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श्रीलंका में '60 आम नागरिकों की मौत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में पूर्वोत्तर इलाक़े में हुई ताज़ा गोलाबारी में कम से कम 60 नागरिक मारे गए हैं. यह घटना ऐसे इलाक़े में हुई जहाँ गोलीबारी की इजाज़त नहीं है. एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी टी वर्थाराजा ने इसकी जानकारी दी है. देश के पूर्वोत्तर इलाक़े में दो स्वास्थ्य केंद्र को भी गोलाबारी में नुक़सान पहुँचा है. श्रीलंका में सरकारी सैनिकों और तमिल विद्रोहियों के बीच जारी लड़ाई में हज़ारों आम नागरिक फँसे हुए हैं. सेना ने कहा है कि ताज़ा घटना के लिए वह ज़िम्मेदारी नहीं है. दूसरी ओर एलटीटीई की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. मुलईतिवू ज़िले के तटीय इलाक़े में हुई गोलाबारी में 300 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. सेना का दावा है कि उसने आठ दिनों तक चली भारी लड़ाई के बाद देश के पूर्वोत्तर में विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले सभी इलाक़ों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है. दावा सेना का यह भी दावा है कि अब तमिल विद्रोही उन इलाक़ों में घुस गए हैं, जिन्हें सरका ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षित ज़ोन घोषित कर रखा है. यह सुरक्षित ज़ोन तटीय क्षेत्र में 20 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है. डॉक्टर वर्थाराजा ने बीबीसी को बताया कि कुछ गोले स्वास्थ्य केंद्रों के परिसर में आकर गिरे. उस समय लोग बच्चों के लिए दूध पाउडर लेने आए थे. उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान गोलाबारी में तेज़ी आई है और एक अन्य स्वास्थ्य केंद्र को भी निशाना बनाया गया है. स्वास्थ्य अधिकारी ने यह भी बताया कि गोलाबारी उस इलाक़े से हो रही थी, जहाँ सुरक्षाकर्मियों का दबदबा है. इस घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है. क्योंकि श्रीलंका की सरकार युद्ध प्रभावित इलाक़ों में स्वतंत्र पत्रकारों को जाने नहीं दे रही है. हालाँकि सेना ने इस मामले में अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है. श्रीलंका में सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नान्यकारा ने कहा, "हमने सुरक्षित ज़ोन में कोई गोलाबारी नहीं की है. हो सकता है कि तमिल विद्रोहियों के दबाव में डॉक्टर आम नागरिकों के मारे जाने की बात बोल रहे हों." अब तक एलटीटीई की ओर से कोई बयान नहीं आया है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ने कहा है कि इलाक़े में हुई गोलाबारी के कारण बुधवार को एक सहायता कर्मी की मौत हो गई. बुधवार को ही रेड क्रॉस ने 500 बीमार और घायल लोगों को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकाला था. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में पाकिस्तानी ड्राइवर सम्मानित06 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों का आख़िरी गढ़ ध्वस्त'05 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस सौ से अधिक 'तमिल विद्रोही' मारे गए04 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में भीषण जंग जारी02 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में नागरिकों को लेकर चिंता27 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस दक्षिण एशिया के पत्रकारों को 'ख़तरा'24 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में भीषण संघर्ष जारी17 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों को मारने का दावा14 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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