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भारत ने श्रीलंका पर दबाव डाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिव शंकर मेनन ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मिल कर तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई ख़त्म करने की अपील की. भारतीय प्रतिनिधियों ने लगभग डेढ़ घंटे तक चली बातचीत में लड़ाई को लेकर भारत की चिंताओं से राष्ट्रपति को अवगत कराया. तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई को भारतीय राज्य तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है. इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एमके नारायणन और शिव शंकर मेनन को श्रीलंका रवाना किया था. दोनों ने राजपक्षे के साथ बातचीत में उम्मीद जताई कि जल्दी ही कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा. एमके नारायणन ने जारी बयान में कहा है, "हमने उत्तरी श्रीलंका की स्थिति पर भारत सरकार की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया, ख़ास कर तमिल नागरिकों की मौतों को लेकर." श्रीलंका का इनकार इस बीच श्रीलंका सरकार ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान बंद करने से इनकार किया है. साथ ही श्रीलंका सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों को संघर्ष के क्षेत्र में जाने देने की अपील ठुकरा दी है. इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार से कहा था कि वे संघर्ष विराम करें ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके और लोगों तक सहायता पहुँचाई जा सके. साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की थी कि वह उत्तरी श्रीलंका में मानवीय दल भेज रहा है जहाँ श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में लगभग 50 हज़ार लोग फंसे हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने गुरुवार को मानवीय दल तत्काल भेजने की घोषणा की थी. |
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