|
एकतरफ़ा युद्धविराम की घोषणा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर श्रीलंका में सेना के साथ संघर्ष कर रहे तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई ने तत्काल प्रभाव से एकतरफ़ा युद्धविराम की घोषणा की है. एलटीटीई के प्रवक्ता पुल्ली देवन ने तमिल विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े से बीबीसी को बताया कि क्षेत्र में 'अभूतपूर्व मानवीय संकट' और अमरीका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ की युद्धविराम की अपील के बाद उन्होंने ये क़दम उठाया है. इस बीच, श्रीलंका सरकार ने एलटीटीई के एकतरफ़ा युद्धविराम को ठुकरा दिया है और इसे 'मज़ाक' करार दिया है. श्रीलंका के रक्षा सचिव गोताबाया राजपक्षे ने कहा है कि युद्धविराम की घोषणा उस पक्ष ने की है जो हार रहा है. उन्होंने कहा कि तमिल विद्रोहियों को समर्पण करना ही होगा. रक्षा सचिव ने कहा कि तमिल विद्रोहियों को युद्ध क्षेत्र में फंसे आम नागरिकों की तुरंत रिहा कर देना चाहिए. राहत उपाय उधर, श्रीलंका के युद्ध प्रभावित इलाके से आम नागरिकों के निकालने की कोशिश के तहत संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी जॉन होम्स श्रीलंका पहुँचे हुए हैं. होम्स अपनी यात्रा के दौरान श्रीलंका सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाने का प्रयास करेंगे कि तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष में फंसे लोगों तक पहुँचने का विकल्प खुले.
तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई और श्रीलंका सेना के बीच देश के उत्तर में एक छोटे से हिस्से में लड़ाई निर्णायक दौर में है पर युद्ध क्षेत्र में अभी भी 50 हज़ार आम तमिल नागरिक फंसे हुए हैं. दोनों ओर से जारी संघर्ष में कई आम नागरिकों की भी मौत हुई है और कई घायल हैं. इन लोगों तक जीने के लिए ज़रूरी सामान की आपूर्ति भी ठप्प पड़ी हुई है और चिकित्सा, भोजन, पानी या प्रभावित क्षेत्र से निकलने के विकल्प नहीं पहुँच पा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय आम नागरिकों की इस स्थिति को लेकर चिंतित है. भारत और अमरीका पहले ही श्रीलंका सरकार से कह चुके हैं कि मानवाधिकारों का उल्लंघन तत्काल रोका जाना चाहिए और निर्दोष लोगों को वहाँ से सुरक्षित बाहर निकाला जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकारों के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी जॉन होम्स युद्ध क्षेत्र में फंसे लोगों की स्थिति को लेकर तो चिंतित हैं ही, साथ ही उन्होंने ताज़ा संघर्ष के दौरान विस्थापित हुए एक लाख लोगों की स्थिति को भी चिंताजनक बताया है. युद्ध क्षेत्र से बाहर निकल पाने में सफल रहे क़रीब एक लाख तमिल नागरिकों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है. ये लोग सुविधाओं के अभाव में सरकारी अस्थाई शिविरों में रहने को विवश हैं. बढ़ता दबाव इससे पहले अमरीका ने कहा कि श्रीलंका में हज़ारों आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए वहाँ तत्काल युद्ध रोकने की ज़रूरत है. व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ओबामा प्रशासन श्रीलंका में युद्ध प्रभावित क्षेत्र में हो रहे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के उल्लंघन को लेकर ख़ासा चिंतित है. व्हाइट हाउस ने तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष के दौरान मारे जा रहे आम लोगों की लगातार बढ़ती तादाद पर भी चिंता जताई. इससे पहले भारत ने श्रीलंका की सरकार से आम लोगों के युद्ध क्षेत्र में फंसे होने और हताहत होने को लेकर चिंता जताई और कहा कि सरकार वहाँ युद्ध रोके.
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिव शंकर मेनन श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मिलकर तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई ख़त्म करने की अपील पहले ही कर चुके हैं. भारत की ओर से चिंता की एक वजह यह भी है कि तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई को भारतीय राज्य तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है. इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एमके नारायणन और शिव शंकर मेनन को श्रीलंका रवाना किया था. जारी है युद्ध पर श्रीलंका सरकार की ओर से ऐसे संकेत नहीं है कि वे इस संघर्ष से इस वक़्त पीछे हटने की कोई मंशा भी रखते हैं. श्रीलंका सरकार ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान बंद करने से इनकार किया है. साथ ही श्रीलंका सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों को संघर्ष के क्षेत्र में जाने देने की अपील ठुकरा दी है. संयुक्त राष्ट्र इससे चिंतित है और जॉन होम्स की रविवार को श्रीलंका यात्रा इस लिहाज से अहम मानी जा रही है. इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार से कहा था कि वे संघर्ष विराम करें ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके और लोगों तक सहायता पहुँचाई जा सके. साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की थी कि वह उत्तरी श्रीलंका में मानवीय दल भेज रहा है जहाँ श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में लगभग 50 हज़ार लोग फंसे हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने गुरुवार को मानवीय दल तत्काल भेजने की घोषणा की थी. |
इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका पर युद्ध रोकने का दबाव बढ़ा25 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस भारत ने श्रीलंका पर दबाव डाला24 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका का कार्रवाई रोकने से इनकार24 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस नारायणन और मेनन श्रीलंका जाएँगे24 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों से आत्मसमर्पण को कहा23 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस तमिलों की हत्या रोकने की अपील22 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित22 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'तमिल क्षेत्र से 52 हज़ार आम लोग भागे'21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||