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दो वरिष्ठ तमिल विद्रोहियों का समर्पण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सेना का कहन है कि एलटीटीई के दो वरिष्ठ तमिल विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है. सेना की वेबसाइट के अनुसार विद्रोहियों के मीडिया समन्वयक दया मास्टर और अत्यंत वरिष्ठ विद्रोहियों के लिए दुभाषिए का काम करने वाले जार्ज ने आत्मसमर्पण कर दिया है. संवाददाताओं का कहना है कि अगर ये रिपोर्टें सही हैं तो एलटीटीई के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका होगा. माना जाता है कि तमिल विद्रोहियों का नेतृत्व हमेशा से इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि किसी भी विद्रोही को समर्पण करने की बजाय आत्महत्या कर लेना चाहिए. सेना का कहना है कि ये दोनों आम लोगों की भागती हुई भीड़ में शामिल थे. पिछले कुछ दिनों से सेना ने उत्तर पूर्व में विद्रोहियों को एक छोटे से इलाक़े में घेर रखा है. सेना की वेबसाइट के अनुसार एलटीटीई में दया मास्टर की प्रमुख भूमिका रही है और वो कई वर्षों से संगठन का प्रवक्ता रहा है. सेना का कहना है कि दया मास्टर का समर्पण न केवल विद्रोहियों के लिए गहरा झटका होगा बल्कि विदेशों में रहने वाले उन तमिलों के लिए भी जो विद्रोहियों के लिए बड़ी मात्रा में धन भेजते हैं. दया मास्टर के साथ जार्ज ने भी समर्पण किया है जो वरिष्ठ विद्रोही नेता एसपी तमिलसेल्वन का अनुवादक था. तमिलसेल्वन की मौत 2007 में सेना के एक हवाई हमले में हुई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'श्रीलंका में मेडिकल आपूर्ति की कमी'19 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में फँसे हज़ारों आम तमिल भागे20 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'तमिल क्षेत्र से 52 हज़ार आम लोग भागे'21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस रेड क्रॉस श्रीलंका की स्थिति पर चिंतित21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'आम लोगों पर बमबारी कर रही है सेना'21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित22 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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