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सोमवार, 20 अप्रैल, 2009 को 07:39 GMT तक के समाचार
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श्रीलंका में फँसे हज़ारों आम तमिल भागे
श्रीलंका
श्रीलंकाई सेना तेज़ी से एलटीटीई के प्रभाव वाले इलाक़ों पर कब्ज़ा करती जा रही है
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि श्रीलंका में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले एक छोटे क्षेत्र में फँसे 35 हज़ार आम नागरिक बचकर भाग निकले हैं.

ऐसा उस समय हुआ जब श्रीलंका के सैनिकों ने घिरे हुए विद्रोहियों को बचानेवाले एक बड़े अवरोध को गिराकर वहाँ नियंत्रण कर लिया.

श्रीलंका सेना का कहना है कि आम लोगों को लड़ाई वाली जगह से काफ़ी दूर सुरक्षित शिविरों में ले जाया जा रहा है.

इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था रेड क्रॉस भी समुद्र के रास्ते आम लोगों को बाहर निकाल रही है.

श्रीलंका सेना ने तमिल विद्रोहियों को हथियार डालने के लिए 24 घंटे का समय दिया है और ऐसा नहीं करने पर सैनिक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इन इलाक़ों में क़रीब एक लाख लोग रह रहे हैं जहां कई महीनों से संघर्ष चल रहा है.

रेड क्रॉस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि संघर्ष वाले इलाक़ों में उनके डॉक्टर बुरी तरह थक चुके हैं और उनके पास दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक भी नहीं बचा है.

 सेना ने इस क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया है और क़रीब पांच हज़ार लोगों को निकाल लिया गया है
सेना के प्रवक्ता

दोनों ही पक्ष यानी सेना और लिट्टे एक दूसरे पर आम नागरिकों को मारने का आरोप लगाते रहे हैं.

विदेशी पत्रकारों को संघर्ष वाले क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी गई है जिसके कारण इन आरोपों की सच्चाई का पता नहीं चल पा रहा है.

सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायक्कारा ने कहा कि सेना ने उस किलेनुमा गतिरोध को तोड़ दिया जो लिट्टे के आखिरी ठिकानों तक पहुंचने में रोड़ा बना हुआ था.

उनका कहना था, ''सेना ने इस क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया है और क़रीब पांच हज़ार लोगों को निकाल लिया गया है.''

कोलंबो में मौजूद बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड का कहना है कि अगर इतनी संख्या में लोग निकले हैं तो एक ही दिन में किसी युद्धग्रस्त क्षेत्र से निकलने वाले लोगों की यह सबसे बड़ी संख्या होगी.

संवाददाताओं का कहना है कि जिस क्षेत्र में यह संघर्ष चल रहा है वहां रह रहे लोगों के लिए जीवन नरक समान हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इन क्षेत्रों में पिछले कई महीनों से लगातार बमबारी हो रही है और लिट्टे लोगों को वहां से बच निकलने से रोक रही है.

सरकार ने रेड क्रॉस को भी कई संघर्षरत क्षेत्रों की ज़मीन पर जाने नहीं दिया है.

यही कारण है कि रेड क्रॉस सिर्फ़ समुद्र के रास्ते से ही लोगों को बाहर निकाल पा रही है. रेड क्रॉस के जहाज़ हर हफ्ते क़रीब 400 से 500 वृद्ध, बीमार और घायल लोगों को निकाल रहे हैं.

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