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रेड क्रॉस श्रीलंका की स्थिति पर चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) ने उत्तरी श्रीलंका में हालात को आपदा की स्थिति क़रार दिया है. आईसीआरसी के अभियानों के प्रमुख पिए क्रॉनबुल ने जिनीवा में कहा कि श्रीलंका में संघर्ष वाले इलाक़े लगातार घट रहे हैं मगर वहाँ पर अब भी दसियों हज़ार आम लोग फँसे हुए हैं. उन्होंने तमिल टाइगर विद्रोहियों पर आरोप लगाया कि वे लोगों को उन क्षेत्रों से निकलने नहीं दे रहे हैं जबकि सरकारी फ़ौजें चिकित्सा आपूर्ति पहुँचाने में बाधा डाल रही है. मगर ब्रिटेन में श्रीलंका के राजदूत निहाल जयसिंघे ने रेड क्रॉस के इन आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को अभी संघर्ष विराम की घोषणा करने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि उनकी सेना आम लोगों को निशाना बनाते हुए गोलियाँ नहीं चला रही है. आईसीआरसी यूँ तो अफ़ग़ानिस्तान से लेकर दारफ़ुर और इराक़ तक में युद्ध क्षेत्रों में काम करता है मगर पिए क्रॉनबुल के मुताबिक़ उत्तरी श्रीलंका के संघर्ष वाले इलाक़ों में फँसे लोगों के हालात बिल्कुल अलग हैं और स्थिति आपदा वाली है. बिगड़ती स्थिति वहाँ संघर्ष वाला इलाक़ा अब घटकर 12 वर्ग किलोमीटर रह गया है. स्थिति के बारे में क्रानबुल ने कहा, "मुझे याद नहीं आता कि इतनी कम जगह में मैंने इतने ज़्यादा लोगों को फँसे देखा हो और वो भी इन हालात में जहाँ उनके पास सुरक्षा पाने की उम्मीद भी बहुत ही कम है." उन्होंने कहा, "वे लोग फँसे हुए हैं, उन्हें निकलने भी नहीं दिया जा रहा है और उनके चारों ओर संघर्ष जारी है. वे कहीं भी जाएँ, कुछ भी करें उनके जीवन को ख़तरा बना हुआ है." फँसे हुए लोगों में रेड क्रॉस के भी 80 लोग हैं और उन लोगों ने बताया है कि पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों आम लोग मारे गए हैं. इसके अलावा वहाँ लगभग एक हज़ार लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें तुरंत उस क्षेत्र से बाहर निकालने की ज़रूरत है. आईसीआरसी का कहना है कि आम लोगों की मौत रोकने के लिए दोनों ही पक्षों को तुरन्त कुछ क़दम उठाने चाहिए. उनके मुताबिक़ तमिल विद्रोहियों को फँसे हुए लोगों को बाहर निकलने देना चाहिए और सरकार को उन लोगों तक राहत सामग्री पहुँचने देनी चाहिए. क्रॉनबुल चिकित्सा सामग्रियों के पहुँचने में हो रही अनावश्यक देर से चिंतित है और साथ ही उसके अनुसार श्रीलंका आ रहे रेड क्रॉस कर्मचारियों को वीज़ा मिलने में काफ़ी परेशानी हो रही है. 60 हज़ार से अधिक लोग संघर्ष वाला इलाक़ा छोड़कर भाग चुके हैं और माना जा रहा है कि उन इलाक़ों में तमिल विद्रोही अब अंतिम मोर्चा सँभाले हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'तमिल क्षेत्र से 52 हज़ार आम लोग भागे'21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'आम लोगों पर बमबारी कर रही है सेना'21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में फँसे हज़ारों आम तमिल भागे20 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'श्रीलंका में मेडिकल आपूर्ति की कमी'19 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'सेना ने अभियान फिर शुरु किया'15 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में अस्थाई संघर्षविराम की घोषणा12 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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