद है. मां का दूध बच्चों को इंफेक्शन, दस्त और उल्टी से बचाता है.

जो बच्चे मां का दूध पीते हैं उन्हें आगे चलकर मोटापे और दूसरी बीमारियों का खतरा कम रहता है. दूध पिलाना मां के लिए भी फायदेमंद होता है.

इससे स्तन और अंडाशय के कैंसर का रिस्क कम हो जाता है. लेकिन स्तनपान कब तक कराना चाहिए?

मां को स्तनपान कितनी उम्र तक कराना चाहिए इससे जुड़ी कोई सलाह अब तक जारी नहीं की गई है.

नेशनल हेल्थ सर्विस की वेबसाइट के मुताबिक, "आप और आपका बच्चा जबतक चाहे स्तनपान के फायदे ले सकते हैं."

विश्व स्वास्थ संगठन का मानना है कि स्तानपान दो साल की उम्र या उससे ज़्यादा समय के लिए कराया जाना चाहिए.

BBC
BBC
स्तनपान

इमेज स्रोत, Getty Images

बच्चे को अतिरिक्त पोषण

लेकिन रॉयल कॉलेज ऑफ पेडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ से जुड़े डॉक्टर मैक्स डेवी कहते हैं, "इस बात के कम ही सबूत मिलते हैं कि दो साल की उम्र के बाद स्तनपान से बच्चे को कोई अतिरिक्त पोषण मिलता है."

वो कहते हैं, "दो साल की उम्र के बाद बच्चे को उसकी डाइट के ज़रिए सारे पोषक तत्व मिलने चाहिए. इसलिए इस उम्र में ब्रेस्ट फीडिंग से कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिलता."

मां बच्चे को आगे दूध पिलाते रहना चाहती है, कम करना चाहती है या रोक देना चाहती है, इसका फैसला कई बातों पर निर्भर करता है.

इन बातों में मां का काम पर लौटना, परिवार और दोस्तों का सहयोग, ब्रेस्टफीडिंग कराने में सहजता शामिल है.

डॉक्टर डेवी कहते हैं कि स्तनपान कराना एक बहुत ही व्यक्तिगत बात है.

उनका कहना है, "ये मां और बच्चे के बीच के बॉन्ड को मज़बूत करने में मदद कर सकता है. यकीनन इससे कोई नुकसान भी नहीं होता है. परिवारों को वही करना चाहिए जो उनके हिसाब से सबसे सही हो."

वीडियो कैप्शन, बच्चों के लिए दवा सा है मां का दूध

ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़े सवाल

सच्चाई ये है कि ब्रिटेन में करीब 80% महिलाएं स्तनपान कराना शुरू तो करती हैं लेकिन उनमें से कई बच्चे के जन्म के कुछ हफ्तों बाद ही बंद कर देती हैं.

छह साल की उम्र तक सिर्फ एक तिहाई बच्चों को ही मां का दूध मिल पाता है. 12 साल की उम्र तक ये आकड़ा घटकर 0.5% तक आ जाता है.

2016 में छपी एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी के मुताबिक ब्रिटेन की महिलाएं दुनिया में सबसे कम समय तक ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं.

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ कहते हैं कि कई बार महिलाओं को स्तनपान शुरू कराने के समय परेशानियां हो सकती हैं और ये भी ज़रूरी नहीं कि उन्हें हमेशा सही सलाह और सहयोग भी मिल जाए.

कई बार महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराने में असहज और शर्मिंदगी भरा हमसूस करती हैं. इस वजह से वो बच्चे को दूध पिलाना बंद कर देती हैं.

विशेषज्ञों का कहता है, "कई बार महिलाएं स्तनपान नहीं करा पाती या कराना नहीं चाहती, हमें इस बात का भी सम्मान करना चाहिए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)